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  • बोरीवली में 2,000 दुकानें बंद, बैरिकेडिंग पर बड़ा विरोध

    बोरीवली में 2,000 दुकानें बंद, बैरिकेडिंग पर बड़ा विरोध

    मुंबई के बोरीवली पश्चिम स्टेशन के बाहर पैदल मार्ग पर लगाए गए बैरिकेड्स के खिलाफ 2,000 दुकानों ने तीन घंटे का शटर डाउन प्रोटेस्ट किया। व्यापारी कहते हैं कि कारोबार ठप हो रहा है, जबकि ट्रैफिक पुलिस का दावा है कि भीड़ 60-70% कम हुई है।

    मुंबई: बोरीवली पश्चिम स्टेशन के बाहर लगाए गए नए बैरिकेड्स को लेकर माहौल गर्म हो गया है। करीब 2,000 दुकानों ने बुधवार सुबह तीन घंटे तक शटर डाउन रखकर बीएमसी और ट्रैफिक पुलिस के खिलाफ विरोध जताया।
    व्यापारियों का आरोप है कि 12 पैदल क्रॉसिंग बंद होने से ग्राहकों तक पहुंच बेहद मुश्किल हो गई है, जबकि पुलिस और बीएमसी का कहना है कि इस फैसले से सड़क पर 60–70% ट्रैफिक कम हुआ है और पब्लिक को सिर्फ कुछ समय एडजस्ट करना होगा।

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    🔹 बैरिकेड्स क्यों लगाए गए?

    पिछले कुछ महीनों से बोरीवली स्टेशन के आसपास ट्रैफिक जाम की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं।
    ट्रैफिक पुलिस और बीएमसी ने:

    • जाम्बली गली से लेकर चंदावरकर रोड तक 12 पैदल क्रॉसिंग बंद की
    • स्टेशन के सामने रेलिंग लगाई
    • कई जगह पुलिसकर्मी तैनात किए

    DCP संदीप जाधव के मुताबिक:

    “लोगों को बदलाव की आदत होने में दो-तीन महीने लगेंगे, लेकिन ट्रैफिक में अब 60–70% सुधार हुआ है।”

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    🔹 दुकानदार क्यों नाराज़ हैं?

    इंद्रप्रस्थ और ठक्कर शॉपिंग सेंटर के व्यापारियों का कहना है कि स्टेशन से प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 की एंट्री इन्हीं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से होती है।

    अब ग्राहकों को:

    • 300 मीटर दूर यू-टर्न लेना पड़ता है
    • पार्किंग ढूंढने में ज्यादा समय लग रहा है
    • सीनियर सिटिज़न और महिलाएं परेशान हैं

    Borivali Businessmen Association (BBA) के चेयरमैन ललित जैन ने कहा:

    “40 साल में पहली बार हमें दुकानें बंद करनी पड़ीं। बैरिकेड्स हटने चाहिए, वरना कारोबार डूब जाएगा।”

    🔹 दुकानदारों की मांग

    मांगस्थिति
    सभी क्रॉसिंग फिर से खुलें⛔ प्रशासन ने मना किया
    क्रॉसिंग कम से कम 2 फीट चौड़ी होविचाराधीन
    LT रोड- SV रोड पर दो-तरफा ट्रैफिकनिर्णय बाकी
    अवैध ठेलों पर कार्रवाईजारी
    स्टेशन परिसर हॉकर्स-फ्री ज़ोनआंशिक रूप से लागू
    ऑटो रिक्षा लाइन में अनुशासनपुलिस तैनाती जारी

    🔹 स्थानीय लोगों की राय

    📍 राय इस मामले में दो हिस्सों में बंटी हुई है।

    🚦 ट्रैफिक कम होने से खुश लोग

    • कहते हैं पहले 15–20 मिनट जाम में फंसते थे, अब 5 मिनट में रास्ता साफ।

    🚶‍♂️ पैदल यात्रियों और ग्राहकों की दिक्कत

    • कहते हैं स्टेशन जाना मुश्किल हो गया है, शॉपिंग सेंटर में एंट्री भूल जाएं।

    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. दुकानदारों ने दुकानें क्यों बंद कीं?

    क्योंकि स्टेशन के बाहर पैदल क्रॉसिंग बंद होने से ग्राहक उनकी दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।


    Q2. क्या बैरिकेड्स हटाए जाएंगे?

    फिलहाल पुलिस ने साफ किया है कि बैरिकेड्स नहीं हटेंगे, क्योंकि ट्रैफिक में सुधार दिख रहा है।


    Q3. क्या आगे बातचीत होगी?

    व्यापारी संगठन प्रशासन से फिर बैठक की मांग कर रहे हैं।


    Q4. क्या ट्रैफिक सच में कम हुआ?

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार ट्रैफिक 60–70% तक कम हुआ है, लेकिन इसका नुकसान दुकानों को हो रहा है।

  • सीनियर सिटीजन को 30% टैक्स छूट का मैसेज फर्जी: BMC ने किया अलर्ट

    सीनियर सिटीजन को 30% टैक्स छूट का मैसेज फर्जी: BMC ने किया अलर्ट

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे “ज्येष्ठ नागरिकों को 30% प्रॉपर्टी टैक्स छूट” वाले संदेश को BMC ने फर्जी बताया। निगम ने अपील की—नागरिक वॉर्ड ऑफिस न पहुंचें।

    मुंबई: सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे उस संदेश को BMC ने पूरी तरह फर्जी करार दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि महाराष्ट्र सरकार के हाउसिंग पॉलिसी 2025 के तहत वरिष्ठ नागरिकों को उनकी रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर 30% टैक्स छूट दी जा रही है। BMC ने साफ कहा है कि नगर निगम अधिनियम 1888 में ऐसी कोई भी प्रावधान नहीं है और वरिष्ठ नागरिक अनावश्यक रूप से वॉर्ड ऑफिसों में भीड़ न लगाएँ।

    सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज से बढ़ी वॉर्ड ऑफिसों में भीड़

    पिछले कुछ दिनों से WhatsApp, Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक संदेश बड़े पैमाने पर वायरल हो रहा था।
    उसमें लिखा था कि “ज्येष्ठ नागरिक को उनकी रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर 30% प्रॉपर्टी टैक्स छूट मिलेगी”।

    इस संदेश को सच मानकर कई वरिष्ठ नागरिक मुंबई के अलग–अलग BMC वॉर्ड ऑफिसों में जानकारी के लिए पहुंच रहे थे।
    प्रशासन को अचानक बढ़ी भीड़ से दिक्कतें भी हुईं।

    BMC ने दिया स्पष्ट बयान: यह मैसेज 100% फर्जी

    बीएमसी ने प्रेस नोट जारी कर कहा—

    • नगर निगम अधिनियम 1888 में वरिष्ठ नागरिकों के लिए 30% टैक्स छूट का कोई नियम नहीं है।
    • नागरिक ऐसे मैसेज पर विश्वास न करें।
    • किसी भी प्रकार की पूछताछ के लिए वॉर्ड ऑफिस न आएँ, ताकि उन्हें बेवजह परेशानी न झेलनी पड़े।

    प्रशासन ने इसे सोशल मीडिया अफवाह करार दिया है।

    कौन-सी छूट वास्तव में लागू है? BMC ने बताया

    BMC ने सही जानकारी साझा करते हुए कहा—

    ✔ 1. 500 sq ft से कम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर टैक्स छूट

    1 जनवरी 2022 से मुंबई में 500 वर्ग फुट या उससे कम क्षेत्र वाली रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज को टैक्स में छूट दी गई है।

    ✔ 2. माजी सैनिक और शहीद परिवार को भी छूट

    • पूर्व सैनिक
    • उनकी विधवा
    • शहीद सैनिकों के अविवाहित परिवारजन
      इनकी एक प्रॉपर्टी को टैक्स में छूट मिलती है (शासन के टैक्स को छोड़कर)।

    ✔ वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई अलग से छूट नहीं

    बीएमसी ने दोहराया कि ज्येष्ठ नागरिकों के लिए 30% टैक्स छूट का संदेश पूरी तरह गलत है।


    FAQ सेक्शन

    1. क्या मुंबई में वरिष्ठ नागरिकों को प्रॉपर्टी टैक्स में 30% छूट मिलती है?

    नहीं, बीएमसी ने साफ कहा है कि ऐसा कोई नियम मौजूद नहीं है। वायरल मैसेज पूरी तरह फर्जी है।

    2. क्या इस फर्जी मैसेज के कारण बीएमसी कार्यालयों में भीड़ बढ़ी?

    हाँ, कई वरिष्ठ नागरिक वॉर्ड ऑफिस पहुंच गए थे, इसलिए बीएमसी ने स्पष्टीकरण जारी किया।

    3. वास्तव में मुंबई में किसे टैक्स छूट मिलती है?

    500 sq ft से कम क्षेत्र वाली रिहायशी प्रॉपर्टी को और पूर्व सैनिक/शहीद परिवार को छूट मिलती है।

    4. वरिष्ठ नागरिकों को कोई विशेष टैक्स छूट है?

    नहीं, वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से कोई छूट लागू नहीं है।

    5. सही जानकारी कहाँ से लें?

    बीएमसी की आधिकारिक वेबसाइट, प्रेस नोट या वॉर्ड ऑफिस में अधिकृत अधिकारियों से।

  • मुंबई में 100 से ज़्यादा चोरी करने वाला कुख्यात चोर गिरफ्तार

    मुंबई में 100 से ज़्यादा चोरी करने वाला कुख्यात चोर गिरफ्तार

    मुंबई पुलिस ने 100 से ज़्यादा दुकानों में सेंधमारी करने वाले कुख्यात चोर मोनू उर्फ़ आज़न खान को गिरफ्तार किया। मेडिकल स्टोर, हार्डवेयर व मिठाई दुकानों को निशाना बनाने वाला यह आरोपी सिर्फ़ कैश चुराता था। पढ़ें पूरी खबर।

    मुंबई लंबे समय से फरार चल रहे 38 वर्षीय अजान खान उर्फ़ मोनू को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जो शहर में 100 से ज़्यादा दुकानों में सेंधमारी कर चुका है। यह आरोपी सिर्फ़ नकदी चुराता था और चोरी के तुरंत बाद ड्रग्स और फिज़ूलखर्ची में पैसे उड़ा देता था। पुलिस की 10 दिन की निगरानी के बाद उसे मलवानी इलाके से रंगे हाथों पकड़ा गया।

    मोनू का अनोखा चोरी करने का तरीका

    पुलिस के मुताबिक, मोनू की चोरी करने की शैली बाकी चोरों से अलग थी।
    वह सिर्फ़ उन दुकानों को निशाना बनाता था जहां नकदी मिलने की संभावना अधिक हो—जैसे मेडिकल स्टोर, हार्डवेयर शॉप, मिठाई की दुकानें, किराना स्टोर व छोटी दुकानें
    खास बात यह थी कि वह ज्वेलरी, मोबाइल फोन या कोई कीमती सामान नहीं चुराता था
    चोरी में हाथ लगते ही वह पूरा पैसा ड्रग्स और पार्टी में खर्च कर देता था और फिर दो दिन तक गायब रहता था।

    कई इलाकों की पुलिस कर रही थी तलाश

    मोनू मलवानी क्षेत्र में रहता था, लेकिन परिवार के साथ नहीं रहता था।
    मुंबई के कांदिवली, मालाड और बांगुर नगर में उसने कई चोरी की वारदातें की थीं।
    कई पुलिस टीमें एक साल से उसकी तलाश में थीं, लेकिन वह हर बार बच निकलता था।

    10 दिन तक पुलिस ने की लगातार निगरानी

    DCP संदीप जाधव और ACP नीता पाडवी के मार्गदर्शन में
    सीनियर इंस्पेक्टर करण सोनकवडे,
    असिस्टेंट इंस्पेक्टर हेमंत गीते
    और सब-इंस्पेक्टर नितिन साटम की टीम ने आरोपी पर करीब 10 दिन तक लगातार नज़र रखी।

    CCTV फुटेज में सामने आया कि वह हर रात लगभग 2.30 बजे मार्वे रोड, स्थित मालवनी कब्रिस्तान के पास वाले सिग्नल से गुजरता है
    पुलिस टीम उसकी रूटीन मूवमेंट का पीछा करते हुए शनिवार की रात उसे पकड़ने में सफल रही।

    रंगे हाथों गिरफ्तार, चोरी की बाइक भी बरामद

    शनिवार देर रात पुलिस ने उसे एक दुकान का शटर उठाते समय रंगे हाथों पकड़ लिया।
    जांच में पता चला कि जिस बाइक से वह घूमता था वह भी मटुंगा इलाके से चोरी की गई थी
    अदालत ने उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया है और चोरी की रकम व सामान की बरामदगी की कोशिशें जारी हैं।

    कई मामलों का खुलासा

    कांदिवली पुलिस के मुताबिक, मोनू की गिरफ्तारी के बाद अब तक
    10 चोरी के मामले सुलझाए जा चुके हैं,
    जिनमें छह मामले कांदिवली के, जबकि बाकी मालाड और बांगुर नगर के हैं।
    पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी मामले खुल सकते हैं।


    FAQ सेक्शन

    1. मोनू कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?

    मोनू उर्फ़ आज़न खान पर मुंबई में 100 से ज़्यादा दुकानों में चोरी करने का आरोप है। पुलिस ने उसे मलवानी इलाके से रंगे हाथों पकड़ा।

    2. वह किस तरह की दुकानों को निशाना बनाता था?

    वह सिर्फ़ मेडिकल स्टोर, हार्डवेयर दुकानें, मिठाई और किराना दुकानों में सेंध लगाता था और सिर्फ़ नकदी चुराता था।

    3. पुलिस ने उसे कैसे पकड़ा?

    करीब 10 दिन की निगरानी और CCTV फुटेज की मदद से उसकी हर रात की मूवमेंट ट्रैक की गई। अंत में उसे शटर उठाते हुए रंगे हाथों दबोच लिया गया।

    4. क्या चोरी का सामान बरामद हुआ है?

    पुलिस ने उसकी चोरी की बाइक बरामद की है, और बाकी चोरी की रकम व सामान की तलाश जारी है।

    5. आरोपी पर अब तक कितने केस दर्ज हैं?

    कांदिवली पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के साथ 10 चोरी के केस सुलझा लिए हैं, और संख्या बढ़ सकती है।

  • BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी को ठंडी प्रतिक्रिया, सिर्फ 855 ने किया डिपॉज़िट पेमेंट

    BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी को ठंडी प्रतिक्रिया, सिर्फ 855 ने किया डिपॉज़िट पेमेंट

    मुंबई में BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी को उम्मीद के मुताबिक रिस्पॉन्स नहीं मिला। 23,704 लोगों ने रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन सिर्फ 855 ने ही डिपॉज़िट जमा किया। जानिए क्यों नहीं बिक रहे 55 लाख से 1 करोड़ तक के ये फ्लैट्स।

    मुंबई: बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी 2024 को इस बार कमजोर रिस्पॉन्स मिला है। कुल 23,704 नागरिकों ने रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन सिर्फ 855 लोगों ने ही ₹11,000 का डिपॉज़िट पेमेंट किया है। जबकि आवेदन की अंतिम तारीख में अब केवल चार दिन बाकी हैं।
    यह फ्लैट्स डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशन (DCPR), 2034 के तहत विकसित किए गए हैं। कुल 426 फ्लैट्स में से 381 EWS (Economically Weaker Section) और 45 LIG (Low Income Group) के लिए रखे गए हैं।

    🏠 महंगे दामों से खरीदार पीछे हटे

    BMC ने 16 अक्टूबर को इन 426 फ्लैट्स की बिक्री की घोषणा की थी, जिनकी कीमतें ₹55 लाख से ₹1.07 करोड़ के बीच रखी गई हैं।
    इन फ्लैट्स से BMC को करीब ₹308 करोड़ की आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन उच्च दामों के कारण खरीदारों की रुचि कम देखी जा रही है।
    BMC के मुताबिक, कीमतें स्थानीय रेडी रेकनर रेट से लगभग 10% ज़्यादा हैं, जो मिडल क्लास और लो-इनकम परिवारों के लिए भारी पड़ रही हैं।

    स्थान:
    इन फ्लैट्स के लोकेशन में मरोल (अंधेरी), मजास गांव (जोगेश्वरी ईस्ट), गोरेगांव वेस्ट, कांदिवली वेस्ट, भांडुप वेस्ट, भायखला, दहिसर और कांजुरमार्ग शामिल हैं।

    📉 BMC कर सकती है फ्लैट के रेट्स में कमी

    एक वरिष्ठ BMC अधिकारी के अनुसार —

    “अगर खरीदार नहीं मिलते हैं, तो हम कीमतों में कमी पर विचार कर सकते हैं। लेकिन उससे पहले हम मार्केट की स्थिति और अन्य सरकारी हाउसिंग इन्वेंटरी का रिव्यू करेंगे।”

    यह फ्लैट्स DCPR 2034 की रेग्युलेशन 15 और 33(20)(b) के तहत डेवेलपर्स से लिए गए हैं, जिसमें उन्हें 4000 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर बने प्रोजेक्ट का कुछ हिस्सा अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए देना होता है।

    पहले ऐसे फ्लैट्स MHADA लॉटरी के जरिए अलॉट किए जाते थे, लेकिन इस बार BMC ने खुद यह प्रक्रिया संभाली है।

    🗓️ ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी का शेड्यूल

    • अंतिम तारीख: 14 नवंबर 2025 (रात 11:59 बजे तक)
    • योग्य आवेदकों की सूची: 18 नवंबर (शाम 5 बजे)
    • लॉटरी ड्रॉ: 20 नवंबर (शाम 5 बजे)
    • सफल आवेदकों की घोषणा: 21 नवंबर (शाम 5 बजे)
    • आधिकारिक वेबसाइट: https://housing.mcgm.gov.in

    📊 BMC आवेदन डेटा (16 अक्टूबर – 10 नवंबर तक)

    विवरणसंख्या
    कुल रजिस्टर्ड आवेदक23,704
    रजिस्ट्रेशन फीस (₹1,180) भरने वाले1,644
    डिपॉज़िट (₹11,000) जमा करने वाले855

    🧩 क्यों नहीं मिल रही है जनता की रुचि?

    • फ्लैट्स की कीमतें आमदनी के मुकाबले ज्यादा
    • 269 से 489 वर्गफुट के छोटे आकार
    • EMI और ब्याज दरों में बढ़ोतरी
    • निजी बिल्डर्स के सस्ते ऑफर्स से मुकाबला
    • जगहों की सीमित कनेक्टिविटी

    🏡 EWS और LIG के लिए उम्मीदें अभी बाकी

    हालांकि शुरुआत धीमी रही है, लेकिन BMC को उम्मीद है कि जैसे-जैसे अंतिम तिथि करीब आएगी, आवेदकों की संख्या बढ़ेगी।
    इसके अलावा, अगर कीमतों में कमी की घोषणा होती है, तो यह मिडल क्लास खरीदारों के लिए बड़ा मौका बन सकता है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी क्या है?
    यह एक सरकारी योजना है जिसमें मुंबई के अलग-अलग इलाकों में बने सस्ते घरों को लॉटरी सिस्टम के जरिए पात्र नागरिकों को आवंटित किया जाता है।
    Q2. आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?
    14 नवंबर 2025 रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन आवेदन और डिपॉज़िट किया जा सकता है।
    Q3. किन इलाकों में फ्लैट्स उपलब्ध हैं?
    मरोल, जोगेश्वरी, गोरेगांव, कांदिवली, भांडुप, बायकुला, दहिसर और कांजुरमार्ग में।
    Q4. फ्लैट्स की कीमतें कितनी हैं?
    ₹55 लाख से ₹1.07 करोड़ के बीच, क्षेत्र और साइज के अनुसार।
    Q5. क्या BMC दरें घटा सकती है?
    हां, BMC ने संकेत दिए हैं कि अगर खरीदार नहीं मिलते हैं तो दरों में कमी पर विचार किया जाएगा।

  • रियल एस्टेट मे लोगों से 100 करोड़ की ठगी! इमारत प्लिंथ पर रुकी

    रियल एस्टेट मे लोगों से 100 करोड़ की ठगी! इमारत प्लिंथ पर रुकी

    मुंबई के वडाला इलाके में बड़ा रियल एस्टेट घोटाला सामने आया है। बीपी गंगार कंस्ट्रक्शन कंपनी पर 102 फ्लैट खरीदारों से ₹100 करोड़ की ठगी का आरोप लगा है। इमारत का काम सिर्फ नींव तक पहुंचा, बाकी निर्माण ठप पड़ा है।

    मुंबई: मुंबई पुलिस की आर्थिक गुन्हे शाखा (EOW) ने BP Gangar Constructions Pvt. Ltd. नामक डेवलपर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनी ने वडाला में बन रही “Skye 31” इमारत के 102 फ्लैट खरीदारों से लगभग ₹100 करोड़ की ठगी की।

    पुलिस के अनुसार, बिल्डर को दिसंबर 2024 तक खरीदारों को फ्लैट का कब्जा देना था, लेकिन आज तक इमारत की सिर्फ प्लिंथ लेवल तक की ही कंस्ट्रक्शन हुई है।

    🏗️ 2018 से ले रहा था बुकिंग, लेकिन निर्माण नहीं बढ़ा

    पुलिस जांच में सामने आया है कि BP Gangar Constructions ने 2018 से फ्लैट बुकिंग शुरू की, और कई लोगों से बड़ी रकम ली।
    शिकायतकर्ता अनिल ड्रोन (62), जो एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, ने 2022 में 2-BHK फ्लैट खरीदा था। उन्होंने शिकायत में बताया कि बिल्डर ने एक ही फ्लैट दो लोगों को बेच दिया, यानी एक ही यूनिट से दो बार पैसा वसूला गया।

    🧾 RERA नियमों का उल्लंघन, पैसा निजी उपयोग में लगाया

    EOW के अधिकारियों ने बताया कि डेवलपर ने अब तक 159 में से 102 फ्लैट बेच दिए, लेकिन उस रकम को प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय दूसरी कंपनियों या व्यक्तिगत कामों में उपयोग किया गया।
    यह रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट (RERA) का गंभीर उल्लंघन है।

    👮‍♂️ दो डायरेक्टरों पर FIR, IPC की कई धाराएं लागू

    पुलिस ने कंपनी के दो डायरेक्टरों — सुब्बारमन आनंद विलायनूर और उमा सुब्बारमन — और कुछ अन्य अज्ञात अधिकारियों पर IPC की धारा 406 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), और 34 (साझा इरादा) के तहत मामला दर्ज किया है।
    पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर ठगी की रकम करीब ₹100 करोड़ से अधिक हो सकती है।

    📉 खरीदारों में रोष, कहा, “हमारी जिंदगी की कमाई दांव पर”

    पीड़ित फ्लैट खरीदारों ने कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी इस प्रोजेक्ट में लगाई थी।
    “हम हर महीने EMI दे रहे हैं, लेकिन घर सिर्फ नक्शे में है। बिल्डर जवाब नहीं दे रहा,” — एक खरीदार ने बताया।
    अब खरीदारों की मांग है कि सरकार RERA के तहत तुरंत हस्तक्षेप करे और इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरी विश्वसनीय कंपनी को सौंपा जाए।


    FAQ सेक्शन

    Q1. यह मामला किस डेवलपर के खिलाफ दर्ज हुआ है?
    👉 BP Gangar Constructions Pvt. Ltd. के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।
    Q2. कितने खरीदार ठगी के शिकार हुए हैं?
    👉 कुल 102 फ्लैट खरीदारों ने शिकायत दर्ज कराई है।
    Q3. ठगी की कुल रकम कितनी है?
    👉 पुलिस के अनुसार, रकम लगभग ₹100 करोड़ से अधिक है।
    Q4. पुलिस ने किन धाराओं में केस दर्ज किया है?
    👉 IPC की धारा 406, 420 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
    Q5. क्या इमारत का निर्माण पूरा हुआ है?
    👉 नहीं, अब तक केवल प्लिंथ लेवल तक ही काम हुआ है।

  • दहिसर के नाले से मिली नवजात की पहचान, गरीबी में मजबूर माता-पिता ने छोड़ा

    दहिसर के नाले से मिली नवजात की पहचान, गरीबी में मजबूर माता-पिता ने छोड़ा

    मुंबई के दहिसर इलाके में नाले से मिली नवजात बच्ची के माता-पिता का पता पुलिस ने लगा लिया है। तीन बेटियों के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस दंपती ने मजबूरी में चौथी बेटी को छोड़ दिया था। पुलिस अब बच्चे की देखरेख को लेकर आगे की कार्रवाई कर रही है।

    मुंबई: दहिसर में कुछ दिन पहले नाले के पास एक नवजात बच्ची मिलने की घटना ने सभी को झकझोर दिया था। अब पुलिस ने उस मासूम के माता-पिता का पता लगा लिया है। जांच में सामने आया कि यह दंपती बेहद गरीब है और पहले से तीन बेटियां हैं। आर्थिक बोझ और सामाजिक दबाव के चलते उन्होंने चौथी बच्ची को नाले के पास छोड़ दिया।

    🩺 शताब्दी अस्पताल में सुरक्षित है बच्ची

    27 अक्टूबर को दहिसर पुलिस ने अशोकवन इलाके के नाले से इस नवजात को बचाया था। तुरंत शताब्दी अस्पताल, कांदिवली में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची अब पूरी तरह स्थिर है और जल्द डिस्चार्ज हो जाएगी।
    अस्पताल प्रशासन ने कहा — “हम पुलिस को बच्चे की स्थिति की जानकारी देंगे और उन्हें जिसे सौंपने का निर्देश मिलेगा, उसी को बच्ची दी जाएगी।”

    👮‍♀️ पुलिस ने माता-पिता को किया ट्रेस, अब तय होगी कानूनी दिशा

    दहिसर पुलिस ने इलाके के झुग्गी बस्तियों में खोजबीन के बाद बच्ची के माता-पिता को ढूंढ निकाला। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मां घरेलू कामगार है और पिता दिहाड़ी मजदूर। दोनों ने कबूल किया कि वे चौथे बच्चे की परवरिश का खर्च नहीं उठा सकते थे।
    अभी यह तय नहीं हुआ है कि पुलिस दोनों को गिरफ्तार करेगी या सिर्फ एक को। मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण पुलिस सावधानीपूर्वक कदम उठा रही है।

    🧒 बाल कल्याण समिति (CWC) तय करेगी बच्ची का भविष्य

    अभी यह चर्चा जारी है कि बच्ची को माता-पिता को लौटाया जाए या किसी चाइल्ड वेलफेयर होम को सौंपा जाए।
    बाल कल्याण समिति (CWC), अस्पताल और पुलिस मिलकर यह तय करेंगे कि बच्चे के हित में सबसे बेहतर निर्णय क्या होगा।

    💔 गरीबी और समाजिक दबाव की त्रासदी

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह दंपती पिछले कुछ महीनों से आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। पति की मजदूरी से घर चलाना मुश्किल था और तीन बेटियों के पालन-पोषण का खर्च पहले से भारी था। चौथी बेटी के जन्म के बाद उन्हें लगा कि अब उनका गुज़ारा नहीं होगा, इसलिए उन्होंने यह गलत कदम उठाया।
    यह मामला न सिर्फ कानूनी, बल्कि सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण से भी बेहद संवेदनशील बन गया है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. नवजात बच्ची को कहां से बरामद किया गया था?
    👉 बच्ची दहिसर (पश्चिम) के अशोकवन इलाके के एक नाले से बरामद की गई थी।
    Q2. बच्ची की हालत अभी कैसी है?
    👉 शताब्दी अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची अब स्थिर है और जल्द डिस्चार्ज होगी।
    Q3. क्या बच्ची को उसके माता-पिता को वापस सौंपा जाएगा?
    👉 इस पर फैसला बाल कल्याण समिति (CWC) और पुलिस मिलकर करेगी।
    Q4. क्या माता-पिता के खिलाफ केस दर्ज किया गया है?
    👉 फिलहाल पुलिस विचार कर रही है कि दोनों को गिरफ्तार किया जाए या नहीं, मामला बेहद संवेदनशील है।

  • Malad Redevelopment Scam: कांदिवली के बिल्डर से ₹18.09 करोड़ की ठगी, तीन डेवलपर्स पर EOW की जांच

    Malad Redevelopment Scam: कांदिवली के बिल्डर से ₹18.09 करोड़ की ठगी, तीन डेवलपर्स पर EOW की जांच

    मुंबई के मालाड इलाके में एक बड़े रीडेवलपमेंट फ्रॉड का खुलासा हुआ है। कांदिवली के बिल्डर से तीन डेवलपर्स ने झूठे दस्तावेज़ दिखाकर ₹18.09 करोड़ की ठगी की। अब मामला आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपा गया है।

    मुंबई: करोड़ों रुपये की ठगी के मामले मे मुंबई पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) ने मालाड वेस्ट में हुए एक बड़े रीडेवलपमेंट फ्रॉड केस की जांच अपने हाथ में ले ली है। आरोप है कि तीन डेवलपर्स — अपूर्व शाह, शीतल शाह और विशेश शाह — ने कांदिवली के बिल्डर राकेश वीरेंद्र सिंह (51) को झूठे मालिकाना दस्तावेज़ दिखाकर ₹18.09 करोड़ की ठगी की है।

    राकेश सिंह ने बताया कि ये आरोपी खुद को मालाड (वेस्ट) स्थित राम निवास और कमल कुंज नामक दो संपत्तियों के एकमात्र मालिक बताते थे, जबकि असल में ये प्रॉपर्टीज पहले से ही कानूनी विवादों में उलझी हुई थीं।

    🔹 झूठे दस्तावेज़ और फर्जी डेवलपमेंट एग्रीमेंट

    एफआईआर के मुताबिक, तीनों आरोपियों ने राकेश सिंह को लुभाकर Joint Development Agreement (JDA) किया और नकली दस्तावेज़ पेश कर खुद को वैध मालिक बताया। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट से भारी मुनाफा होगा।

    सिंह ने अनुमतियों, किरायेदारों के स्थानांतरण और निर्माण कार्यों के लिए ₹18.09 करोड़ का निवेश किया। मगर रकम मिलने के बाद न तो कोई काम शुरू हुआ, न पैसा वापस किया गया।

    🔹 पैसे गायब, प्रोजेक्ट ठप

    सिंह के मुताबिक, सभी दस्तावेज़ और वादे झूठे निकले। रकम को इधर-उधर कर दिया गया और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने जानबूझकर कानूनी विवाद छिपाकर निवेशक को भ्रमित किया और वित्तीय नुकसान पहुंचाया।

    🔹 EOW ने संभाली जांच

    मालाड पुलिस ने पहले भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा के तहत धोखाधड़ी और विश्वासघात के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। अब यह मामला आगे की गहराई से जांच के लिए EOW यूनिट-12 को सौंपा गया है।

    EOW अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया, और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका रही है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. यह ठगी किस इलाके में हुई?
    मालाड (वेस्ट), मुंबई में दो संपत्तियों — राम निवास और कमल कुंज — के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में यह धोखाधड़ी हुई।
    Q2. ठगी की कुल रकम कितनी है?
    कांदिवली के बिल्डर राकेश सिंह से ₹18.09 करोड़ की ठगी की गई है।
    Q3. अब इस केस की जांच कौन कर रहा है?
    मामले की जांच अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) यूनिट-12 कर रही है।
    Q4. आरोपियों के खिलाफ कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
    BNS की संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप दर्ज किए गए हैं।

  • मुंबई में बिज़नेसमैन से टैक्स कंसल्टेंट्स ने उड़ाए ₹31 लाख! GST भरने का वादा करके किया बड़ा घोटाला

    मुंबई में बिज़नेसमैन से टैक्स कंसल्टेंट्स ने उड़ाए ₹31 लाख! GST भरने का वादा करके किया बड़ा घोटाला

    गोरगांव के 56 वर्षीय बिज़नेसमैन को टैक्स कंसल्टेंट्स ने ₹31 लाख का चूना लगा दिया। GST और इनकम टैक्स भरने का वादा करके रकम गायब, अब नोटिस और पेनल्टी झेलनी पड़ी!

    मुंबई: गोरेगांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां गोरगांव के एक 56 वर्षीय फैब्रिकेशन बिज़नेसमैन को दो टैक्स कंसल्टेंट्स ने ₹31 लाख का चूना लगा दिया।
    पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि आरोपियों ने उनसे GST और इनकम टैक्स भरने के नाम पर ₹27.8 लाख लिए, लेकिन न तो टैक्स भरा गया और न ही पैसे लौटाए गए।

    नतीजा? बिज़नेसमैन को टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस, पेनल्टी और ब्याज तक देना पड़ा।

    💼 कैसे रचा गया ठगी का खेल

    दरअसल, शिकायतकर्ता एक छोटे स्तर पर फैब्रिकेशन बिज़नेस चलाते हैं। उनके एक दोस्त की फर्म ने पहले से ही आरोपी टैक्स कंसल्टेंट को हायर किया हुआ था।
    2018 में उन्होंने भी भरोसा करके उन्हीं को अपना टैक्स हैंडलर बना लिया।

    2019-2020 में जब कोविड लॉकडाउन आया, तो बिज़नेसमैन टैक्स भर नहीं पाए। तब कंसल्टेंट्स ने कहा,

    “आप हमें रकम दे दो, हम आपके लिए GST और इनकम टैक्स जमा कर देंगे।”

    उन्होंने भरोसा किया और ₹27.8 लाख उनके हाथ में थमा दिए। लेकिन हुआ उल्टा — न टैक्स जमा हुआ, न कोई अपडेट मिला।

    ⚠️ GST विभाग से आया झटका, फिर इनकम टैक्स का नोटिस!

    मई 2023 में बिज़नेसमैन को GST विभाग से नोटिस आया कि उनका टैक्स नहीं भरा गया है।
    फिर फरवरी 2024 में दूसरा नोटिस आया — 2020-21 के टैक्स का भी भुगतान नहीं हुआ!

    इसके बाद अगस्त 2023 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भी शो कॉज नोटिस भेज दिया कि बिज़नेस प्रॉफिट पर टैक्स क्यों नहीं दिया गया।

    📵 “बस ₹1 लाख दो, सब सेट कर दूंगा” — और फिर गायब!

    जब पीड़ित ने कंसल्टेंट से जवाब मांगा तो उसने कहा कि मामला सुलझ जाएगा, बस ₹1 लाख और दो।
    बिज़नेसमैन ने भरोसा कर फिर से पैसे दे दिए — लेकिन इसके बाद आरोपी ने फोन बंद कर दिया और गायब हो गया!

    उसका भाई बोला — “वो तो लापता है।”

    आख़िरकार बिज़नेसमैन ने गोरगांव पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। अब आरोपियों के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी (Cheating) का केस दर्ज किया गया है।

    🧩 पीड़ित पर पड़ा दोहरा असर: पैसे गए, ऊपर से पेनल्टी भी!

    ₹27.8 लाख देने के बाद भी टैक्स जमा न होने से बिज़नेसमैन को ₹3.29 लाख का पेनल्टी और ब्याज भरना पड़ा।
    यानि कुल नुकसान करीब ₹31 लाख का हुआ।
    पुलिस का कहना है कि मामला जांच में है और आरोपियों की तलाश जारी है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. मामला कहां का है?
    यह मामला मुंबई के गोरगांव इलाके का है।

    Q2. कितनी रकम की ठगी हुई?
    बिज़नेसमैन से कुल ₹31 लाख की ठगी की गई, जिसमें ₹27.8 लाख टैक्स भुगतान के नाम पर थे।

    Q3. आरोपियों ने कैसे झांसा दिया?
    उन्होंने कहा कि वे बिज़नेसमैन की ओर से GST और इनकम टैक्स भर देंगे, लेकिन रकम लेकर गायब हो गए।

    Q4. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
    गोरगांव पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है और आरोपियों की तलाश जारी है।

    Q5. पीड़ित को कितना नुकसान हुआ?
    ₹27.8 लाख की रकम तो गई ही, साथ में ₹3.29 लाख का पेनल्टी और ब्याज भी देना पड़ा

  • SRK की ऑनस्क्रीन हीरोइन, अब अरबपति की पत्नी! पति की नेटवर्थ अमिताभ-शाहरुख दोनों से ज़्यादा

    SRK की ऑनस्क्रीन हीरोइन, अब अरबपति की पत्नी! पति की नेटवर्थ अमिताभ-शाहरुख दोनों से ज़्यादा

    एक्ट्रेस Gayatri Joshi, जिसने शाहरुख खान संग ‘Swades’ में किया था डेब्यू, आज अरबों की मालकिन हैं। उनके पति Vikas Oberoi की नेटवर्थ है ₹42,960 करोड़ — जो SRK और अमिताभ दोनों से ज़्यादा है!

    डिजिटल डेस्क
    Bollywood: शाहरुख खान की फिल्म Swades (2004) से धमाकेदार डेब्यू करने वाली Gayatri Joshi को शायद ही कोई भूल पाया होगा। उनकी सादगी और स्क्रीन प्रेज़ेन्स ने दर्शकों को दीवाना बना दिया था। लेकिन यह जानकर सब हैरान रह गए कि इतनी शानदार शुरुआत के बाद उन्होंने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया।

    अब सालों बाद फिर से Gayatri Joshi चर्चा में हैं — इस बार अपनी फिल्मों की वजह से नहीं, बल्कि अपने अरबपति पति Vikas Oberoi की शानदार नेटवर्थ के कारण, जो ₹42,960 करोड़ है! जी हां, उनके पति की संपत्ति SRK और अमिताभ बच्चन दोनों की संयुक्त नेटवर्थ से भी ज़्यादा है।

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    💍 Swades गर्ल बनी अरबपति बिज़नेसमैन की पत्नी

    Gayatri Joshi, जिन्होंने Swades में ग्रामीण भारत की सरल लड़की का किरदार निभाया था, रियल लाइफ में भी हमेशा से ग्रेसफुल और डाउन-टू-अर्थ रही हैं।
    2005 में उन्होंने Oberoi Realty के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Vikas Oberoi से शादी की और एक्टिंग से दूरी बना ली।

    उनका विवाह 27 अगस्त 2005 को हुआ और उसी साल उन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया।

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    🏠 ₹400 करोड़ का स्काई-हाई मुंबई अपार्टमेंट

    Gayatri और Vikas Oberoi का घर किसी लक्ज़री ड्रीम से कम नहीं। उनका Worli में 45th फ़्लोर पर बना 16,000 sq.ft का पेंटहाउस सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।
    YouTuber Enes Yilmazer ने इस आलिशान घर का वीडियो टूर दिखाया था, जिसमें पाँच बेडरूम, सात बाथरूम और मुंबई स्काइलाइन का पैनोरमिक व्यू है।

    Gayatri ने उस वीडियो में कहा था —

    “We enjoy the work too much to even call it that.”

    उनका यह बयान दर्शाता है कि वे अपने परिवार और लग्ज़री लाइफ़ का हर पल एंजॉय करती हैं।

    💎 Vikas Oberoi — भारत के टॉप रियल एस्टेट टाइकून में शामिल

    Vikas Oberoi का नाम Hurun India Rich List 2025 में 58वें स्थान पर है, जिनकी नेटवर्थ ₹42,960 करोड़ बताई गई है।
    वे Oberoi Realty के ज़रिए मुंबई में कई हाई-एंड रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स चला रहे हैं।
    उनका नाम भारत के टॉप 5 रियल एस्टेट दिग्गजों में गिना जाता है।

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    👗 Miss India से लेकर Swades तक — Gayatri का सफर

    • 2000 में Femina Miss India International का खिताब जीता
    • Miss International 2000 में भारत का प्रतिनिधित्व किया
    • मॉडलिंग के दौरान काम किया Godrej, LG, Sunsilk, Philips, Bombay Dyeing जैसे ब्रांड्स के साथ
    • साथ ही Hyundai Ads में Shah Rukh Khan के साथ भी नजर आईं
    • बाद में Swades से फिल्मी डेब्यू किया, जो आज भी एक क्लासिक फिल्म मानी जाती है।
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    💃 बॉलीवुड से दूरी लेकिन ग्लैमर से नहीं

    Gayatri भले ही फिल्मों से दूर हैं, लेकिन उनकी लाइफ पूरी तरह फिल्मी लगती है।
    वो आज भी Sonali Bendre, Sussanne Khan जैसी दोस्तों के साथ पार्टियों और सोशल इवेंट्स में नज़र आती हैं।
    मीडिया से दूर रहते हुए भी वो एलीट सर्कल की फेवरेट हैं।


    FAQ Section

    Q1. Gayatri Joshi कौन हैं?
    Gayatri Joshi एक पूर्व मॉडल और एक्ट्रेस हैं जिन्होंने Swades (2004) में शाहरुख खान के साथ डेब्यू किया था।

    Q2. Gayatri Joshi के पति कौन हैं?
    उनके पति हैं Vikas Oberoi, जो Oberoi Realty के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।

    Q3. Vikas Oberoi की नेटवर्थ कितनी है?
    2025 के अनुसार उनकी नेटवर्थ ₹42,960 करोड़ है, जो शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन की संयुक्त संपत्ति से भी ज़्यादा है।

    Q4. Gayatri Joshi ने एक्टिंग क्यों छोड़ी?
    2005 में शादी के बाद उन्होंने एक्टिंग से दूरी बना ली और पारिवारिक जीवन पर ध्यान केंद्रित किया।

    Q5. क्या Gayatri Joshi अब भी मुंबई में रहती हैं?
    हाँ, वे मुंबई के Worli में अपने 45th फ़्लोर के आलिशान पेंटहाउस में रहती हैं।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को दिए गए ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी। कई लाभार्थियों ने आरोप लगाया था कि सरकार की योजना के तहत मिले वाहन “खराब” और “असुरक्षित” हैं।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के समाज कल्याण विभाग की एक योजना के तहत दिव्यांग लोगों को ई-रिक्शा (e-rickshaw) दिए गए थे ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
    लेकिन अब इन वाहनों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं।

    लगभग 115 दिव्यांग लाभार्थियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन्हें जो ई-रिक्शे मिले हैं, वो “खराब हालत में” हैं और चलाने के लायक नहीं हैं।
    इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा — और अब सरकार ने कहा है कि वह तकनीकी जांच कराएगी और रिपोर्ट पेश करेगी।

    ⚙️ योजना की शुरुआत और खर्च

    इस योजना की शुरुआत 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग (Social Justice Department) के एक सरकारी निर्णय (GR) से हुई थी।
    इस योजना के तहत लगभग 800 ई-रिक्शे दिव्यांग व्यक्तियों को 20 करोड़ रुपये की लागत से बांटे गए थे।
    योजना का नाम था —
    “Green Energy Powered Environment-Friendly Mobile Shop for Disabled Persons to Become Self-Reliant”

    लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई वाहन तकनीकी रूप से दोषपूर्ण हैं और इनमें सुरक्षा संबंधी खामियां हैं।

    🧑‍⚖️ कोर्ट में क्या हुआ?

    15 अक्टूबर को जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस संदीश डी. पाटिल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
    याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील असीम सरोदे और श्रिय आळवे ने कहा कि सरकार ने उन्हें “डिफेक्टिव” यानी खराब वाहन देकर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

    उन्होंने यह भी मांग की कि

    • एक स्वतंत्र जांच एजेंसी नियुक्त की जाए,
    • और सरकारी खरीद प्रक्रिया (procurement process) की जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि क्या ई-रिक्शा की खरीद में गड़बड़ी हुई थी।

    🏛️ सरकार और कंपनी का जवाब

    सरकार की ओर से एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर भूपेश सामंत ने कोर्ट को बताया कि
    Maharashtra State Handicapped Finance and Development Corporation (MSHFDC) हर जिले में एक तकनीकी अधिकारी नियुक्त करेगी जो इन ई-रिक्शों की जांच करेगा।

    वहीं, सप्लायर कंपनी Mac Auto India ने भी कहा कि वह सिर्फ इन 115 याचिकाकर्ताओं के नहीं, बल्कि सभी लाभार्थियों के वाहनों की मरम्मत या जांच करेगी।

    कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह तकनीकी रिपोर्ट नवंबर 19, 2025 तक पेश करे और इस पूरी जांच में सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट पूरा सहयोग करे।

    🔍 आरोप क्या हैं?

    • याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ई-रिक्शे कमज़ोर बॉडी और घटिया पार्ट्स से बने हैं।
    • कई वाहनों की बैटरी और मोटर कुछ ही महीनों में फेल हो गई।
    • सरकार ने बाजार मूल्य से अधिक दरों पर खरीदारी की है।
    • कोई बाद की सर्विस या मेंटेनेंस सपोर्ट नहीं दिया गया।

    📉 अदालत की टिप्पणी

    कोर्ट ने पहले ही 3 अक्टूबर को कहा था कि याचिकाकर्ताओं की शिकायतें गंभीर और सटीक लगती हैं।
    अब अदालत इस बात पर नज़र रखेगी कि सरकार और कंपनी जांच में पारदर्शिता बरतती है या नहीं।

    🪫 दिव्यांगों की पीड़ा

    दिव्यांग लोगों का कहना है कि ये ई-रिक्शे आजीविका का एकमात्र साधन हैं।
    “खराब वाहन” मिलने की वजह से उनकी रोज़मर्रा की कमाई ठप पड़ गई है।
    कई लोगों को कर्ज चुकाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि उन्होंने वाहन पर लोन लिया था।


    🧾 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. मामला किस बारे में है?
    ➡️ दिव्यांग लाभार्थियों को सरकार की योजना के तहत दिए गए ई-रिक्शे खराब निकले, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।

    Q2. कितने लोगों ने याचिका दायर की है?
    ➡️ लगभग 115 दिव्यांग व्यक्तियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

    Q3. योजना कब शुरू हुई थी?
    ➡️ यह योजना 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग के आदेश से शुरू की गई थी।

    Q4. क्या सरकार ने जांच के लिए हामी भरी है?
    ➡️ हां, महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह सभी ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी।

    Q5. अगली सुनवाई कब होगी?
    ➡️ अगली सुनवाई 19 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।