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  • Mumbai: दही हांडी उत्सव के दौरान एक की मौत 30 घायल, 15 अस्पताल में भर्ती

    Mumbai: दही हांडी उत्सव के दौरान एक की मौत 30 घायल, 15 अस्पताल में भर्ती

    मुंबई शहर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर दही हांडी उत्सव के दौरान कई जगहों पर गोविदा पथक हादसों के शिकार हो गए हैं। इनमें से एक की मौत और 30 घायलों की जानकारी मिल रही है।

    मुंबई: शनिवार 16 अगस्त, कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुंबई में एक की मौत 30 घायल और 15 गोविदा का अस्पताल में इलाज चल रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक, मानखुर्द में दही हांडी बांधते समय एक 32 वर्षीय व्यक्ति की गिरकर मौत हो गई है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में दही हंडी फोड़ने के चक्कर में 30 गोविंदा घायल हो गए, जिनमें से से 15 लोगों को अस्पताल भर्ती कराया गया है। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival

    Mumbai बीएमसी के अधिकारियों क्या कहा?

    मुंबई के उपनगर मानखुर्द में शनिवार दोपहर एक 32 वर्षीय ‘गोविंदा’ की दही हांडी बांधते समय गिरने से मौत हो गई। जबकि शहर के अलग-अलग हिस्सों में मानव पिरामिड बनाते समय 30 अन्य गोविंदा घायल हो गए। बृहन्मुंबई महानगर पालिका के अधिकारियों ने कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर इसकी जानकारी दी।

    पहली मंजिल से गिर कर मौत

    मानखुर्द के महाराष्ट्र नगर मे मृत व्यक्ति की पहचान जगमोहन शिवकिरण चौधरी के रूप में हुई है। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि जगमोहन अपने घर की पहली मंजिल की खिड़की की ग्रिल से एक रस्सी पर दही हांडी यानी दही से भरी हुई मिट्टी की मटकी बांध रहा था। इसी दौरान वह अचानक नीचे गिर पड़ा। चौधरी को तुरंत नगरपालिका द्वारा संचालित शताब्दी गोवंडी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival

    कहां-कहां हुई घटना?

    मुंबई, ठाणे और आस-पास के इलाकों में भारी बारिश के बीच मनाए गए इस वर्ष के दही हांडी उत्सव में 30 गोविंदा घायल हुए हैं। इनमें से 15 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी घायलों का इलाज कर छुट्टी दे दी गई। अधिकारियों के अनुसार, इन 30 घायलों में 18 दक्षिण मुंबई से हैं, जबकि 6-6 लोग शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों से हैं।

    आस्था और भक्ति भाव

    दही हांडी का त्योहार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे महाराष्ट्र में मनाया जाता है। इसमें ‘गोविंदाओं’ की टीमें इंसानी पिरामिड बनाकर मटकी तक पहुंचने और उसे फोड़ने की कोशिश करते हैं। इसी दौरान कई हादसे होते रहते हैं लेकिन आस्था और भक्ति भाव में गोविंदा पथक इस प्रथा को बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाते आ रहे हैं। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival

  • आईटी मंत्रालय ने न्यूज़ एजंसी के पोस्ट पर लगाई रोक, बाद में बदला अपना बयान

    आईटी मंत्रालय ने न्यूज़ एजंसी के पोस्ट पर लगाई रोक, बाद में बदला अपना बयान

    एक्स ने आईटी मंत्रालय के बयान का खंडन करते हुए कहा कि सरकार ने रॉयटर्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया था। इन अवरुद्ध आदेशों के कारण भारत में चल रही प्रेस सेंसरशिप के बारे में गहराई से चिंतित है।

    ब्रिटिश न्यूज़वायर एजेंसी के दो एक्स हैंडल 5 जुलाई की देर रात ब्लॉक कर दिए गए थे; आईटी मंत्रालय ने कहा था कि इसके लिए “कोई ज़रूरत नहीं” थी। एक्स ने कहा कि उसे 3 जुलाई को हैंडल ब्लॉक करने का आदेश दिया गया था।

    केंद्र सरकार का बयान

    केंद्र सरकार के बयान का खंडन करते हुए, एक्स (पूर्व में ट्विटर) ने मंगलवार (8 जुलाई, 2025) को एक बयान में कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने वास्तव में फर्म से 2,000 से अधिक अन्य खातों के अलावा, समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हैंडल तक पहुंच को अवरुद्ध करने का अनुरोध किया था।

    कानूनी चुनौती

    एक्स ने कहा कि वह “इन कार्यकारी आदेशों के खिलाफ कानूनी चुनौतियां लाने की अपनी क्षमता में भारतीय कानून द्वारा प्रतिबंधित है” और “इन अवरुद्ध आदेशों के कारण भारत में चल रही प्रेस सेंसरशिप के बारे में गहराई से चिंतित है”।

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    आईटी मंत्रालय का इलादा

    लेकिन, आईटी मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने जवाब दिया कि सरकार ने 3 जुलाई, 2025 को कोई नया अवरोधन आदेश जारी नहीं किया है, और इसका रॉयटर्स और रॉयटर्सवर्ल्ड सहित किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल को अवरुद्ध करने का कोई इरादा नहीं है।

    एक घंटे के भीतर कार्रवाई की मांग

    एक्स का कहना है, कि 2,355 अकाउंट को ब्लॉक करने का आदेश 3 जुलाई, 2025 को जारी किया गया था, जिसमें “एक घंटे के भीतर” कार्रवाई करने की मांग की गई थी। घटना में, ऐसा प्रतीत हुआ कि प्लेटफ़ॉर्म ने शनिवार (5 जुलाई, 2025) की देर शाम को ही अनुरोध पर कार्रवाई की। ब्लॉक किए गए हैंडल में @Reuters और @ReutersWorld शामिल थे, जो प्लेटफ़ॉर्म पर ब्रिटिश न्यूज़वायर एजेंसी के लेखों को क्यूरेट करते हैं। रॉयटर्स और विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय के प्रवक्ताओं ने उस समय द हिंदू की टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया।

    एक्स ने यह भी कहा, कि “जनता के आक्रोश के बाद सरकार ने एक्स से @Reuters और @ReutersWorld को अनब्लॉक करने का अनुरोध किया।”

    आईटी मंत्रालय ने क्या कहा?

    आईटी मंत्रालय ने रविवार (6 जुलाई, 2025) दोपहर को एक बयान जारी कर कहा, “भारत सरकार को रॉयटर्स हैंडल को बंद करने की कोई आवश्यकता नहीं है,” और यह “समस्या को हल करने के लिए एक्स के साथ लगातार काम कर रहा है।” बाद में उसी दिन, हैंडल को अनब्लॉक कर दिया गया।

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    आईटी मंत्रालय ने जवाब दिया

    “सरकार ने 3 जुलाई, 2025 को कोई नया ब्लॉकिंग आदेश जारी नहीं किया है और रॉयटर्स और रॉयटर्सवर्ल्ड सहित किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल को ब्लॉक करने का कोई इरादा नहीं है,” आईटी मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक्स की पोस्ट के बाद मंगलवार (8 जुलाई, 2025) को एक नए बयान में कहा।

    सरकारी गतिविधि क्या रही?

    “जैसे ही भारत में रॉयटर्स और रॉयटर्सवर्ल्ड को एक्स प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक किया गया, सरकार ने तुरंत ‘एक्स’ को उन्हें अनब्लॉक करने के लिए लिखा। सरकार ने 5 जुलाई 2025 की देर रात से लगातार ‘एक्स’ के साथ बातचीत की और सख्ती से प्रयास किया। ‘एक्स’ ने अनावश्यक रूप से प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी बातों का फायदा उठाया और यूआरएल को अनब्लॉक नहीं किया। हालांकि, हर घंटे के आधार पर बहुत सारे फॉलोअप के बाद, एक्स ने आखिरकार 6 जुलाई 2025 को रात 9 बजे के बाद रॉयटर्स और अन्य यूआरएल को अनब्लॉक कर दिया। रॉयटर्स को अनब्लॉक करने में उन्हें 21 घंटे से अधिक का समय लगा।”

    एक्स ने कहा, “अनुपालन न करने पर आपराधिक दायित्व का जोखिम था [और आदेशों के अनुसार] खातों को अगली सूचना तक अवरुद्ध रखा जाना आवश्यक था।”

  • बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी देने की प्रथा पर शक्ति प्रयोग क्यों?

    बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी देने की प्रथा पर शक्ति प्रयोग क्यों?

    • मंदिरों में बलि देने की परंपरा को बंद कर उदाहरण प्रस्तुत करे सरकार
    • सुप्रीम कोर्ट के आदेश स्वीकार कर मुसलमानों ने नजीर पेश की
    • भारतीय संविधान कानून और न्यायालय में विश्वास रखते हैं भारत के मुसलमान

    डिजिटल डेस्क
    हिंदू हिंदुत्व के ठेकेदार बनने वाले आरएसएस के उपांग बीजेपी, विश्वहिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे संगठन भारत के मुसलमानों द्वारा बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी देने की प्रथा बंद करने के लिए शक्ति प्रयोग करने से भी पीछे नहीं हट रहे। उन्हें सबसे पहले हिंदुओं के जिन मंदिरों में जानवरों की बलि देकर उस मांस को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। उन मंदिरों में बलि देने की परंपरा को बंद कर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। पहले सत्तर प्रतिशत हिंदुओं के मांस खाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। फिर मुसलमानों के बकरा बलि को कानून बनाकर रोका जा सकता है। निश्चित ही भारत के मुसलमान इसे स्वीकार करेंगे क्योंकि देश में समानता का व्यवहार माना जाएगा। बाबरी राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीमकोर्ट के आदेश को स्वीकार कर मुसलमानों ने नजीर पेश की थी।
    अर्थ है
    भारत के मुसलमान भारतीय संविधान कानून और न्यायालय में विश्वास रखते हैं। अगर संसद ऐसा कानून बनाती है जिसमें किसी भी पशु की बलि यानी हत्या अपराध होगा जिसपर कानूनी अपराध मानकर कोर्ट दंडित करेगी तो निश्चित ही भारत के मुसलमान इससे सहमत होंगे। जहां तक देशप्रेम और देशभक्ति का सवाल है। उसमें भी मुसलमानों ने एकता का प्रदर्शन, पाकिस्तान के विरोध में पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाकर पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारतीय सेना और सरकार के साथ खड़े रहे हैं। यहां तक कि मुस्लिम महिला द्वारा ही भारतीय सेना ने सिंदूर ऑपरेशन का नायक बनाया था। प्रेस कांफ्रेंस में भी मुस्लिम और दलित चेहरा सामने लाकर बता दिया था कि भारतीय सेना जाति मजहब को नहीं मानती।वह भारत की रक्षा के लिए अपनी शहादत देती है।
    सेना ने प्रतीकात्मक रूप से संदेश दिया था कि मुसलमानों और दलितों पर अन्याय अत्याचार बंद कर देना होगा। भारत के जिन ग्रुपों को पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर का सच बताने विदेश भेजा गया था उसमें मुस्लिम चेहरा इस्लामिक राष्ट्रों में जबरदस्त संदेश देकर बता दिया कि पाकिस्तान बार बार अपने आतंकी भेजकर भारत में निर्दोष लोगों की हत्या करवाता है। जिससे साफ है कि देश का मुसलमान देश की हिफाजत के लिए पाकिस्तान हो या कोई अन्य राष्ट्र भारत का मुसलमान बलिदान देने को तैयार है। एकजुटता दिखने में मुसलमान पीछे नहीं हटे।
    पहले हिंदूधर्म और अब सनातनधर्म के ठेकेदारों को मालूम होना चाहिए कि सनातन धर्म में किसी भी जीव की हत्या का निषेध करता है।सत्य, प्रेम न्याय और पुण्य को धर्म जानना मानना ही सनातन धर्मी का संकेत है।
    गौ को माता मानने वाले क्यों नहीं उन चार हिंदू जिनके भारत में बड़े बड़े कत्लखाने हैं। जहां लाखों गाएं रोज काटकर उनका मांस विदेश भेजने वाले देशों में दूसरे नंबर पर लाकर खड़ा कर दिया है। जिनसे हिंदुत्व और हिंदू की ठेकेदार बीजेपी सरकार चंदा लेने में संकोच नहीं करती, उन कारखानों को बंद कराने क्यों नहीं जाते? इसलिए कि मोदी सरकार उनके साथ खड़ी है।
    योगीजी क्यों नहीं उन कत्ल खानों में गौ का कटना बंद करा देते? हिम्मत नहीं पड़ती गौ भक्ति की आड में जो बजरंगदल खुद गौ काटकर पूजा स्थल में फेकने पर पकड़े जा चुके हैं। जो गौ मांस होने का शक केवल गरीब मुसलमानों पर कहर बनकर टूट पड़ते और उनकी हत्या का अपराध करने में नहीं झिझकते भला वे कैसे हिंदू और सनातनी होते हैं।
    सनातन धर्म तो समानता और न्याय का धर्म है फिर मॉब लांचिंग क्यों करते हैं? हत्या करना अपराध तो है ही पाप भी है। क्या उन्हें पाप करते शर्म आती है कभी? फिर किस मुंह से वे हिंदू और सनातनी कहते हैं। कभी खुद के हृदय में झांककर तो देखें। अगर उनकी आत्मा मरी नहीं होगी तो जवाब भीतर से ही मिल जायेगा।
    छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापति मुसलमान, नौ सेना प्रमुख मुसलमान थे।महाराणा प्रताप के सेनापति मुसलमान थे।उन्होंने अपनी जान पर खेलकर महाराणा प्रताप के प्राण बचाए थे, जबकि मुगल सम्राट अकबर के सेनापति जयपुर के राजा मानसिंह ने हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की हत्या करने की कोशिश की थी। जयपुर के ही जयसिंह ने औरंगज़ेब की गुलामी की थी और उसका सेनापति बनकर शिवाजी के ऊपर हमला किया और उन्हें बंदी बनाकर उनसे तीस किले मुगलों को सौंपने का समझौता करने को बाध्य किया। आगरा दरबार में लेजाकर शिवाजी की बेइज्जती कराई। मानसिंह और जयसिंह जैसे हिंदू और हिंदुत्व के शत्रुओं के परिजनों को सम्मान देने वाले कैसे किसी को गद्दार होने का सार्टिफिकेट दे सकते हैं?
    क्या जिन नेताओं की बहन बेटियों को मुगलों से शादी कराई गई और बाद में नेताओं ने अपनी बेटियां भतीजियां मुसलमानों से ब्याह दी वे किस मुंह से हिन्दू और सनातन शब्द बोलते हैं? जो लोग हत्या को अपराध और पाप मानते हैं खुद महात्मा गांधी के हत्यारे नाथु राम गोडसे को पूजते हैं। भारत बंटवारे के झूठे आरोप में महात्मा गांधी की हत्या करने वाला क्यों नहीं मोहम्मद अली जिन्ना जिसने अंग्रेजों से मिलकर देश को बांटा उसकी हत्या करने की मर्दानगी दिखाई?
    सच तो यह है कि जर्मन तानाशाह हिटलर के नाज़ीवाद और इटली के तानाशाह मुसोलिनी के फासीवाद को अपना आदर्श मानने वालों से शांति की उम्मीद कैसे रखी जा सकती है। वे भला सनातनधर्म की सहिष्णुता का पालन कैसे कर सकते हैं? सनातनधर्म में नफरत के लिए कोई भी स्थान नहीं है फिर हिंदू मुस्लिम करके वोट की राजनीति करने वालों से प्रेम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

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