BMC की लापरवाही के कारण मानखुर्द के चीताकैंप इलाके में नाले से निकाला गया गीला कचरा हफ्तों से सड़क किनारे पड़ा है। बारिश के कारण बदबू, मच्छर और बीमारी का खतरा बढ़ गया है, जबकि बीएमसी की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
मुंबई: मानखुर्द स्थित चीताकैंप इलाके में सड़क किनारे पड़े गीले कचरे के ढेर ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) द्वारा नाले की सफाई के दौरान निकाला गया कचरा तीन हफ्ते से ज्यादा समय बीतने के बावजूद नहीं हटाया गया, जिससे बदबू, मच्छरों और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बीएमसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नाले की सफाई हुई, लेकिन कचरा वहीं पड़ा
बीएमसी ने मानखुर्द के चीताकैंप इलाके में 28 जून से 2 जुलाई के बीच नाले की सफाई करवाई थी। इस दौरान पुल के नीचे और आसपास से बड़ी मात्रा में गाद और कचरा निकाला गया।
हालांकि, सफाई के बाद यह कचरा नाले के किनारे ही छोड़ दिया गया। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को भरोसा दिलाया था कि एक हफ्ते के भीतर कचरा हटा दिया जाएगा, लेकिन तीन हफ्ते बीतने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
बारिश ने बढ़ाई परेशानी, बदबू से सांस लेना मुश्किल
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल की बारिश के चलते पानी कचरे में घुस गया है, जिससे इलाके में तेज गंध फैल गई है।
एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
“यहां से गुजरते वक्त सांस रोकनी पड़ती है। बदबू इतनी तेज है कि बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी हो रही है।”
मच्छरों और बीमारियों का बढ़ता खतरा
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता आसिफ सैयद, जो एनवायरनमेंट लाइफ फाउंडेशन के धर्मेश बारई के साथ सफाई अभियानों से जुड़े हैं, ने कहा,
“यह कचरे का ढेर मच्छरों और बीमारियों की फैक्ट्री बन चुका है। हम लगातार बीएमसी से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। आखिर लोग ऐसे हालात में कैसे रहें?”
कचरा बढ़ता ही जा रहा है
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों से नाले की सफाई के दौरान निकाला गया कचरा उसी जगह पर बार-बार डाला जा रहा है, जिससे कचरे का ढेर और बड़ा होता जा रहा है।
जब पिछले हफ्ते तेज बारिश हुई, तो पुल के नीचे जमा कचरा बहने लगा। लोगों को डर है कि अगर बारिश इसी तरह जारी रही, तो यह गंदगी सीधे समुद्र में जाकर प्रदूषण फैलाएगी।
जिम्मेदारी से बचते विभाग, आरोपों की राजनीति
धर्मेश बारई का आरोप है कि जब उन्होंने बीएमसी से कचरा हटाने की मांग की, तो अलग-अलग विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे।
उन्होंने कहा,
“कोई भी विभाग यह मानने को तैयार नहीं कि कचरा हटाना उसकी जिम्मेदारी है। बस फाइलें इधर-उधर घूम रही हैं।”
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BMC का पक्ष: नोटिस जारी, जल्द सफाई का दावा
बीएमसी के कनिष्ठ अभियंता योगेश मोगल ने बताया कि संबंधित ठेकेदार को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है।
उनके अनुसार,
- कुछ कचरा नाले से नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों द्वारा फेंका गया है
- नाले से निकली गाद को शहर के बाहर डंप करना पड़ता है
- मंगलवार तक गाद हटाई जाएगी, और बाकी ठोस कचरा अगले दो दिनों में साफ किया जाएगा
उन्होंने बारिश को भी देरी की एक बड़ी वजह बताया।
अपर आयुक्त ने लिया संज्ञान
स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स के प्रभारी अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने कहा,
“आमतौर पर एक महीने तक कचरा पड़े रहने की शिकायत नहीं आती। मैं खुद मामले की जांच करूंगा और लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1: चीताह कैंप में कचरा कब से पड़ा है?
👉 करीब तीन हफ्तों से ज्यादा समय से।
Q2: कचरा कहां से आया है?
👉 नाले की सफाई के दौरान निकाला गया कचरा और कुछ स्थानीय कचरा।
Q3: लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी किस बात से है?
👉 बदबू, मच्छर और बीमारी के खतरे से।
Q4: बीएमसी ने क्या आश्वासन दिया है?
👉 गाद मंगलवार तक और बाकी कचरा अगले दो दिनों में हटाने का दावा।
Q5: क्या ठेकेदार पर कार्रवाई होगी?
👉 बीएमसी के अनुसार, लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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