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    कांदिवली के Pawar Public School पर RTE छात्रों से पैसे मांगने का आरोप, विधानसभा में उठा मुद्दा

    Mumbai के Kandivali स्थित Pawar Public School पर RTE छात्रों के parents से books और uniform fees लेने का आरोप। MLA Yogesh Sagar ने विधानसभा में उठाया मामला, free education नियमों का उल्लंघन बताया।

    मुंबई: कांदिवली (Kandivali) के नामी Pawar Public School एक बार फिर विवादों में घिर गया है। Right to Education (RTE) के तहत एडमिशन लेने वाले छात्रों के parents से books, notebooks और school uniform के लिए पैसे मांगे जाने का मामला सामने आया है। इस मुद्दे को लेकर चारकोप के MLA योगेश सागर ने महाराष्ट्र विधानसभा में गंभीर सवाल उठाया है और इसे RTE कानून का खुला उल्लंघन बताया है।

    RTE नियमों का उल्लंघन होने का आरोप

    MLA योगेश सागर ने कहा कि भारत के संविधान के तहत शिक्षा हर बच्चे का मूल अधिकार है। RTE Act के मुताबिक, private schools में 25% सीटें economically weaker section (EWS) के बच्चों के लिए reserved होती हैं। इन छात्रों की पूरी पढ़ाई का खर्च सरकार उठाती है।

    इसके बावजूद Pawar Public School द्वारा parents से पैसे मांगना सीधा कानून का उल्लंघन है। उन्होंने साफ कहा कि RTE students से किसी भी प्रकार की fee लेना illegal है।

    Parents पर दबाव बनाने के आरोप

    इस मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि स्कूल प्रशासन parents को individually बुलाकर उन पर पैसे जमा करने का दबाव बना रहा है।

    Parents का कहना है कि उन्हें कोई written notice नहीं दिया गया, बल्कि principal के cabin में बुलाकर books और uniform के नाम पर पैसे भरने के लिए कहा जा रहा है।

    कई parents ने शिकायत की है कि अगर पैसे नहीं दिए तो बच्चों को indirect तरीके से परेशान किया जा सकता है।

    क्या कहता है RTE Act?

    RTE Act और महाराष्ट्र सरकार के guidelines के अनुसार:

    • RTE छात्रों को free education देना अनिवार्य है
    • इसमें books, notebooks, uniform और study material शामिल हैं
    • स्कूल किसी भी तरह का hidden charges या extra fee नहीं ले सकता

    👉 अधिक जानकारी के लिए सरकारी लिंक:

    स्कूल की छवि पर असर

    Pawar Public School कांदिवली और बोरीवली इलाके की reputed schools में गिनी जाती है। ऐसे में इस तरह के आरोप सामने आने से स्कूल की image पर भी असर पड़ सकता है।

    Parents का कहना है कि “नाम बड़ी चीज है, लेकिन अगर गरीब बच्चों से ही पैसे लिए जाएंगे तो RTE का मकसद ही खत्म हो जाएगा।”

    विधानसभा में उठा मुद्दा

    MLA योगेश सागर ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि:

    • इस मामले की जांच हो
    • दोषी स्कूल प्रशासन पर action लिया जाए
    • RTE students के rights को protect किया जाए

    शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल

    इस पूरे मामले के बाद सवाल यह भी उठ रहा है कि education department इस तरह की शिकायतों पर timely action क्यों नहीं लेता।

    अगर parents बार-बार शिकायत कर रहे हैं, तो monitoring system को और मजबूत करने की जरूरत है।

    Parents की बढ़ती चिंता

    मुंबई जैसे महंगे शहर में गरीब और middle-class families के लिए बच्चों की पढ़ाई पहले ही चुनौती है। ऐसे में RTE ही उनके लिए उम्मीद की किरण होती है।

    लेकिन अगर उसी में irregularities हों, तो parents के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाता है।


    FAQ Section

    Q1. क्या RTE छात्रों से स्कूल फीस ली जा सकती है?
    नहीं, RTE Act के तहत किसी भी प्रकार की फीस लेना illegal है।

    Q2. RTE में क्या-क्या free मिलता है?
    Books, notebooks, uniform और basic study material।

    Q3. शिकायत कहां करें?
    आप महाराष्ट्र RTE पोर्टल या स्थानीय शिक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

    Q4. क्या स्कूल action का सामना कर सकता है?
    हाँ, अगर आरोप सही पाए गए तो स्कूल पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

  • Mumbai School Zones में Road Safety Alert: Andheri K-East के 34 स्कूलों के बाहर Missing Signage और टूटी Footpaths का खुलासा

    Mumbai School Zones में Road Safety Alert: Andheri K-East के 34 स्कूलों के बाहर Missing Signage और टूटी Footpaths का खुलासा

    Mumbai Road Safety Audit में बड़ा खुलासा—Andheri K-East ward के 34 स्कूलों के बाहर missing school zone signage, damaged footpaths और heavy traffic congestion। UNICEF-BMC pilot project ने बच्चों की safety को लेकर कई बड़े infrastructure gaps उजागर किए।

    मुंबई: स्कूल जाने वाले बच्चों की road safety को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। UNICEF, BMC और Centre for Advocacy and Research (CACR) की साझेदारी में किए गए एक road safety audit में पता चला है कि Andheri के K-East ward में कई स्कूलों के बाहर बुनियादी सुरक्षा इंतज़ाम ही नहीं हैं।

    फरवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच किए गए इस pilot project “Strengthening Road Safety for Children and Adolescents” में 34 स्कूलों के आसपास की सड़कों का ऑडिट किया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि कई जगहों पर school zone signboards, speed limit signage और warning boards तक मौजूद नहीं हैं, जबकि कई फुटपाथ टूटे हुए या अतिक्रमण की वजह से इस्तेमाल लायक नहीं हैं।

    School Zones में Missing Signage बना बड़ा खतरा

    ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक कई स्कूलों के बाहर visible school zone signboards, distance warning boards और speed limit signage नहीं मिले।

    ऐसी स्थिति में तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहन बच्चों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। रोड सेफ्टी एक्सपर्ट्स के अनुसार स्कूलों के आसपास स्पष्ट road safety signage होना बेहद जरूरी है ताकि ड्राइवरों को पहले से सावधान किया जा सके।

    Damaged Footpaths और Encroachment से बच्चों को खतरा

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई स्कूलों के बाहर footpaths या तो मौजूद नहीं हैं, या फिर टूटे हुए हैं, जबकि कई जगहों पर encroachment की वजह से फुटपाथ बंद हो गए हैं।

    इस वजह से बच्चों को मजबूर होकर सड़क के बीच से चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

    School Timing पर Heavy Traffic Congestion

    ऑडिट में school arrival और dispersal hours के दौरान भारी ट्रैफिक जाम भी सामने आया।

    रिपोर्ट के अनुसार यह समस्या मुख्य रूप से इन वजहों से होती है:

    • स्कूल गेट के बाहर unplanned parking
    • designated pick-up and drop-off zones का अभाव
    • ट्रैफिक मैनेजमेंट की कमी

    इन कारणों से स्कूल के बाहर ट्रैफिक पूरी तरह अव्यवस्थित हो जाता है।

    Teachers और Students को बनाया Road Safety Ambassador

    इस प्रोजेक्ट में सिर्फ सर्वे नहीं किया गया बल्कि participatory approach भी अपनाई गई।

    इसके तहत:

    • 57 teachers को “Road Safety Ambassadors” के रूप में ट्रेनिंग दी गई
    • 94 students को “Road Safety Messengers” बनाया गया

    इनके जरिए 2,600 से ज्यादा छात्रों तक road safety awareness sessions पहुंचाए गए।

    School Safety Committees भी बनाई गई

    सुरक्षा सुधारने के लिए सभी 34 स्कूलों में School Safety Committees बनाई गई हैं।

    अब तक इन कमेटियों की 144 meetings हो चुकी हैं, जिनमें स्कूल के आसपास की सड़क सुरक्षा समस्याओं की पहचान और समाधान पर चर्चा की गई।

    Nityanand Municipal School के पास हुआ बड़ा सुधार

    रिपोर्ट में Nityanand Municipal School, जो Western Express Highway के पास स्थित है, का उदाहरण भी दिया गया।

    यहां ऑडिट के दौरान पता चला कि:

    • speed breakers नहीं थे
    • स्कूल गेट के कारण traffic congestion हो रहा था

    इसके बाद प्रशासन ने वहां:

    • speed breakers लगाए
    • zebra crossings बनाए
    • school zone signboards लगाए
    • और separate entry-exit gates बनाए गए

    जिससे छात्रों की आवाजाही ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित हो गई।

    अब पूरे Mumbai में होगा Road Safety Audit

    अधिकारियों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट का second phase जल्द शुरू किया जाएगा।

    इसमें Mumbai के अन्य municipal wards में भी स्कूलों के आसपास road safety audit किया जाएगा और यह भी मॉनिटर किया जाएगा कि सुझाए गए सुरक्षा उपाय वास्तव में लागू हो रहे हैं या नहीं।

    K-East ward के Administrative Officer (Schools) Gorakhnath Bhavri के अनुसार:
    स्कूलों के आसपास सुरक्षित माहौल बनाना और school arrival-dispersal hours के दौरान traffic management को सुधारना बेहद जरूरी है। इस ऑडिट से साफ हुआ है कि कई स्कूलों के बाहर basic road safety infrastructure अभी भी inadequate है और इसके लिए ट्रैफिक पुलिस व स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।


    FAQ

    Q1: Mumbai में Road Safety Audit कहाँ किया गया?

    यह ऑडिट Andheri के K-East ward में 34 स्कूलों के आसपास किया गया।

    Q2: Road Safety Audit किसने किया?

    यह ऑडिट UNICEF, BMC और Centre for Advocacy and Research (CACR) की साझेदारी में किया गया।

    Q3: रिपोर्ट में सबसे बड़ी समस्या क्या सामने आई?

    रिपोर्ट में missing school zone signage, damaged footpaths, encroachment और school timing पर traffic congestion को बड़ी समस्या बताया गया।

    Q4: इस प्रोजेक्ट में छात्रों और शिक्षकों की क्या भूमिका रही?

    57 teachers को Road Safety Ambassadors और 94 students को Road Safety Messengers बनाकर awareness campaign चलाया गया।

    Q5: क्या यह प्रोजेक्ट पूरे मुंबई में लागू होगा?

    हाँ, प्रोजेक्ट के second phase में इसे मुंबई के अन्य wards में भी लागू किया जाएगा।