चिकित्सा अधिकारियों संग बैठक की तस्वीर
नितिन तोरस्कर
मुंबई– राज्य के मंत्रालय में बुधवार 16 सप्टेंबर 2020 की सुबह उप मुख्यमंत्री अजित पवार के कार्यालय में आदिवासियों के चिकित्सा अधिकारियों संग बैठक का आयोजन किया गया था! इस बैठक की खास वजह आदिवासी जनजाति के लिए उनके हर गांव तक राज्य शासन की ओर से स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाले चिकित्सकों के मुद्दों पर था!
राज्य के दूरस्थ आदिवासी जनजातीय जिलों में ‘नवसंजीवनी ’योजना के तहत गर्भवती माताओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और शून्य से छह वर्ष की आयु तक बच्चों के गावों तक जाकर मनोरोग चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाले चिकित्सा अधिकारियों के मुद्दों के संबंध में उप मुख्यमंत्री अजित पवार की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में एक बैठक आयोजित की गई।
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इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे, आदिवासी विकास मंत्री के.सी. पाडवी, आदिवासी विकास विभाग के प्रधान सचिव अनूप कुमार, स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त रामास्वामी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे!
आप को जानकारी देते हुए बता दें कि राज्य के 16 आदिवासी जिलों के आदिवासी इलाकों में ‘नवसंजीवनी’ योजना के तहत, मनोरोग चिकित्सा अधिकारी फील्ड में जाकर सेवा प्रदान कर रहे हैं, साथ ही आश्रम स्कूल में निरीक्षण कार्य भी कर रहे हैं! इस कार्य में मनोरोग चिकित्सा अधिकारी दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में लगभग छह से दस गाँवों की सेवा प्रदान कर रहे हैं!
इस दौरे में, बाहर के मरीज़ परिक्षण, गर्भवती माताओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और कुपोषित बच्चों का परीक्षण कर रोगियों का इलाज करते हैं! इसके साथ ही, उन भागों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों के सफल कार्यान्वयन के लिए मदद कर रहे हैं! इन चिकित्सकों के लिए दुविधा है कि मनोरोग चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी का पद अनुबंध (कान्ट्रेक्ट) के आधार पर है, इसलिए इन्हें कोई अन्य लाभ नहीं मिलता!
आप को और अधिक जानकारी देते हुए बता दें कि वर्तमान स्थिति में, डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी स्वास्थ्य सेवा में बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं! मनोरोग चिकित्सा अधिकारी भी दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए तत्पर रहते हैं!
इसलिए, राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने उनके मेहनताने को 24,000 रुपये से बढ़ाकर 40,000 रुपये करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है! इस निर्णय से राज्य के दूरस्थ, संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के लिए काम करने वाले मनोरोग चिकित्सा अधिकारियों को लाभ होने वाला है!
सरकार राज्य में स्वास्थ्य विभाग को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है, लेकिन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने यह भी सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए कि मरीजों की सेवा में कोई लापरवाही नही होनी चाहिए!
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