Tag: Shiv Sena BMC

  • BMC चुनाव 2025: टिकट बंटवारे में परिवारवाद हावी, पुराने कार्यकर्ता फिर पीछे

    BMC चुनाव 2025: टिकट बंटवारे में परिवारवाद हावी, पुराने कार्यकर्ता फिर पीछे

    BMC चुनाव 2025-26 के नामांकन में बीजेपी, शिवसेना, कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी में परिवारवाद हावी नजर आ रहा है। नेताओं के बेटे-बेटी, पत्नी और रिश्तेदारों को टिकट, पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2025-26 के लिए नामांकन की आखाे-सीमा खत्म होने से ठीक पहले राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों की सूचियां जारी करना शुरू कर दिया है। लेकिन इस बार टिकट वितरण में एक बार फिर परिवारवाद छाया हुआ है। बीजेपी, शिवसेना (UBT), कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी ने सांसदों, विधायकों और पूर्व नगरसेवकों के बेटे-बेटी, पत्नी, भाई-बहन और रिश्तेदारों को मैदान में उतार दिया है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।

    नामांकन में ‘परिवार पहले’ की राजनीति

    बीएमसी के 227 वार्डों के लिए जैसे-जैसे नाम सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि इस चुनाव में भी राजनीतिक विरासत को प्राथमिकता दी गई है।
    कई ऐसे नेता हैं जिन्होंने सालों तक पार्टी के लिए काम किया, लेकिन टिकट ऐन मौके पर नेताओं के परिजनों को दे दिया गया।

    BMC-Elections-2025-Nepotism-dominates-ticket-distribution-old-party-workers-take-a-back-seat-aslam-shaikh

    बीजेपी की सूची में रिश्तेदारों की भरमार

    बीजेपी ने भी इस बार कई चर्चित नामों को दोहराया है—

    • आकाश पुरोहित, पूर्व विधायक राज पुरोहित के बेटे
    • नील सोमैया, पूर्व सांसद किरीट सोमैया के बेटे
    • संगीता शर्मा, पूर्व नगरसेवक द्यानमूर्ति शर्मा की पत्नी
    • मकरंद नरवेकर, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर के भाई (वार्ड 226, कोलाबा)
    • हर्षिता नरवेकर, राहुल नरवेकर की बहन (वार्ड 227)

    दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी सांसद धनंजय महाडिक ने हाल ही में बयान दिया था कि पार्टी सांसदों और विधायकों के बच्चों या जीवनसाथियों को टिकट नहीं देगी, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।

    शिवसेना (UBT) में भी परिवारवाद जारी

    उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) भी इस ट्रेंड से अछूती नहीं रही—

    • अंकित प्रभु, विधायक सुनील प्रभु के बेटे (गोरेगांव, वार्ड 54)
    • सुप्रदा फातरपेकर, पूर्व विधायक प्रकाश फातरपेकर की बेटी (चेंबूर, वार्ड 150)
    • सोनम जमसुतकर, विधायक मनोज जमसुतकर की पत्नी (वार्ड 210)
    • विठ्ठल लोकरें और उनकी पत्नी सुनंदा लोकरें (मानखुर्द-शिवाजीनगर)
    • जिशान मुल्तानी, पूर्व नगरसेवक चेंजेज मुल्तानी के बेटे
    • सबा हारून खान, विधायक हारून खान की बेटी
    BMC-Elections-2025-Nepotism-dominates-ticket-distribution-old-party-workers-take-a-back-seat-news

    अजित पवार गुट की NCP और कांग्रेस भी पीछे नहीं

    • एनसीपी (अजित पवार गुट) ने विधायक नवाब मलिक के परिवार से उनके भाई कैप्टन मलिक, बहन डॉ. सईदा खान और बुशरा परवीन मलिक को टिकट दिया है।
    • कांग्रेस ने मालाड पश्चिम के वार्ड 34 से विधायक असलम शेख के बेटे हैदर अली शेख को मैदान में उतारा है।

    BMC चुनावी टिकट न मिलने से पार्टी छोड़ने की होड़

    टिकट बंटवारे से नाराज कई पुराने नगरसेवक अब पार्टी बदलने लगे हैं—

    • एमएनएस नेता स्नेहल जाधव ने दादर से टिकट न मिलने पर इस्तीफा दे दिया, उनके शिंदे गुट में जाने की चर्चा है।
    • शरद पवार गुट की मुंबई अध्यक्ष राखी जाधव बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं और घाटकोपर से टिकट मिलने की संभावना है।

    बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) का सीट शेयरिंग फॉर्मूला

    बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना इस बार साथ मिलकर बीएमसी चुनाव लड़ेंगी—

    • बीजेपी: लगभग 128 सीटें
    • शिवसेना (शिंदे): लगभग 79 सीटें
    • बाकी सीटों पर स्थानीय समीकरणों के आधार पर फैसला होगा

    हालांकि दोनों दल अपनी-अपनी सूची अलग-अलग जारी कर सकते हैं।

    ये पूर्व नगरसेवक भी मैदान में

    • किशोरी पेडणेकर, पूर्व मेयर (शिवसेना UBT) – वार्ड 199
    • तेजस्वी गोसालकर, अब बीजेपी से – वार्ड 2 (दहिसर)
    • विनोद मिश्रा, पूर्व बीजेपी नगरसेवक – मालाड
    • रवि राजा, पूर्व कांग्रेस नेता, अब बीजेपी से – वार्ड 185

    बीएमसी चुनाव में परिवारवाद क्यों बना मुद्दा?

    मुंबई जैसे महानगर में बीएमसी सिर्फ नगर निगम नहीं, बल्कि देश की सबसे अमीर नगरपालिका है। ऐसे में टिकट वितरण में पारदर्शिता और जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देना हमेशा चर्चा का विषय रहा है। इस बार भी वही सवाल उठ रहा है—क्या जनता नाम देखकर वोट देगी या काम देखकर?


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. बीएमसी चुनाव 2025 में परिवारवाद क्यों चर्चा में है?
    क्योंकि लगभग सभी प्रमुख दलों ने नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिया है।

    Q2. सबसे ज्यादा परिवारवाद किस पार्टी में दिखा?
    बीजेपी, शिवसेना (UBT), एनसीपी (अजित पवार) और कांग्रेस—चारों में यह ट्रेंड देखने को मिला।

    Q3. टिकट न मिलने से किसे नुकसान हो सकता है?
    पुराने जमीनी कार्यकर्ताओं को, जो अब पार्टी छोड़ने या बगावत की राह पर हैं।

    Q4. क्या इससे चुनावी नतीजों पर असर पड़ेगा?
    संभावना है, क्योंकि मुंबई के कई इलाकों में स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवार की पकड़ अहम होती है।