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  • Mumbai: अंधेरी पुलिस के हत्थे चढ़ा बदमाश, जो राह चलती बुजुर्ग महिलाओं को करता था टार्गेट

    Mumbai: अंधेरी पुलिस के हत्थे चढ़ा बदमाश, जो राह चलती बुजुर्ग महिलाओं को करता था टार्गेट

    अंधेरी पुलिस ने एक ऐसे 50 वर्षीय बदमाश को गिरफ्तार किया है जो राह चलती बुजुर्ग महिलाओं को टार्गेट कर उनके कीमती गहने उड़ा कर रफूचक्कर हो जाया करता था। पश्चिम बंगाल भागते हुए पुलिस ने इगतपुरी से किया गिरफ्तार। कुल 42 घटनाओं का आरोपी हुआ गिरफ्तार .. Mumbai: Andheri police caught a rogue who used to target elderly women walking on the road.

    मुंबई: राह चलती बुजुर्ग महिलाओं को अपने बातों में फंसा कर उनके कीमती गहने उड़ा ले जाने वाले 50 वर्षीय मनव्वर उर्फ अब्दुल हमीद शेख को आखिरकार अंधेरी पुलिस ने इगतपुरी रेलवे स्टेशन पर नाशिक पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया है। जैसे ही आरोपी को पता चला कि पुलिस उसे ढूंढ रही है वह पश्चिम बंगाल के लिए फरार हो चुका था। खास बात यह रही कि आरोपी अपने पास कोई मोबाइल फोन भी इस्तेमाल नही करता। लेकिन मुंबई पुलिस की तकनीकी टीम एक बार फिर अनसुलझे केस को सुलझाने में कामयाब हो गई।

    कैसे बनता था शिकार ?

    अंधेरी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक उमेश मचिंदर ने बताया, कि आए दिन राह चलते बुजुर्गों को टार्गेट करते हुए, उन्हें बातों में उलझा कर उनके किमती सामानों को लेकर फरार होने की कई शिकायतें मिल रही थी। आखरी घटना 15 जुलाई 2025 की है। बुजुर्ग महिला की शिकायत के मुताबिक लगभग 11:50 को वह अंधेरी पूर्व के तेली गली क्रॉस रोड़ पर पैदल चल रही थी, कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे बातों में फंसाकर उसके 28 ग्राम वजनी सोने की चैन उसके गले से निकलवा लिया और जांच का बहाना बनाते हुए उसे बातों में उलझा कर वहां से फरार हो गया। पुलिस जब घटना स्थल पर पहुंची और सीसीटीवी फुटेज चेक किया तो वह व्यक्ति बरसात की छतरी लिए हुए था। जिसके कारण उसका चेहरा नजर नही आ रहा था।

    कैसे हुई आरोपी की पहचान ?

    क्राईम डिटेक्शन के जांच अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक किशोर परकाळे ने बताया, कि छतरी के पीछे आरोपी वहां से खिसकने में कामयाब हो गया। लेकिन अगले 5 दिनों तक हमारी टीम आरोपी की शिनाख्त करते हुए बहोत सारे सीसीटीवी कैमरों की जांच की, तो पता चला कि आरोपी पुराना शातिर है। जिसके खिलाफ पहले से लगभग 40 मामले दर्ज हैं। कोर्ट से गैर जमानती वारंट भी जारी किया जा चुका है। जब उसके पते पर गए तो पता चला कि वह एक जगह नही कुर्ला पूर्व के कुरेशी नगर के सोनाजी चाल, नेहरू नगर के साहेबा बिल्डिंग और संगम सोसायटी इन तीनों कुर्ला पूर्व के इलाके में रहता है लेकिन जब पुलिस इसकी तलाश कर रही थी तो उसे भनक लग गई और वो फरार हो गया।

    आरोपी के खिलाफ पहले से 36 मामले दर्ज

    क्राईम डिटेक्शन के पुलिस निरीक्षक विनोद पाटील ने बताया, कि आरोपी के खिलाफ पहले से बोरीवली, घाटकोपर, दिंडोशी, जोगेश्वरी, गांवदेवी, बांद्रा, मालाड़, समता नगर, मुंबई सेंट्रल, पंतनगर, भोइवाडा, सांताक्रूज़, दहिसर, नया नगर, ख़ार, नागपाडा और अंधेरी इलाके के पुलिस स्टेशनों और रेलवे पुलिस थानों मे 36 मामले दर्ज हैं। जिसमें मुंबई सेन्ट्रल और बांद्रा कोर्ट से कई मामलों मे गिरफ्तारी के वारंट जारी हो चुके हैं। ऐसे में इसका पता लगाना बहुत जरूरी हो गया था। पुलिस की टीम लगातार मुखबिरों और सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल कर रही थी। हमें पता चला कि आरोपी पश्चिम बंगाल के लिए ट्रेन पकड़ चुका है। जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई और उनकी निगरानी मे नाशिक पुलिस से मदद ली गई।

    नासिका पुलिस ने ट्रेन का पता लगाकर इगतपुरी से आरोपी को हिरासत में लिया और फिर अंधेरी पुलिस को सौंप दिया गया। अंधेरी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक ने बताया कि चोरी के जेवरात हस्तगत कर लिए गए हैं और उसके साथ ही कुल 6 अपराध का खुलासा हुआ है। जो अंधेरी, वाकोला, सायन, बोरीवली पूर्व के कस्तूरबा पुलिस स्टेशन, वसई रेलवे स्टेशन और दादर रेलवे स्टेशन पर इसने घटना को अंजाम देकर फरार हो गया था। Mumbai: Andheri police caught a rogue who used to target elderly women walking on the road.

  • मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के सभी आरोपी हो गए बरी, फांसी की सजा भी हुई रद्द

    मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के सभी आरोपी हो गए बरी, फांसी की सजा भी हुई रद्द

    Mumbai Train Blast: 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए धमाकों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गिरफ्तार सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। All the accused in Mumbai train blast case were acquitted, death sentence was also cancelled

    न्यूज़ डेस्क
    Mumbai Train Blast:
    साल 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सीरियल बम धमाकों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाते हुए सभी को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने इस केस में शामिल सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है और उन्हें तुरंत जेल से रिहा करने का भी आदेश दिया है। All the accused in Mumbai train blast case were acquitted, death sentence was also cancelled

    क्या है पूरा मामला?

    11 जुलाई 2006 की शाम को मुंबई में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई थी। उस वक्त लोकल ट्रेनें यात्रियों से भरी थी। तभी महज़ 11 मिनट के भीतर शहर की अलग-अलग जगहों पर 7 धमाके हुए। इस घटना में 189 लोगों की मौत हो गई और 827 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। ये धमाके खार, सांताक्रूज, बांद्रा, जोगेश्वरी, माहिम, मीरा रोड, भायंदर, माटुंगा, माहिम और बोरीवली में हुए थी। इस हमले से पूरे मुंबई में डर और अफरा-तफरी मच गई। शुरू में इन घटनाओं को लेकर सात अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं, लेकिन बाद में जब यह पता चला कि यह एक बड़ा आतंकी हमला है, तो इसकी जांच ATS को सौंप दी गई।

    12 लोगों को दोषी ठहराया गया

    नवंबर 2006 में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। 2015 में ट्रायल कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को दोषी ठहराया था और इनमें से 5 को फांसी की सजा और 7 को उम्रकैद दी गई थी। All the accused in Mumbai train blast case were acquitted, death sentence was also cancelled

    गवाहों पर नहीं हुआ कोर्ट को भरोसा

    ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। जनवरी 2025 में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई और अब 19 साल बाद फैसला आया की सभी आरोपियों को बरी कर दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति एस. चांडक की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष यानी कि सरकार की ओर से मुकदमा लड़ने वाले पक्के सबूत नहीं दे सके जिसके कारण ये फैसला लेना पड़ा है।

    कोर्ट ने 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में दिए गए ज्यादातर गवाहों के बयानों को भरोसे लायक नहीं माना। फैसले में कहा, कि टैक्सी ड्राइवरों और ट्रेन में मौजूद लोगों के लिए धमाके के 100 दिन बाद आरोपियों को पहचानना बहुत मुश्किल था। इतने लंबे समय बाद दी गई गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए कोर्ट ने गवाही को मान्यता नहीं दी। All the accused in Mumbai train blast case were acquitted, death sentence was also cancelled

    राज्य सरकार की याचिका भी हुई खारिज

    हाईकोर्ट ने न सिर्फ आरोपियों की अपील मंजूर की, बल्कि राज्य सरकार की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उसने फांसी की सजा बरकरार रखने की मांग की थी। All the accused in Mumbai train blast case were acquitted, death sentence was also cancelled

  • Mumbai: पुनर्विकास बना आम आदमी की मुसीबत, किराए ने तोड़ा रिकॉर्ड

    Mumbai: पुनर्विकास बना आम आदमी की मुसीबत, किराए ने तोड़ा रिकॉर्ड

    देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में लगातार पुनर्विकास परियोजनाओं के चलते यहां किराए के पैसों में दोगुना इजाफा हो गया है। लेकिन बिल्डरों को मिली मनमानी छूट से आम आदमी की कमरतोड़ नुकसान हो रहा है। सरकार को इसपर विचार करने की जरूरत है। (Redevelopment has become a problem in Mumbai for the common man, rent has broken records)

    मुम्बई: देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई (Bombay is the financial capital of the country) में चल रहे घरों के पुनर्विकास कार्यों ने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। शहर के कई हिस्सों में मकानों के किराए में बेतहाशा वृद्धि देखी जा रही है। बांद्रा, खार, चेंबूर, कांदीवली, बोरिवली और मालाड़ जैसे इलाकों में किराए 50 से 65 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं, जिससे आम लोगों के लिए घर का किराया भरना बेहद मुश्किल हो गया है। साथ ही झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्रकल्पों में बिल्डरों की मनमानी लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। (Redevelopment has become a problem in Mumbai for the common man, rent has broken records)

    बिना योजना के पुनर्विकास से बढ़ी परेशानी

    मुम्बई में हजारों पुरानी इमारतों को तोड़कर नई इमारतों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इनमें रहने वाले किरायेदारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। डेवलपर्स द्वारा अस्थायी आवास के लिए जो किराया दिया जाता है, वह बाजार दर से काफी कम होता है। ऐसे में लोग मजबूरी में महंगे और छोटे घरों में रहने को विवश हो रहे हैं। ऐसे ही झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (Slum Rehabilitation Authority) के तहत बन रहे परियोजनाओं में भी झोपड़ा धारकों को दिया जाने वाला वैकल्पिक किराए का पैसा बाजार मूल्यांकन के मुकाबले काफी कम होता है। (Redevelopment has become a problem in Mumbai for the common man, rent has broken records)

    प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

    विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की ढीली नीतियों और पुनर्विकास में बिल्डरों को दी गई खुली छूट ने इस समस्या को और भी गंभीर बना दिया है। कोविड़ महामारी के बाद से घरों की मांग में तेजी आई है, और अब पुनर्विकास की वजह से किराए के मकानों की संख्या घट रही है, जिससे किराए और भी बढ़ रहे हैं। (Redevelopment has become a problem in Mumbai for the common man, rent has broken records)

    बिल्डरों को फायदा, जनता परेशान

    बांद्रा, खार और सांताक्रुज़ जैसे इलाकों में स्टूडियो अपार्टमेंट का किराया 25,000 रुपये से बढ़कर 50,000 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि 1 बेडरूम हॉल किचिन के लिए 75,000 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। प्रॉपर्टी बाजार में रेंटल यील्ड दोगुनी हो चुकी है, जिसका सीधा लाभ बिल्डर्स और मकान मालिकों को मिल रहा है। (Redevelopment has become a problem in Mumbai for the common man, rent has broken records)

    क्या आम आदमी के लिए बचेगा कोई विकल्प?

    अगर यही हालात जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में मुम्बई में मध्यम वर्ग के लिए किफायती घर पाना नामुमकिन हो जाएगा। सरकार को चाहिए कि वह पुनर्विकास के लिए ठोस नीति बनाए और किराएदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, वरना यह संकट और भी गहराता जाएगा। (Redevelopment has become a problem in Mumbai for the common man, rent has broken records)