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  • मढ सीआरज़ेड घोटाला – 24 हजार फाइलें गायब, भ्रष्टाचार की परतें उजागर

    मढ सीआरज़ेड घोटाला – 24 हजार फाइलें गायब, भ्रष्टाचार की परतें उजागर

    मालाड मढ सीआरज़ेड घोटाले की पूरी जांच रिपोर्ट – कैसे 24 हजार फाइलें गायब हुईं, SIT जांच पर उठे सवाल, और हाईकोर्ट ने अधिकारियों पर क्यों जताई नाराज़गी। जानिए घोटाले की पूरी टाइमलाइन और भ्रष्टाचार का खेल।

    मुंबई: मालाड (Malad) के मढ (Madh) इलाके में समुद्र किनारे बने बंगले और अवैध बांधकाम (Illegal Constructions in CRZ Area) लंबे समय से विवादों में रहे हैं।

    • 2010–2015: कई बिल्डरों और दलालों ने CRZ (Coastal Regulation Zone) नियमों को तोड़कर बंगले और होटल बनाए।
    • 2016–2019: RTI कार्यकर्ताओं ने शिकायतें करना शुरू किया। पहली बार सामने आया कि महापालिका (BMC) और सरकारी अधिकारियों ने बनावट नक्शे (Fake Maps) पास किए।
    • 2019: RTI में खुलासा हुआ कि इन बांधकामों को वैध दिखाने के लिए बनावट प्रमाणपत्र दिए गए।

    🔹 SIT जांच और बनावट नक्शों का खुलासा

    हाईकोर्ट के आदेश पर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई।

    • SIT ने पाया कि दलाल और कुछ अधिकारी मिलकर पैसों के बदले बनावट नक्शे पास कर रहे थे।
    • अप्रैल 2025 में पुलिस ने एक गवाह का बयान दर्ज किया, जिसने माना कि उसने अधिकारियों और दलालों को नक्शा पास कराने के लिए रिश्वत दी।
    • इस गवाह ने कैसे, कब और किसे पैसे दिए, इसके सबूत भी पेश किए।

    🔹 24 हजार फाइलें कैसे गायब हुईं?

    RTI एक्टिविस्ट वैभव ठाकुर ने हाल ही में जानकारी मांगी तो बड़ा खुलासा हुआ –
    👉 जिलाधिकारी कार्यालय से 24 हजार से ज्यादा कागजात गायब हो चुके हैं।
    ये वही कागज थे जिनमें अवैध बांधकामों से जुड़े नक्शे, अनुमति और प्रमाणपत्र दर्ज थे।

    याचिकाकर्ता का आरोप है कि –

    • कुछ अधिकारियों को बचाने के लिए फाइलें गायब की गईं।
    • SIT की जांच में भी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, सिर्फ दलालों पर दबाव बनाया गया।

    🔹 हाईकोर्ट की कड़ी फटकार

    शुक्रवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा –

    • इतनी बड़ी संख्या में फाइलें गायब कैसे हो गईं?
    • “अगर एक हफ्ते में फाइलें नहीं मिलतीं तो अलग से FIR दर्ज करें।”
    • कोर्ट ने पूछा – “दलालों पर कार्रवाई हुई, तो अधिकारियों पर क्यों नहीं?

    साथ ही कोर्ट ने कहा कि हर बार याचिकाकर्ताओं को ही कोर्ट का दरवाज़ा क्यों खटखटाना पड़ता है, यह जिम्मेदारी सरकार और अधिकारियों की भी है।

    🔹 70 बांधकाम तोड़े गए, लेकिन…

    BMC ने कोर्ट को बताया कि अब तक 70 अवैध बांधकाम तोड़े जा चुके हैं।
    लेकिन याचिकाकर्ताओं का दावा है कि –

    • कई बड़े निर्माण अब भी खड़े हैं।
    • छोटे-मोटे बांधकाम गिराकर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है।

    🔹 राजनीति और प्रशासन की मिलीभगत?

    इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप भी लगे हैं।

    • दलालों के ज़रिए नेताओं तक पैसा पहुँचने की बात कही जा रही है।
    • SIT जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या बड़े नामों को बचाने के लिए जांच को कमजोर किया गया।

    📌 घोटाले की टाइमलाइन (संक्षेप में)

    • 2010–2015: मढ इलाके में अवैध बांधकाम शुरू।
    • 2016–2019: RTI में खुलासे – नकली प्रमाणपत्र और नक्शे।
    • 2019: हाईकोर्ट में याचिका दाखिल।
    • 2020–2023: SIT जांच शुरू, लेकिन धीमी प्रगति।
    • अप्रैल 2025: गवाह ने दलालों और अधिकारियों पर रिश्वतखोरी का खुलासा किया।
    • सितंबर 2025: RTI में पता चला कि 24 हजार फाइलें गायब।
    • सितंबर 2025: हाईकोर्ट ने ज़िलाधिकारी कार्यालय को फटकार लगाई।

    ❓FAQ सेक्शन

    Q1. मढ सीआरज़ेड घोटाले में कितनी फाइलें गायब हुई हैं?
    लगभग 24 हजार कागज़ात, जो अवैध बांधकामों से जुड़े थे।

    Q2. SIT जांच पर सवाल क्यों उठे?
    क्योंकि SIT ने सिर्फ दलालों पर कार्रवाई की, अधिकारियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    Q3. हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
    एक हफ्ते में फाइलें ढूंढो, वरना अलग FIR दर्ज करो।

    Q4. कितने अवैध बांधकाम अब तक तोड़े गए हैं?
    BMC का दावा है कि 70 बांधकाम गिराए जा चुके हैं।

  • मुंबई में फिर खुलेंगे कबूतरखाने! CM फडणवीस ने दिए निर्देश

    मुंबई में फिर खुलेंगे कबूतरखाने! CM फडणवीस ने दिए निर्देश

    मुंबई के पक्षी प्रेमियों को राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहत की खबर सुनाईं है। कबूतरों को दाना डालने के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। मुख्यमंत्री के इस पहल से कबूतरों के संरक्षण की मांग कर रहे कबूतरप्रेमियों को बड़ी राहत मिली है। Pigeon houses will open again in Mumbai! CM Fadnavis gave instructions

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    शहर में कबूतरखानों को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रहा विवाद अब थमता हुआ नजर आ रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद कबूतरखानों के खिलाफ मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा शुरू की गई कार्रवाई अब थम सकती है। दरअसल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बैठक की और उन्होंने शहर में कबूतरखानों को अचानक बंद करने के कदम को उचित नहीं माना।

    मंत्रालय में हुए उच्चस्तरीय बैठक

    मंत्रालय में मंगलवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में सीएम फडणवीस ने कहा, कि “कबूतर-खानों यानी पक्षियों को दाना डालने की जगह को अचानक बंद करना कोई समस्या का समाधान नहीं है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि यदि कबूतरों के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं, तो उन पर वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है, न कि सीधे प्रतिबंध लगा देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया, कि “कबूतरों को दाना डालने के लिए एक निर्धारित समय तय किया जा सकता है।”

    मुख्यमंत्री ने दिया सुझाव

    सीएम फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री अजित पवार, वन मंत्री गणेश नाइक, मंत्री गिरीश महाजन और मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा भी उपस्थित थे। बैठक के दौरान फडणवीस ने कहा कि कबूतरों की विष्ठा से होने वाली गंदगी की सफाई के लिए विशेष तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। कबूतरखानों से नागरिकों को कोई परेशानी न हो, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। Pigeon houses will open again in Mumbai! CM Fadnavis gave instructions

    सरकार करेगी अदालत में अपील

    सीएम फडणवीस ने राज्य सरकार और बीएमसी को निर्देश दिए हैं कि हाईकोर्ट में कबूतरखानों के पक्ष में मजबूत ढंग से अपनी बात रखा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ‘नियंत्रित फीडिंग’ जैसी व्यवस्था लागू की जा सकती है, और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी सरकार जाएगी। Pigeon houses will open again in Mumbai! CM Fadnavis gave instructions

    विशेष मशीन का होगा उपयोग

    बीजेपी विधायक एवं मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, कि सरकार कबूतरखानों को अचानक बंद करने के पक्ष में नहीं है और बॉम्बे हाईकोर्ट में सरकार पक्ष रखेगी। जो कबूतरखाने प्लास्टिक शीट से ढंककर बंद किए गए है, उन्हें जल्द ही फिर से खोला जाएगा। उन्होंने बताया कि कबूतरों को अब नियंत्रित ढंग से ही दाना दिया जाएगा, जिससे नागरिकों को कोई असुविधा न हो। कबूतरों की विष्ठा की सफाई के लिए ‘टाटा’ कंपनी द्वारा निर्मित एक विशेष मशीन का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया जाएगा।

    FIR दर्ज करने का दिया था आदेश

    मुंबई शहर में 51 ‘कबूतर खाने’ यानी पक्षियों को दाना डालने की जगह हैं। कुछ दिन पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने कबूतरों के झुंड को दाना डालने को ‘सार्वजनिक उपद्रव’ करार देते हुए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) को ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था। बीएमसी ने दादर का मशहूर ‘कबूतर खाना’ बंद कर दिया और उसे प्लास्टिक के तिरपाल से ढक दिया। इसके बाद शहर के कुछ हिस्सों में पक्षी प्रेमियों और जैन समुदाय के लोगों ने नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन भी किए। हालांकि अब सीएम फडणवीस की इस पहल से कबूतरप्रेमियों को बड़ी राहत मिली है।

  • पुलिस पर लगे कॉपी पेस्ट के आरोप, सरकार को दिया कोर्ट ने निर्देश

    पुलिस पर लगे कॉपी पेस्ट के आरोप, सरकार को दिया कोर्ट ने निर्देश

    पुलिस प्रशासन पर कॉपी पेस्ट के आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि पुलिस प्रशासन के बीच ये कॉपी पेस्ट का कल्चर खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है। इससे कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। Police accused of copy paste, court gives instructions to the government

    मुंबई: गवाहों के बयान और आरोपियों के जवाब एक दूसरे से मेल नही खाते। तब पर भी क्यों न्याय के लिए पीड़ितों को 19 साल का इंतजार करना पड़ा। मुंबई लोकल ट्रेन बम ब्लास्ट के मामले ने सैकड़ों निरपराध लोगों की जान ले ली और प्रशासन लीपा-पोती कर निर्दोष लोगों को जेल में ठूंस दिया। यहां तक कि कईयों को उम्र कैद तो कईयों को फांसी की सजा तक सूना दी गई। लेकिन आखिरकार हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया तब जाकर फैसला सामने आया, कि पुलिस ने आरोप पत्र में गड़बड़ियां की हुई है और गिरफ्तार आरोपियों को सज़ा देने के लिए कोई भी ठोस सबूत नही है।

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    लापरवाह प्रशासन

    मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाका कोई छोटी मोटी घटना नहीं थी। इस घटना ने पूरे देश को झगझोड कर रख दिया था। लेकिन प्रशासन उन आरोपियों को पकड़ने में नाकाम हो गई और बेगुनाहों को बली का बकरा बना दिया गया। ये कैसी क्रूरता रही की उन निरपराध लोगों को 19 सालों का वनवास काटना पड़ा। इसकी जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जबकि सरकारी पक्ष भी कोर्ट में गलत साबित हुआ।

    कोर्ट में क्या हुआ?

    मुंबई ट्रेन बम ब्लास्ट मामले में हाईकोर्ट ने आरोपियों के इकबालिया बयान में समानता पर गंभीरता से गौर किया। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के बयान कई आधारों पर अधूरे हैं और सत्यता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। बॉम्बे हाईकोर्ट ने चार्जशीट में गवाहों के बयान में कॉपी-पेस्ट कल्चर पर चिंता जताते हुए इसे खतरनाक ट्रेंड बताया है। अदालत ने 2006 के मुंबई ट्रेन बम ब्लास्ट मामले में 12 आरोपियों को बरी कर दिया।

    अदालत ने क्या कहा?

    अदालत ने कहा कि गवाहों और आरोपियों के बयान अधूरे और असत्य पाए गए हैं और इनके कुछ हिस्से एक-दूसरे से हूबहू मिलते हैं, जो कॉपी-पेस्ट कल्चर को दर्शाते हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मई और जून के मामलों में गवाहों के बयानों में कॉपी-पेस्ट पर संज्ञान लिया और महाराष्ट्र सरकार से इससे निपटने और इस संबंध में गाइडलाइन जारी करने को कहा।

    पुलिस प्रशासन का कॉपी पेस्ट

    मई में हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में पुलिस की ओर से अमल में लाए जा रहे एक और खतरनाक कल्चर पर संज्ञान लिया था, जिसमें गंभीर अपराधों में भी गवाहों के बयान कॉपी-पेस्ट किए गए थे। अदालत ने तब कहा था कि गवाहों के बयान में कॉपी पेस्ट के इस तरह के कई मामले सामने आए है। पिछले महीने हाईकोर्ट ने एक अन्य आपराधिक मामले में भी इसी तरह के ट्रेंड पर संज्ञान लिया था और राज्य सरकार को इससे निपटने का निर्देश दिया था।

    2006 के मुंबई ट्रेन बम ब्लास्ट मामले में जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस श्याम चंदक की विशेष पीठ ने कहा कि कई आरोपियों के इकबालिया बयान इस तरह के थे, जिन्हें देखकर लग रहा था कि सवालों के जवाब कॉपी-पेस्ट किए गए हैं। Police accused of copy paste, court gives instructions to the government

  • मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के सभी आरोपी हो गए बरी, फांसी की सजा भी हुई रद्द

    मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के सभी आरोपी हो गए बरी, फांसी की सजा भी हुई रद्द

    Mumbai Train Blast: 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए धमाकों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गिरफ्तार सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। All the accused in Mumbai train blast case were acquitted, death sentence was also cancelled

    न्यूज़ डेस्क
    Mumbai Train Blast:
    साल 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सीरियल बम धमाकों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाते हुए सभी को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने इस केस में शामिल सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है और उन्हें तुरंत जेल से रिहा करने का भी आदेश दिया है। All the accused in Mumbai train blast case were acquitted, death sentence was also cancelled

    क्या है पूरा मामला?

    11 जुलाई 2006 की शाम को मुंबई में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई थी। उस वक्त लोकल ट्रेनें यात्रियों से भरी थी। तभी महज़ 11 मिनट के भीतर शहर की अलग-अलग जगहों पर 7 धमाके हुए। इस घटना में 189 लोगों की मौत हो गई और 827 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। ये धमाके खार, सांताक्रूज, बांद्रा, जोगेश्वरी, माहिम, मीरा रोड, भायंदर, माटुंगा, माहिम और बोरीवली में हुए थी। इस हमले से पूरे मुंबई में डर और अफरा-तफरी मच गई। शुरू में इन घटनाओं को लेकर सात अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं, लेकिन बाद में जब यह पता चला कि यह एक बड़ा आतंकी हमला है, तो इसकी जांच ATS को सौंप दी गई।

    12 लोगों को दोषी ठहराया गया

    नवंबर 2006 में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। 2015 में ट्रायल कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को दोषी ठहराया था और इनमें से 5 को फांसी की सजा और 7 को उम्रकैद दी गई थी। All the accused in Mumbai train blast case were acquitted, death sentence was also cancelled

    गवाहों पर नहीं हुआ कोर्ट को भरोसा

    ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। जनवरी 2025 में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई और अब 19 साल बाद फैसला आया की सभी आरोपियों को बरी कर दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति एस. चांडक की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष यानी कि सरकार की ओर से मुकदमा लड़ने वाले पक्के सबूत नहीं दे सके जिसके कारण ये फैसला लेना पड़ा है।

    कोर्ट ने 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में दिए गए ज्यादातर गवाहों के बयानों को भरोसे लायक नहीं माना। फैसले में कहा, कि टैक्सी ड्राइवरों और ट्रेन में मौजूद लोगों के लिए धमाके के 100 दिन बाद आरोपियों को पहचानना बहुत मुश्किल था। इतने लंबे समय बाद दी गई गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए कोर्ट ने गवाही को मान्यता नहीं दी। All the accused in Mumbai train blast case were acquitted, death sentence was also cancelled

    राज्य सरकार की याचिका भी हुई खारिज

    हाईकोर्ट ने न सिर्फ आरोपियों की अपील मंजूर की, बल्कि राज्य सरकार की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उसने फांसी की सजा बरकरार रखने की मांग की थी। All the accused in Mumbai train blast case were acquitted, death sentence was also cancelled

  • देवेन्द्र फडणवीस को बॉम्बे हाईकोर्ट का नोटिस, चुनाव में घपला..

    देवेन्द्र फडणवीस को बॉम्बे हाईकोर्ट का नोटिस, चुनाव में घपला..

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2024 के महाराष्ट्र चुनाव में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस नेता प्रफुल्ल विनोदराव गुडधे द्वारा दायर चुनाव याचिका के संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को नोटिस जारी किया है। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    मुंबई- बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ नागपुर दक्षिण पश्चिम विधानसभा सीट से 2024 में उनकी जीत को चुनौती देने वाली एक चुनावी याचिका को लेकर नोटिस जारी किया है। आरोप है कि देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव के दौरान कई अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    क्या है मामला ?

    बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच द्वारा जारी नोटिस का जवाब 8 मई को देना है। यह समन कांग्रेस नेता प्रफुल्ल विनोदराव गुडधे द्वारा जनवरी में दायर चुनाव याचिका के संबंध में जारी किया गया था, जो विधानसभा चुनाव के दौरान देवेंद्र फडणवीस से 39,710 मतों के अंतर से हार गए थे। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    खबरों के मुताबिक, गुडधे ने याचिका में प्रक्रियागत खामियों और भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाया था और मांग की थी कि हाईकोर्ट फडणवीस की जीत को “अमान्य” घोषित करे। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    यह मामला न्यायमूर्ति प्रवीण पाटिल की पीठ के समक्ष पहुंचा, जिन्होंने गुरुवार को अपने कक्ष में याचिका पर सुनवाई की और फडणवीस को नोटिस जारी किया। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    गुडधे के वकील पवन दहत ने बताया, “न्यायमूर्ति प्रवीण पाटिल ने मुख्यमंत्री फडणवीस को समन (नोटिस) जारी किया है, जिस पर 8 मई तक जवाब देना है।” (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    कोर्ट में पेशी

    खबरों के मुताबिक, देवेंद्र फडणवीस को अगली तारीख पर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की जरूरत नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री के कानूनी प्रतिनिधि को कोर्ट में पेश होकर याचिका का जवाब देना होगा। विनोदराव गुडधे के वकील पवन दहत और एबी मून ने दावा किया है, कि पिछले साल नवंबर में हुए राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान कई अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    महायुति गठबंधन की सरकार

    महायुति गठबंधन युवती में भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी शामिल हैं। इसी महायुति गठबंधन ने हालही के विधानसभा चुनाव में भारी जीत हासिल की। ​​इस गठबंधन ने 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा सीटों में 230 सीटें जीतीं है। जिसमें भाजपा ने 132 सीटें जीतें। शिवसेना और एनसीपी ने क्रमशः 57 और 41 सीटों पर जीत हासिल की है। जीत के बाद, देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने, जबकि शिंदे और पवार ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    इस बीच, उच्च न्यायालय ने नागपुर पश्चिम से भाजपा विधायक मोहन मते और चंद्रपुर जिले की चिमूर सीट से कीर्तिकुमार भांगडिया को भी इसी तरह की चुनाव याचिकाओं पर समन जारी किया है। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

  • मालाड़ (पश्चिम) अक्सा के ‘अवैध पे एंड पार्क’ का मुद्दा बॉम्बे हाईकोर्ट में गूंजा

    मालाड़ (पश्चिम) अक्सा के ‘अवैध पे एंड पार्क’ का मुद्दा बॉम्बे हाईकोर्ट में गूंजा

    मालाड़ (पश्चिम) के अक्सा में पुलिस बीट चौकी की सरकारी जमीन पर अवैध पे एंड पार्क चलाए जाने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में पेश याचिका की सुनवाई के दौरान कलेक्टर को दिए जांच के निर्देश। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)

    मुम्बई- बम्बई हाईकोर्ट में मालाड़ (पश्चिम) के अक्सा बीच के निकट एक पे एंड पार्क का मुद्दा गरमाया हुआ है। हाईकोर्ट ने कलेक्टर को 12 हफ्तों के भीतर कब्जेदारों को नोटिस देकर, प्लॉट का सर्वे करने और मामले की पड़ताल कर कोर्ट में रिपोर्ट सबमिट करने का हुक्म दिया है। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)

    अदालती दिशा निर्देश के मुताबिक, कलेक्टर या उनके अधिकृत प्रतिनिधियों को याचिकाकर्ता और उनके प्रतिवादी संस्था तथा विवादित जमीन पर कब्जा करने वाले अन्य व्यक्तियों के खिलाफ नोटिस जारी करें। इसके पश्चात, उन्हें विवादित जमीन का सर्वेक्षण करना होगा और सभी पक्षों की सुनवाई करनी होगी। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)

    आरोपों की जांच के निर्देश

    बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई उपनगरीय कलेक्टर को आदेश दिया है कि वह मालाड (पश्चिम) के अक्सा में सरकारी जमीन पर अवैध पे-एंड-पार्क प्रणाली के संचालन के संबंध में अतिक्रमण के आरोपों की जांच करें और 12 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)

    पुलिस बीट चौकी की जमीन

    9 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति मकरंद एस कार्णिक की बेंच ने नागरिक सेवा सुधार समिति (NGO) के अध्यक्ष मोहम्मद उस्मान शेख द्वारा दायर जनहित याचिका पर निर्णय सुनाया। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिलाधिकारी (Collector) और बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने कंसारी माता आदिवासी सामाजिक विकास संस्था के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, जिसने अवैध पार्किंग सेवा के लिए पुलिस बीट चौकी की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया हुआ है। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)

    समिति के अध्यक्ष मोहम्मद उस्मान शेख ने अपने वकील भरत मीरचंदानी के जरिए कोर्ट के सामने यह तर्क रखा कि अधिकारियों को ज्ञापन देने के बावजूद, विवादास्पद संगठन के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)

    अतिक्रमण हटाने की मांग

    याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि सरकारी निर्देशों के अनुसार, उस जमीन का उपयोग केवल पेवर ब्लॉक, सौर प्रकाश, लाल रेत, वृक्षारोपण और पर्यटन के लिए सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों के लिए किया जाना चाहिए था। मीरचंदानी ने कोर्ट से अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश देने की मांग की। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)

    कलेक्टर को दिए निर्देश

    सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके पश्चात बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि “किसी ने सार्वजनिक जमीन पर अतिक्रमण किया है या नहीं, यह एक तथ्यात्मक मुद्दा है और आमतौर पर यह विवादास्पद होता है।” इसीलिए अदालत ने कलेक्टर या उनके अधिकृत प्रतिनिधियों को आदेश दिया है कि वे याचिकाकर्ता और उनके प्रतिवादी संस्था और विवादास्पद जमीन पर काबिज अन्य व्यक्तियों को नोटिस भेजें। इसके बाद, कलेक्टर विभाग को विवादित जमीन का सर्वेक्षण करना होगा और सभी पक्षों की सुनवाई करनी होगी। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)

    Uअतिक्रमण हटाने के निर्देश

    अदालत ने यह भी कहा कि अगर संबंधित जमीन सरकारी संपत्ति के रूप में पहचानी जाती है, तो कलेक्टर विभाग कानून के तहत अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि यह पूरी प्रक्रिया 12 हफ्ते यानी 3 महिनों के भीतर संपन्न होनी चाहिए और यदि अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता है, तो पुलिस की सहायता भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)

    कोर्ट के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि निष्कासन के आदेश से प्रभावित कोई भी व्यक्ति कानून में उपलब्ध विकल्पों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र होगा। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)