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    Land Compensation Scam: Borivali में ₹60 करोड़ घोटाले का खुलासा

    Mumbai Land Compensation Scam में EOW ने ₹60.30 करोड़ के फर्जीवाड़े का खुलासा किया। Borivali जमीन अधिग्रहण केस में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप।

    मुंबई: यहां शहर में जमीन अधिग्रहण से जुड़े करोड़ों रुपये के मुआवजा घोटाले ने प्रशासनिक सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई पुलिस की Economic Offences Wing यानी EOW ने Borivali इलाके में करीब ₹60.30 करोड़ के कथित Land Compensation Scam का खुलासा किया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक सरकारी रिकॉर्ड में कथित तौर पर फर्जी बदलाव कर असली जमीन मालिकों की जगह दूसरे व्यक्ति को लाभार्थी दिखाया गया और फिर सरकारी मुआवजे की रकम निकाल ली गई।

    इस मामले में एक पूर्व भूमि अधिग्रहण अधिकारी, एक निजी व्यक्ति और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पहले यह मामला Kherwadi Police Station में दर्ज हुआ था, लेकिन रकम और सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गंभीरता को देखते हुए जांच EOW को सौंप दी गई।

    Land Compensation Scam में क्या है पूरा मामला

    EOW की FIR के अनुसार यह मामला Borivali गांव के Survey Number 456, 458 और 458 (1 से 10) से जुड़ा हुआ है। ये जमीनें मूल रूप से Devrukhkar परिवार और उनके कानूनी वारिसों की बताई जा रही हैं।

    जांच में सामने आया है कि कथित साजिश के तहत सरकारी दस्तावेजों में बदलाव कर Suresh Devendra Dyanmothe उर्फ Jhanamote का नाम लाभार्थी के रूप में जोड़ा गया। आरोप है कि यह काम फर्जी Power of Attorney और नकली दस्तावेजों के जरिए किया गया।

    सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव के आरोप

    शिकायत पश्चिम उपनगर विभाग, बांद्रा के Sub-Divisional Officer Prashant Subhash Dhage की तरफ से दर्ज कराई गई। FIR में कहा गया है कि रिकॉर्ड में बदलाव कर जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

    जांच एजेंसियों के मुताबिक:

    • फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए
    • लाभार्थी के नाम में बदलाव किया गया
    • सरकारी सत्यापन प्रक्रिया को कथित तौर पर दरकिनार किया गया
    • मुआवजे की रकम गलत खातों में ट्रांसफर की गई

    मुंबई जैसे शहर में जहां जमीन की कीमतें बेहद ऊंची हैं, वहां इस तरह के रिकॉर्ड मैनिपुलेशन को गंभीर आर्थिक अपराध माना जा रहा है।

    Land Compensation Scam में क्या है पूरा मामला

    ₹60.30 करोड़ का मुआवजा कैसे हुआ जारी

    आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 20 जनवरी 2020 को भूमि अधिग्रहण का अवॉर्ड घोषित किया गया था। इसके बाद कुल ₹60,30,75,052 की राशि जारी की गई।

    EOW को शक है कि यह रकम असली जमीन मालिकों तक पहुंचने के बजाय आरोपियों तक पहुंचाई गई। इससे सरकार को आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ असली जमीन मालिकों को भी भारी वित्तीय हानि हुई।

    किन धाराओं में केस दर्ज हुआ

    मामले में IPC की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें शामिल हैं:

    • धारा 409 – सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात
    • धोखाधड़ी से संबंधित धाराएं
    • Forgery और Fake Documents तैयार करने की धाराएं

    इसके अलावा Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 के प्रावधान भी लागू किए गए हैं।

    EOW अब किन पहलुओं की जांच कर रही है

    Economic Offences Wing अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों को शक है कि इसमें सिर्फ एक-दो लोग नहीं बल्कि कई स्तरों पर मिलीभगत हो सकती है।

    जांच में इन बिंदुओं पर फोकस

    बैंक ट्रांजैक्शन की फॉरेंसिक जांच

    EOW अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि करोड़ों रुपये आखिर किन खातों में गए और बाद में उनका इस्तेमाल कैसे हुआ।

    डिजिटल रिकॉर्ड की जांच

    भूमि रिकॉर्ड, सरकारी फाइलें, ऑनलाइन एंट्री और दस्तावेजों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

    सरकारी अधिकारियों की भूमिका

    जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या अन्य सरकारी अधिकारी, दस्तावेज एजेंट या प्राइवेट बिचौलिए भी इस कथित घोटाले में शामिल थे।

    Mumbai Land Fraud Cases क्यों बढ़ रहे हैं

    मुंबई और उसके उपनगरों में जमीन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। Borivali, Goregaon, Kandivali और Dahisar जैसे इलाकों में सरकारी अधिग्रहण और redevelopment प्रोजेक्ट्स के कारण बड़ी रकम का लेनदेन होता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि:

    • पुराने जमीन रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन अधूरा है
    • कई जमीनों पर उत्तराधिकार विवाद हैं
    • Fake Power of Attorney का इस्तेमाल बढ़ा है
    • Verification system में loopholes मौजूद हैं

    इसी वजह से Land Compensation Scam जैसे मामले सामने आते रहते हैं।

    Google Search में लोग क्या जानना चाह रहे हैं

    इस मामले के सामने आने के बाद लोग खासतौर पर ये सवाल सर्च कर रहे हैं:

    • Borivali land scam क्या है?
    • Mumbai EOW latest case
    • Land compensation fraud कैसे होता है?
    • Fake power of attorney fraud क्या है?
    • Government land acquisition compensation rules
    • Mumbai property fraud news today

    इन queries से साफ है कि लोगों की रुचि सिर्फ क्राइम न्यूज़ में नहीं बल्कि जमीन और सरकारी मुआवजा प्रक्रिया को समझने में भी है।

    Land Acquisition Process में क्या होती है सबसे बड़ी कमजोरी

    विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या ownership verification की है। कई मामलों में:

    • पुराने रिकॉर्ड अपडेट नहीं होते
    • वारिसों के नाम समय पर दर्ज नहीं होते
    • एजेंट और बिचौलिए loopholes का फायदा उठाते हैं
    • Manual verification पर ज्यादा निर्भरता रहती है

    अगर audit trail और digital verification मजबूत न हो तो करोड़ों रुपये का fraud संभव हो जाता है।

    मुंबई में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

    मुंबई और महाराष्ट्र में पहले भी redevelopment, slum rehabilitation और land acquisition से जुड़े fraud cases सामने आ चुके हैं। EOW और Anti-Corruption agencies लगातार ऐसे मामलों की जांच कर रही हैं।

    हालांकि इस केस में रकम ₹60 करोड़ से ज्यादा होने के कारण इसे हाल के बड़े compensation fraud मामलों में माना जा रहा है।

    FAQ Section

    Land Compensation Scam क्या होता है?

    जब जमीन अधिग्रहण के दौरान फर्जी दस्तावेज या गलत रिकॉर्ड के जरिए सरकारी मुआवजा गलत लोगों को दिलाया जाता है, उसे Land Compensation Scam कहा जाता है।

    इस मामले की जांच कौन कर रहा है?

    इस मामले की जांच मुंबई पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) कर रही है।

    Borivali केस में कितनी रकम का घोटाला सामने आया?

    जांच एजेंसियों के मुताबिक लगभग ₹60.30 करोड़ के मुआवजे में कथित गड़बड़ी सामने आई है।

    क्या सरकारी अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं?

    हाँ। FIR में एक पूर्व भूमि अधिग्रहण अधिकारी का नाम शामिल है और अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है।

    Fake Power of Attorney कैसे इस्तेमाल होती है?

    कई मामलों में नकली पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर जमीन के अधिकार या मुआवजा राशि पर अवैध दावा किया जाता है।

    Conclusion

    Borivali Land Compensation Scam ने एक बार फिर दिखा दिया है कि मुंबई जैसे हाई-वैल्यू रियल एस्टेट मार्केट में सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कितना बड़ा आर्थिक अपराध बन सकता है। EOW की जांच अब सिर्फ दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल रिकॉर्ड और संभावित नेटवर्क की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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  • Mumbai Scam: वर्सोवा रिडेवलपमेंट घोटाले में 55 करोड़ की ठगी, कोल्हापुर का डेवलपर गिरफ्तार

    Mumbai Scam: वर्सोवा रिडेवलपमेंट घोटाले में 55 करोड़ की ठगी, कोल्हापुर का डेवलपर गिरफ्तार

    Mumbai Versova Redevelopment Scam – EOW ने 55 करोड़ रुपये के हाउसिंग फ्रॉड मामले में कोल्हापुर के डेवलपर Amrut Mahendrakar को गिरफ्तार किया। Versova building redevelopment के नाम पर फ्लैट गिरवी रखकर और बेचकर की गई बड़ी ठगी का खुलासा।

    मुंबई: मुंबई में Versova redevelopment scam से जुड़ा बड़ा खुलासा सामने आया है। शहर की Economic Offences Wing (EOW) – Mumbai Police ने 55 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में कोल्हापुर के एक डेवलपर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि Versova, Andheri स्थित एक पुराने बिल्डिंग के पुनर्विकास (redevelopment project) के नाम पर समाज के सदस्यों के फ्लैट्स को उनकी अनुमति के बिना mortgage और sale कर दिया गया। पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले में फर्जी दस्तावेज, नकली एग्रीमेंट और जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन लिया गया।

    EOW ने कोल्हापुर के डेवलपर को किया गिरफ्तार

    मुंबई पुलिस की EOW Housing Unit ने इस मामले में Amrut Uttam Mahendrakar (34) को गिरफ्तार किया है। महेंद्रकर कोल्हापुर जिले के Ichalkaranji का रहने वाला है।

    पुलिस के मुताबिक वह इस पूरे real estate fraud case में मुख्य आरोपी की मदद कर रहा था। उस पर आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और फ्लैट्स की अवैध बिक्री व मॉर्गेज प्रक्रिया को आसान बनाने में अहम भूमिका निभाई

    पहले भी हो चुकी है एक आरोपी की गिरफ्तारी

    इस मामले में इससे पहले भी पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। अगस्त 2025 में पुलिस ने Amarjit Shukla को गिरफ्तार किया था, जो Mid City Heights नाम की कंपनी का मालिक बताया गया है।

    पुलिस के अनुसार Mahendrakar इस केस में गिरफ्तार किया गया दूसरा आरोपी है और जांच में अभी और लोगों के शामिल होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

    Versova की हाउसिंग सोसाइटी ने दर्ज कराई थी शिकायत

    यह मामला Versova Police Station में दर्ज किया गया था। शिकायत Meena Singh Thilon (71) ने दर्ज कराई थी, जो Zakaria Aghadi Nagar No.3 Co-operative Housing Society से जुड़ी हैं।

    जानकारी के मुताबिक इस सोसाइटी ने 2015 में Midcity Heights Partnership Firm को अपनी पुरानी बिल्डिंग के redevelopment project के लिए नियुक्त किया था।

    13 परिवारों को नए घर देने का दिया गया था वादा

    डेवलपर कंपनी ने सोसाइटी के 13 निवासियों, जिनके पास कुल 14 फ्लैट थे, उन्हें तय समय सीमा के भीतर नए फ्लैट देने का भरोसा दिया था।

    लेकिन जब प्रोजेक्ट आगे बढ़ा तो सोसाइटी के सदस्यों को शक हुआ कि Permanent Alternate Accommodation Agreement (PAAA) के तहत उन्हें मिलने वाले फ्लैट्स के साथ धोखाधड़ी हो रही है।

    बिना अनुमति फ्लैट्स को गिरवी रखकर बेच दिया गया

    जांच के दौरान सामने आया कि सोसाइटी के सदस्यों को मिलने वाले कई फ्लैट्स को उनकी अनुमति के बिना ही बैंकों के पास गिरवी (mortgage) रखा गया

    इतना ही नहीं, इन्हीं फ्लैट्स को तीसरे पक्ष (third parties) को बेचने के भी आरोप लगे हैं। इससे सोसाइटी के सदस्यों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

    फर्जी दस्तावेज और नकली स्टैम्प का इस्तेमाल

    पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी Amarjit Shukla और उसके साथियों ने कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए

    इनमें कथित तौर पर:

    • Fake agreements for sale
    • Joint Deputy Registrar के जाली हस्ताक्षर
    • Counterfeit stamps और forged paperwork

    का इस्तेमाल किया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर कई बैंकों से करोड़ों रुपये के लोन उठाए गए, जिससे कुल ठगी का आंकड़ा लगभग ₹55 करोड़ तक पहुंच गया।

    जांच में सामने आ सकते हैं और बड़े खुलासे

    EOW अधिकारियों के मुताबिक यह मामला Mumbai real estate fraud के बड़े मामलों में से एक हो सकता है।

    पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस Versova redevelopment scam में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और कितने बैंक या वित्तीय संस्थान इस फर्जीवाड़े का शिकार हुए हैं।


    FAQ (Frequently Asked Questions)

    1. वर्सोवा रिडेवलपमेंट घोटाला क्या है?

    यह एक real estate fraud case है जिसमें redevelopment के नाम पर सोसाइटी के फ्लैट्स को बिना अनुमति गिरवी रखकर और बेचकर करीब ₹55 करोड़ की ठगी की गई।

    2. इस मामले में किसे गिरफ्तार किया गया है?

    Amrut Uttam Mahendrakar, जो कोल्हापुर जिले के इचलकरंजी का निवासी है।

    3. पहले किस आरोपी को गिरफ्तार किया गया था?

    इस केस में पहले Amarjit Shukla, Mid City Heights का मालिक, गिरफ्तार किया गया था।

    4. शिकायत किसने दर्ज कराई थी?

    शिकायत Meena Singh Thilon (71) ने Versova पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी।

    5. सोसाइटी का नाम क्या है?

    Zakaria Aghadi Nagar No.3 Co-operative Housing Society