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  • बिहार में वोटर लिस्ट के सत्यापन का खेल। वोट मत दें जनता लेकिन जीतेगी तो BJP ही..

    बिहार में वोटर लिस्ट के सत्यापन का खेल। वोट मत दें जनता लेकिन जीतेगी तो BJP ही..

    बिना किसी आई डी और बिना किसी मतदाता से मिले ही blo द्वारा कार्यालय में बैठकर खुद ही वोटर फॉर्म भरने का कार्य कराया जाना कत्तई उचित नहीं। वेरिफिकेशन के लिए blo को हर घर जाकर वोटरों से मिलने और उनसे भारत में रहने, उनके पिता की जन्मतिथि मांगने की बात चुनाव आयोग ने की थी। जब blo किसी मतदाता से मिलेगा ही नहीं तो सत्यापन किस बात का करेगा? बहुत ही सीनियर पत्रकार अजीत अंजुम को पता था, कि किसी भी कार्यालय में बिना अनुमति लिए कैमरामैन और माइक लेकर जाने पर उन पर सरकारी कार्यवाही में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया जा सकता है। इसीलिए वे बिना कैमरामैन और बिना माइक लिए उस कमरे में गए, जहां तमाम blo बैठे हुए मतदाताओं के सिंगल फॉर्म भर रहे थे।
    मजेदार बात यह हुई, कि blo फॉर्म पर सिर्फ नाम लिख रहे थे। मतदाता के पिता या पति का नाम नहीं लिख रहे थे। फिर कैसे पहचान होगी कि वोट देने वाला सही है या नही? इससे भी बड़ी मजेदार बात यह, कि जेडीएस के बड़े नेता और नीतीश कुमार सरकार में उपमुख्यमंत्री रह चुके लालू यादव के बेटे की पत्नी का नाम काट दिया गया है। एक महिला के नाम पर बने वोटर आईडी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की फोटो लगा दी है। पत्नी शादी होने के बाद जब ससुराल आती है तो ससुराल की सदस्य बन जाती है। नाम इसलिए काटा गया कि उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। दिल्ली भारत की राजधानी और लालू यादव का पूरा परिवार बिहार के पटना में रहता है।
    बात वोटर लिस्ट बनाने की तो blo बिना किसी आई डी के सिंगल फॉर्म भरे और उसमें केवल मतदाता का नाम हो पिता या पति का नाम नहीं हो तो वह व्यक्ति वोट कैसे देगा? अब यही सच पुराने ख्यात पत्रकार अजीत अंजुम ने अपनी मोबाइल में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाल दी। जिस पर देश भर से प्रतिक्रिया आनी स्वाभाविक है। चुनाव आयोग की तरह बिहार पुलिस भी सरकारी दबाव में है जिसने बेवजह पत्रकार अजीत अंजुम द्वारा मतदाता सूची को ऑफिस में भरे जाने का सच दिखाने के लिए एफआईआर दर्ज कर दी। यानी सरकार कुछ भी कराए उसे अधिकार है। लेकिन अगर पत्रकार गलतियों को देश की जनता के सामने लाए तो गुनहगार हो गया।
    चुनाव आयुक्त बदल देने से कुछ नहीं होगा। क्योंकि सरकार यदि जिसे आयुक्त बनाएगी तो इसी शर्त के साथ कि वह सरकार के कहे अनुसार कार्य करे। पिछले दस साल से चुनाव आयोग के द्वारा पक्षपाती रवैया अपनाए जाने का विरोध देश भर में हो रहा है। क्योंकि चुनाव खत्म होने के बाद प्रसाइडिंग ऑफिसर फॉर्म 17 भरता है जिसमें कुल मतदाता स्त्री पुरुष और कुल पड़े हुए मत की गिनती स्त्री पुरुष अलग अलग बताना पड़ता है।
    बैलेट बॉक्स था या अब ई वी एम दोनों में यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। उसी शाम या रात जिला मुख्यालय पर बॉक्स और फॉर्म के साथ तीनों वोटर लिस्ट लिफाफे में भरकर जमा करना होता है। दूसरे दिन ही केंद्रीय चुनाव आयोग पड़े हुए मतों का प्रतिशत बता सकता है। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में प्रथम चरण के मतदान प्रतिशत तीन अन्य चरण के मतदान होने के बाद बताने में तेरह दिन लगाए। फिर दस दिनों में क्या क्या करता रहा चुनाव आयोग? आयोग की गड़बड़ी छुपाने के लिए जल्द ही सारे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज डिलीट करने का नियम मनमाने ढंग से बना दिया गया ताकि कोर्ट में सबूत पेश करना नहीं पड़े ।
    बीजेपी को चुनाव जीताने के लिए चुनाव आयोग बेशक बेइमानी करता है। एक ही वोटर आईडी का यूनिक नंबर कई कई राज्यों में वोटर कैसे बनाया जाता है यह तो चुनाव आयोग ही बता सकता है। चुनाव के दिन शाम पांच बजे मेन गेट बंद कर पीछे से शुरू करके कूपन नंबर एक से दिए जाने का नियम है मगर महाराष्ट्र चुनावों में इस नियम का पालन नहीं किया गया और ‘अंतिम घंटे में बीस प्रतिशत वोट पड़े’ ऐसा बता दिया गया।
    लाखों वोट अंतिम घंटे में पढ़ने के टोकन नंबर ही सुरक्षित नहीं किए गए। जहां तक ई वी एम हैक होने की बात है वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के सीएम थे बार बार हैकिंग और बेइमानी की बातें कहते थे। यह भी कहा कि विदेशों में जहां पढ़े लिखे लोग होते है बैलेट पेपर पर नाम पढ़कर वोट देते हैं। ईवीएम हैक करने का सच चिप बनाने वाला जापान और ईवीएम बनाने वाला अमेरिका ई वीं एम से चुनाव नहीं करता। सुप्रसिद्ध अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने भी कहा है ईवीएम सरलता से हैक किया जा सकता है। चिप लगे होने से मोबाइल फीचर्स खत्म होते ही नेट प्रोवाइडर कंपनिया ऑफिस में बैठे बैठे सिम बैन कर देते हैं जिससे नेट तो क्या आउट गोइंग और इन कमिंग कॉल बंद कर दी जाती है। चिप लगे होने से ही इसरो अपने चंद्रयान को धरती पर बैठे कंट्रोल करता है। चिप के कारण हीं अभी हाल में अंतरिक्ष में यान भेजा और सकुशल धरती पर उतारा गया।
    अहम प्रश्न है कि विपक्षी सवाल चुनाव आयोग से पूछते हैं तो जवाब केंद्र सरकार क्यों देने लगती है जैसे चैनल पर ज्यों हि विपक्षी नेता किसी विषय पर सरकार को कटघरे में खड़ा करता है तो एंकर तमतमा जाते हैं और सरकार की तरफ से वकालत करने लगते हैं। अरे भाई लोकतंत्र में हर किसी सरकारी विभाग की जवाबदेही होती है तो दूसरा विभाग उत्तर कैसे दे सकता है।
    बिहार की जनता भले नीतीश कुमार और बीजेपी को वोट नहीं दे लेकिन इतनी गारंटी ली ही जा सकती है जब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सरकार करती रहेगी चुनाव में पक्षपात कर आयोग सत्ता के पक्ष में करता रहेगा।गुलामी बजाता रहेगा। ऐसे में सरकार द्वारा चुने गए चुनाव आयुक्तों और ईवीएम के रहते बीजेपी को हरा पाना जनता के लिए असंभव है। वोट मत दे जनता भले ही जीतेगी तो बीजेपी ही।

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  • हर साख पे उल्लू बैठे जब…

    हर साख पे उल्लू बैठे जब…

    आगरा में एक प्राइवेट अस्पताल ही नहीं समूचे देश में आग लगने की साजिश बेनकाब हो गई। मामला आगरा के एक प्राइवेट अस्पताल का है। जहां एक दलित अपने रोगी का इलाज कराने आता है। जैसे ही गेट के भीतर पहुंचता है, उस व्यक्ति ने राष्ट्र के दो महान पुरुषों की फोटो फर्श पर चिपकी देखी। एक फोटो गौतम बुद्ध की तो दूसरी बाबा साहेब आंबेडकर की थी।
    दलित जब इन तस्वीरों को फर्श पर चिपकी देखता है तो उसके मन में ख्याल आता है कि अस्पताल में आने वाले लोगों के पैरों तले इन महापुरुषों की तस्वीर कुचले जाएंगे। इससे उनका अपमान होगा उक्त संबंध में वह व्यक्ति जब गार्ड से कहता है तो गार्ड अत्यंत बेरुखी से जवाब देता है, तुम जिस काम से आए हो, अपना काम करो, फालतू चक्कर में मत पड़ो। लेकिन व्यक्ति रुक जाता है और वह अपने नेता रावण उर्फ चंद्रशेखर को इसकी सूचना देता है। फिर क्या था?
    चंद्रशेखर सदल बल आ धमकते हैं। अपने अनुयायियों को बाहर रोककर वे अंदर जाते और वास्तविकता देखकर मैनेजर को बुलवाते हैं। मैनेजर इस घटना की जानकारी नहीं होने की बात कहता है तब अस्पताल मालिक को बुलाया जाता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल मालिक चंद्रशेखर के साथ cctv देखने लगते हैं। सुबह के फुटेज में कुछ नहीं मिलता तो गत रात का वीडियो देखने लगते हैं जिसमें काला कपड़ा पहने और मुंह ढके दो लोग दिखते हैं। फोटो फर्श पर चिपकाकर जब लौटकर गेट पर पहुंचते हैं तो एक अपना चेहरा खोल देता है।
    यह वॉचमैन का चेहरा है। पुलिस आ जाती है वॉचमैन से कड़ी पूछ ताछ करने पर दूसरा व्यक्ति आजाद की पार्टी का पदाधिकारी निकलता है। रावण उसे पार्टी से निकलकर पुलिस को सौप देते हैं।
    बता दे कि दलित आंबेडकर और महात्मा बुद्ध को भगवान मानते हैं। शुक्र है कि सीसीटीवी में खुलासा हो गया। अगर सीसीटीवी बंद रहता तो निश्चित ही अस्पताल में तोड़ फोड़ के साथ एक बार फिर आगरा में अराजकता का नग्न तांडव शुरू हो जाता। तोड़ फोड़ आगजनी और शक्ति प्रदर्शन का दौर शुरू हो जाता।

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  • क्या दुनिया में भारत का डंका बजा या स्वयं अकेला पड़ गया?

    क्या दुनिया में भारत का डंका बजा या स्वयं अकेला पड़ गया?

    डिजिटल डेस्क
    बीजेपी सरकार
    ढोल बजाकर खुशी का इजहार करने और गर्व में भरती जा रही। कहा जा रहा की जापान को छोड़कर भारत को विश्वगुरू ने विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बनाते हुए जापान को पीछे छोड़ दिया है। यह दावा सरासर गलत और भ्रामक है। भारत अभी चौथी अर्थव्यवस्था बना नहीं हैं बनने की ओर अग्रसर है। दरअसल एमएफए की तरफ से भारत और जापानी अर्थ व्यवस्था पर अंदाजा लगाया था, कि भारत जापान को 0.01 अंक आगे बढ़कर विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
    इसी बात को नीति आयोग के अधिकारी के सीईओ ले उड़े और भारत द्वारा जापानी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है। अब नीति आयोग जब कह रहा हो तो बीजेपी और मोदी सरकार ने भी लपक लिया और घोषणा कर डाली लेकिन नीति आयोग के ही बड़े अर्थशास्त्री ने खुलासा करते हुए कहा है, कि “भारत अभी विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था नहीं बना है। हां बनने की राह पर अग्रसर जरूर है।” उन्होंने कहा, “चौथी अर्थव्यवस्था बनने के लिए चौथी तिमाही तक भारत को अपनी जीडीपी मेंटेन रखनी होगी। चौथी तिमाही का परिणाम निश्चित करेगा कि भारत विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है या नहीं? चौथी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है न कि बन गया है।”
    नीति आयोग के सदस्य अर्थशास्त्री का कथन बीजेपी सरकार को झकझोर कर रख दिया होगा। नीति आयोग का सीईओ चौथी अर्थब्यव्यवस्था बन चुका है भारत का सच नीति आयोग के ही सदस्य ने खोलकर बता दिया है। जिससे साफ है कि चौथी अर्थव्यवस्था बना नहीं है। हां चौथी तिमाही के अंत में भी हमें अपनी जीडीपी उसी स्तर या उससे ऊंचे स्तर पर बनाए रखना होगा। उन्होंने निष्कर्ष में कहा बने नहीं हैं बनने की राह पर अग्रसर हैं। अगर चौथी तिमाही के अंत तक हम जीडीपी बढ़ाए रख सके तो दिसंबर 2025 तक बन सकते हैं।
    अर्थव्यवस्था तब बढ़ती है जब वैज्ञानिक टेक्नोलॉजी बढ़ती जाए। विदेशी निवेश अधिक बढ़ाना पड़ेगा। एप्पल मोबाइल भले ही चीन से भारत में बनने लगे, लेकिन हमें यह नहीं भूलना होगा कि एप्पल मोबाइल मेड इन इंडिया के नाम पर केवल असेंबलिंग की जाती है। उसके पार्ट्स चिप आदि चीन से ही आते हैं। चीन हार्डवेयर में अमेरिका से कम नहीं है। अमेरिकी उद्योगों के लिए चीन में बनी चिप्स जैसे पार्ट्स चीन से ही आते हैं।
    भले बीजेपी लग रही हो कि दुनिया में भारत का डंका बज रहा जबकि सच तो यह है कि भारत का दुनिया में डंका नहीं घंटा बज रहा है। भारत जब पाकिस्तान पर बढ़त हासिल किए हुए था तब एकाएक क्या हुआ कि भारत को सीजफायर का ऐलान करना पड़ गया। भारत को जीती हुई बाज़ी हारने को मजबूर क्यों होना पड़ा। भले आर्मी के जनरल कहा कि कितने विमान गिरे यह महत्वपूर्ण नहीं है। क्यों गिरे यह मुद्दा है और इससे हमने क्या सीखा? तीन बाते ऐसी हुई हैं जिससे भारत के डंका बजने की बात बेनकाब हो जाती है।
    अमेरिकी वाणिज्य मंत्री का कहना है कि भारत ने हमारे साथ गलत किया, उसे भुगतना होगा। दूसरा है जिस पाकिस्तान को आतंकवादियों का संरक्षक बताने के लिए दुनिया भर से गुहार लगाने के लिए सांसदों की टीमें भेजी गई ताकि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कराया जा सके। वह तो हुआ ही नहीं क्योंकि हमारे डेलिगेशनो का दुनिया पर कोई भी असर नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र संघ के दो मंचों का पाकिस्तान को एक में अध्यक्ष और दूसरे में उपाध्यक्ष बना दिया गया। आप पाकिस्तान उन मंचों से बताएगा कि कौन आतंकवादी देश है। कौन आतंकवादी गीत है जिसे कौन सा देश समर्थन कर रहा है। दो अत्यंत महत्वपूर्ण पद पाकर अब पाकिस्तान के लिए भारत के खिलाफ यह कहने का अधिकार मिल गया है कि उसके देश में बलूच आतंकी गुट है जिसे भारत का समर्थन हासिल है। भारत ही बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने के लिए हथियार और पैसा दे रहा है। दूसरी बात पाकिस्तान को अफगानिस्तानी फूटी आंखों नहीं सुहाते, जिसने पाकिस्तान के भारत युद्ध के समय भारत का समर्थन किया था।
    जिन तालिबानी लड़ाकों के कारण अमेरिका जैसा शक्तिशाली राष्ट्र अपने युद्धक विमान टैक्स जैसे सारे विपाश छोड़कर भागना पड़ा है, उन तालिबानियों को पाकिस्तान के लिए खतरा बताकर उन्हें आतंकवादी घोषित कर सकेगा। यही नहीं अब पाकिस्तान भारत को ही आतंकवाद फैलाने का आरोपी बताने की हैसियत में आ चुका है। ट्रंप का यह पसितारा उसके माय बेस्ट फ्रेंड मोदी और आई मिस यू मोदी के खिलाफ गुस्से का इजहार कर भारत को निचा दिखाने वाला कदम है। कल को पाकिस्तान खाड़ी देशों को भी विश्वास दिला सकता है, कि भारत में रहने वाले मुसलमानों को भारत हिंदुत्व वाली सरकार प्रताड़ित कर रही है। मस्जिदों मुसलमानों की बस्तियों पर बुलडोजर चलाकर अन्याय किया जा रहा है। इन बातों पर छपी खबरें प्रमाण बन जाएंगी और इस्लामिक राष्ट्र भारत के खिलाफ जिहाद के तौर पर खड़े हो सकते हैं।
    अमेरिका ने पहले ही एक अरब डॉलर का कर्ज पाकिस्तान को दिलाया था, जिससे पाकिस्तान अमेरिका और अब एशियाई बैंक से भी पाकिस्तान को कर्ज दिलवा चुका है। जिससे पाकिस्तान हथियार खरीदकर भारत के साथ युद्ध कर सके। भारत अब दुनिया में अकेला पड़ गया है। चीन तो भारत के विरोध में है ही। रूस जो भारत का सदाबहार मित्र रहा है वह भी पाकिस्तान स्थित अपने साझेदार पाकिस्तान के साथ बंद स्टील फैक्ट्री फिर से चालू कर पाकिस्तानी आय में वृद्धि करने में लगा हुआ है। भारत सरकार ने भारतीय वायु सेना को स्वदेशी जहाज देने का वादा किया था, जिसे समय से पूरा किया ही नहीं जा रहा। अमेरिका भारत को ब्लैकमेल लगातार करने और भारत की बेइज्जती करने में लगा है।
    यह वही ट्रंप है जिसके लिए वैश्विक कानून तोड़कर पीएम मोदी ने अब की बार ट्रंप सरकार का नारा लगाया था। दोबारा चुनाव में ट्रंप हार गए तो जब मोदी अमेरिकी यात्रा पर जाने वाले थे तब ट्रंप ने कहा था मेरा बेस्ट फ्रेंड मोदी मुझसे मिलने आ रहा है। लेकिन मोदी अमेरिका जाने के बाद राष्ट्रपति वाईडन से तो भेंट किया लेकिन ट्रंप से मिलने की फॉर्मेलिटी भी नहीं दिखाई। जिसे ट्रंप ने अपना अपमान समझा जो सही भी है। एक कहे मेरा बेस्ट फ्रेंड मुझसे मिलने आ रहा है दूसरा अनदेखा कर दे। औपचारिकता भी नहीं निभाए तो फ्रेंड कैसा? इसीलिए जब राष्ट्रपति पद की शपथ लेनी थी तब ट्रंप ने मोदी को बुलाया तक नहीं और जब पीएम गए उससे मिले तब ट्रंप ने कहा था आई मिस यू फ्रेंड। ये चार शब्द बड़े अर्थपूर्ण थे। व्यंग्य और दुखी हो कर कहा था ट्रंप ने। इशारा था लेकिन तब तक बहुत अधिक दरार पड़ चुकी थी। जिस कारण ट्रंप भारत को बेइज्जत करने का एक भी मौका छोड़ नहीं रहा। शायद जब तक मोदी और ट्रंप जीवित रहेंगे ट्रंप अपमान नहीं भूलेगा और गिन गिन कर बदला लेता रहेगा। पाकिस्तान को भारत पर तरजीह देकर ट्रंप ने भारत को अकेला कर दिया है।

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  • Mumbai: BMC की नोटिस जारी होने के बाद पानी टैंकरों का अनिश्चितकालीन हड़ताल

    Mumbai: BMC की नोटिस जारी होने के बाद पानी टैंकरों का अनिश्चितकालीन हड़ताल

    Mumbai water supply tankers strike
    पानी सप्लाई टैंकर की फाइल तस्वीर

    बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने निजी कुओं के मालिकों को नोटिस जारी किया है। जिसके बाद गुरुवार को Mumbai Water Tanker Association ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है। (Mumbai Water tankers on indefinite strike after BMC issues notice)

    मुंबई- बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने शहर के निजी कुआ मालिकों को पानी सप्लाई से जुड़ी कुछ नियमों और शर्तों से संबंधित नोटिस जारी किया है। इसको लेकर मुंबई जल टैंकर संघ (MWTA) ने गुरुवार को शहर में पानी की आपूर्ति अनिश्चित काल के लिए रोक दी है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। (Mumbai Water tankers on indefinite strike after BMC issues notice)

    यह कदम टैंकरों को पानी की आपूर्ति करने वाले निजी कुओं के मालिकों को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) द्वारा जारी नोटिस के विरोध में उठाया गया। (Mumbai Water tankers on indefinite strike after BMC issues notice)

    टैंकर संघ ने क्या कहा?

    Mumbai Water Tanker Association के प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने बताया कि संघ के पास करीब 1,800 पंजीकृत टैंकर हैं, जिनकी क्षमता 500 से 20,000 लीटर की है। ये सभी टैंकर शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 350 एमएलडी पानी की आपूर्ति करते हैं, जिसमें दक्षिण मुंबई के ऊंचाई वाले इलाके भी शामिल हैं। (Mumbai Water tankers on indefinite strike after BMC issues notice)

    उन्होंने कहा कि सभी ने ‘अनिश्चितकालीन छुट्टी’ ले लिया है। साथ ही अपने कारोबार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। (Mumbai Water tankers on indefinite strike after BMC issues notice)

    नोटिस में क्या कहा?

    शर्मा ने बताया कि बीएमसी अधिकारियों ने 200 वर्ग मीटर भूमि, कुएं के पट्टे या स्वामित्व का प्रमाण, डिजिटल जल प्रवाह मीटर की स्थापना, बीआईएस मानक का पालन, दैनिक जलग्रहण का सटीक माप और कुछ अन्य चीजों को अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (Central Ground Water Authority) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी लेना अनिवार्य कर दिया है। (Mumbai Water tankers on indefinite strike after BMC issues notice)

    उन्होंने कहा, ‘मुंबई जैसे शहर में इन सभी नियमों को लागू करना मुश्किल है। जब तक सरकार इन शर्तों में कुछ ढील नहीं देती, टैंकर सेवाएं फिर से शुरू नहीं होंगी।’ (Mumbai Water tankers on indefinite strike after BMC issues notice)

    टैंकर कारोबार हुआ बंद

    उन्होंने कहा कि एमडब्ल्यूटीए ने अपने मुद्दों के संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय और अन्य प्राधिकारियों को पत्र लिखा है। उन्होंने दावा किया कि मुंबई उपनगरीय जिला संरक्षक मंत्री आशीष शेलार ने भी जल शक्ति बोर्ड को निजी कुओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के बारे में एक पत्र लिखा था, लेकिन उनके मालिकों को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) से लगातार नोटिस मिल रहे हैं। (Mumbai Water tankers on indefinite strike after BMC issues notice)