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  • मालाड में 75 वर्षीय बुजुर्ग से ₹8.59 लाख की Cyber Fraud ठगी, Fake Gas Company बनकर WhatsApp से किया जाल

    मालाड में 75 वर्षीय बुजुर्ग से ₹8.59 लाख की Cyber Fraud ठगी, Fake Gas Company बनकर WhatsApp से किया जाल

    Malad East में Senior Citizen को WhatsApp APK Scam के जरिए ₹8.59 लाख की ठगी। Fake MGL Gas Agents बनकर Cyber Fraud, Dindoshi Police ने दर्ज किया केस। जानें पूरा मामला और बचाव के तरीके।

    मुंबई: मालाड इलाके से एक बड़ा Cyber Fraud Scam सामने आया है, जहां एक 75 वर्षीय रिटायर्ड बुजुर्ग को Fake Gas Company Agents ने ₹8.59 लाख का चूना लगा दिया। आरोपी खुद को MGL Gas का अधिकारी बताकर WhatsApp के जरिए संपर्क में आए और फिर APK फाइल भेजकर पूरा खेल कर गए।

    📍 घटना कहां और कब हुई

    यह पूरा मामला Malad East के महेंद्र नगर का है। पुलिस के मुताबिक, यह घटना 12 मार्च 2026 को शाम 7:03 बजे से रात 9:17 बजे के बीच हुई, जब पीड़ित अपने घर पर ही मौजूद थे।

    📱 WhatsApp से शुरू हुआ Scam

    पीड़ित को एक अनजान नंबर से WhatsApp मैसेज आया। मैसेज में खुद को MGL Gas अधिकारी बताकर कहा गया कि उनके गैस कनेक्शन का तुरंत अपडेट जरूरी है।
    इसके बाद आरोपियों ने अलग-अलग WhatsApp नंबरों का इस्तेमाल करते हुए भरोसा जीत लिया।

    ⚠️ APK File बना सबसे बड़ा जाल

    फ्रॉडस्टर्स ने पीड़ित को एक malicious APK file भेजी, जिसे “MGL App” बताया गया।
    जैसे ही बुजुर्ग ने यह ऐप इंस्टॉल किया, आरोपियों को मोबाइल का एक्सेस मिल गया।

    💳 बैंक डिटेल्स लेकर उड़ा दिए पैसे

    ऐप इंस्टॉल होने के बाद आरोपियों ने बुजुर्ग और उनकी पत्नी को डराकर और बहला-फुसलाकर उनसे

    • बैंक अकाउंट डिटेल्स
    • डेबिट कार्ड जानकारी

    ले ली।
    इसके बाद ₹8.59 लाख की रकम कई अलग-अलग अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दी गई।

    🚓 पुलिस ने दर्ज किया मामला

    इस मामले में Dindoshi Police Station में FIR दर्ज की गई है। केस में

    • Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धाराएं
    • IT Act की Section 66(a) और 66(d)

    लगाई गई हैं। फिलहाल आरोपी फरार हैं और पुलिस डिजिटल ट्रेल खंगाल रही है।

    🛑 पुलिस की अपील (Cyber Safety Tips)

    मुंबई पुलिस ने खासकर Senior Citizens को सावधान रहने की सलाह दी है:

    • Unknown APK files कभी डाउनलोड न करें
    • WhatsApp पर आए किसी भी लिंक/ऐप पर भरोसा न करें
    • किसी को भी Bank Details शेयर न करें
    • Gas/Bank Verification के नाम पर कॉल आए तो Official Website से ही चेक करें

    🔗 Useful Links (Cyber Safety & Complaint)


    ❓ FAQ (Frequently Asked Questions)

    Q1. APK Scam क्या होता है?
    APK Scam में फ्रॉडस्टर नकली ऐप भेजते हैं, जिससे मोबाइल का कंट्रोल उनके पास चला जाता है।

    Q2. क्या WhatsApp पर आए ऐप सुरक्षित होते हैं?
    नहीं, अनजान नंबर से आए APK या लिंक बेहद खतरनाक हो सकते हैं।

    Q3. अगर मेरे साथ ऐसा हो जाए तो क्या करें?
    तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

    Q4. MGL या किसी कंपनी का असली मैसेज कैसे पहचानें?
    हमेशा Official Website या Customer Care नंबर से ही पुष्टि करें।

  • कांदिवली में मोबाइल छीनकर UPI से ₹76,269 उड़ाए

    कांदिवली में मोबाइल छीनकर UPI से ₹76,269 उड़ाए

    मुंबई के कांदिवली वेस्ट में मोबाइल स्नैचिंग के बाद साइबर फ्रॉड का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां चोरी हुए फोन से युवक के बैंक खाते से ₹76,269 UPI ट्रांजैक्शन कर निकाल लिए गए। पुलिस जांच में जुटी है।

    मुंबई: मोबाइल स्नैचिंग के बाद डिजिटल ठगी का नया और खतरनाक ट्रेंड सामने आ रहा है। कांदिवली वेस्ट में एक युवक का मोबाइल फोन छीने जाने के बाद उसी फोन का UPI इस्तेमाल कर आरोपियों ने उसके बैंक खाते से ₹76,269 निकाल लिए। इतना ही नहीं, चोरों ने व्हाट्सऐप पर खुद को पीड़ित बताकर रिश्तेदार से भी पैसे मंगवा लिए। कांदिवली पुलिस ने मोबाइल स्नैचिंग और साइबर फ्रॉड का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई में बढ़ती मोबाइल स्नैचिंग और UPI द्वारा डिजिटल फ्रॉड की वारदातें

    देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अब सड़क पर मोबाइल छीनना ही अपराधियों का मकसद नहीं रह गया है। मोबाइल हाथ लगते ही वे सीधे डिजिटल बैंकिंग और UPI के जरिए खातों पर हाथ साफ कर रहे हैं। कांदिवली की यह घटना इसी बढ़ते साइबर क्राइम पैटर्न की एक बड़ी मिसाल है, जिसने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    पीड़ित कौन है और क्या करता है?

    पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता का नाम अंकितकुमार वैकुंठ तिवारी (24) है। वह टीवी सीरियल इंडस्ट्री में लाइट मैन के तौर पर काम करता है।
    12 जनवरी 2026 की रात कांदिवली वेस्ट के भूत बंगला, गार्डन रिट्रीट कॉम्प्लेक्स में एक सीरियल का प्रोमो शूट चल रहा था, जो 13 जनवरी तड़के करीब 3 बजे खत्म हुआ।

    सुबह-सुबह हुआ मोबाइल स्नैचिंग का शिकार

    शूट खत्म होने के बाद अंकितकुमार अपने पॉइंसुर इलाके स्थित घर की ओर पैदल जा रहा था।
    करीब सुबह 4:05 बजे, शताब्दी अस्पताल के पास अचानक बाइक पर सवार दो अज्ञात युवकों ने उसके हाथ से मोबाइल फोन झपट लिया और तेज़ रफ्तार में फरार हो गए।
    अंधेरा और बाइक की रफ्तार इतनी तेज़ थी कि वह वाहन का नंबर तक नोट नहीं कर पाया।

    ATM पहुंचा तो खुला खाते से पैसे उड़ने का राज

    घटना के अगले दिन जब अंकितकुमार ATM गया, तो उसे मैसेज मिला कि उसका ATM PIN गलत है।
    इसके बाद 15 जनवरी को वह बैंक शाखा पहुंचा, जहां अकाउंट स्टेटमेंट देखने पर उसके होश उड़ गए।
    13 से 15 जनवरी के बीच UPI ट्रांजैक्शन के ज़रिए ₹69,269 उसके खाते से निकाले जा चुके थे।

    व्हाट्सऐप पर भावुक मैसेज भेजकर रिश्तेदार से भी पैसे ठगे

    आरोपियों की चालाकी यहीं नहीं रुकी।
    चोरी किए गए मोबाइल से उन्होंने अंकितकुमार बनकर उसके बहनोई पवन मिश्रा को व्हाट्सऐप पर भावुक मैसेज भेजे और पैसों की मदद मांगी।
    मैसेज असली समझकर पवन मिश्रा ने ₹8,000 ट्रांसफर कर दिए, जिसे भी आरोपियों ने तुरंत निकाल लिया।
    इस तरह कुल रकम ₹76,269 हो गई।

    पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा

    कांदिवली पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ

    • मोबाइल स्नैचिंग
    • साइबर फ्रॉड
      की धाराओं में केस दर्ज किया है।

    पुलिस आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाल रही है और मोबाइल के IMEI नंबर के ज़रिए फोन की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।

    पुलिस की अपील: ऐसे रखें खुद को सुरक्षित

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुंबई में मोबाइल छीने जाने के बाद डिजिटल ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
    लोगों से अपील की गई है कि:

    • मोबाइल में मजबूत लॉक/बायोमेट्रिक जरूर रखें
    • बैंकिंग और UPI ऐप्स में अतिरिक्त सिक्योरिटी ऑन रखें
    • किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें
    • मोबाइल चोरी होते ही बैंक और पुलिस को सूचना दें

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: यह घटना कहां हुई?
    👉 मुंबई के कांदिवली वेस्ट इलाके में, शताब्दी अस्पताल के पास।

    Q2: कुल कितने पैसे निकाले गए?
    👉 कुल ₹76,269।

    Q3: पैसे किस तरह निकाले गए?
    👉 UPI ट्रांजैक्शन और व्हाट्सऐप ठगी के ज़रिए।

    Q4: पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है?
    👉 CCTV फुटेज की जांच और IMEI नंबर से मोबाइल ट्रेस किया जा रहा है।

    Q5: मोबाइल चोरी होने पर क्या करें?
    👉 तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं और बैंक/UPI सेवाएं ब्लॉक करवाएं।

  • महाभारत के युधिष्ठिर साइबर ठगी के शिकार, मुंबई पुलिस ने बचाए ₹98 हजार

    महाभारत के युधिष्ठिर साइबर ठगी के शिकार, मुंबई पुलिस ने बचाए ₹98 हजार

    महाभारत फेम अभिनेता गजेंद्र चौहान साइबर फ्रॉड का शिकार हुए। फेसबुक विज्ञापन के जरिए ₹98 हजार की ठगी हुई, लेकिन मुंबई पुलिस की तत्परता से पूरी रकम वापस मिली।

    मुंबई: टीवी धारावाहिक महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभाकर घर-घर पहचान बनाने वाले अभिनेता गजेंद्र सिंह चौहान साइबर ठगी का शिकार हो गए। फेसबुक पर दिखे एक फर्जी विज्ञापन के झांसे में आकर उनके बैंक खाते से ₹98,000 कट गए। हालांकि, ओशिवारा पुलिस की साइबर सेल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरी रकम कुछ ही समय में अभिनेता के खाते में वापस करा दी।

    📍 कैसे हुआ साइबर फ्रॉड?

    69 वर्षीय गजेंद्र चौहान अंधेरी वेस्ट के लोखंडवाला-ओशिवारा इलाके में रहते हैं।
    10 दिसंबर को उन्होंने फेसबुक पर
    👉 डी-मार्ट के नाम से ड्राई फ्रूट्स पर भारी छूट का एक विज्ञापन देखा

    • लिंक पर क्लिक कर ऑर्डर किया
    • मोबाइल पर OTP आया
    • कुछ ही देर बाद मैसेज मिला कि
      👉 HDFC बैंक अकाउंट से ₹98,000 डेबिट हो गए

    तभी उन्हें समझ आया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

    🚨 तुरंत की पुलिस से शिकायत

    धोखाधड़ी का एहसास होते ही
    👉 गजेंद्र चौहान ने 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज की
    👉 साथ ही ओशिवारा पुलिस से संपर्क किया

    पुलिस ने बिना देरी किए केस की जांच शुरू कर दी।

    👮‍♂️ मुंबई पुलिस की फुर्ती लाई रंग

    वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय चव्हाण और पुलिस निरीक्षक आनंद पगारे के मार्गदर्शन में
    ओशिवारा पुलिस की साइबर टीम ने तेजी से कार्रवाई की।

    इस टीम में शामिल थे:

    • साइबर सब-इंस्पेक्टर शरद देवरे
    • एपीआई अशोक कोंडे
    • कॉन्स्टेबल विक्रम सरनोबत

    जांच में सामने आया कि
    👉 ठगी की रकम Razorpay के जरिए Croma से जुड़े एक अकाउंट में ट्रांसफर हुई थी।

    💰 ऐसे वापस मिले पूरे ₹98,000

    पुलिस ने तुरंत
    👉 HDFC बैंक
    👉 Razorpay
    👉 Croma

    के नोडल अधिकारियों से ई-मेल के जरिए संपर्क किया।
    समय रहते ट्रांजैक्शन होल्ड कराया गया और
    👉 पूरी रकम अभिनेता के अकाउंट में वापस ट्रांसफर कर दी गई।

    🙏 अभिनेता ने पुलिस को कहा धन्यवाद

    गजेंद्र चौहान ने
    👉 मुंबई पुलिस
    👉 ओशिवारा पुलिस की साइबर टीम

    की तारीफ करते हुए कहा कि
    “अगर समय पर कार्रवाई न होती तो पैसा वापस मिलना मुश्किल था।”

    🎭 गजेंद्र सिंह चौहान के बारे में

    • जन्म: 10 अक्टूबर 1956, दिल्ली
    • शिक्षा:
    • रामजस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, दिल्ली
    • AIIMS से रेडियोग्राफी में डिप्लोमा
    • अभिनय प्रशिक्षण: रोशन तनेजा एक्टिंग स्कूल, मुंबई

    करियर:

    • टीवी डेब्यू: Paying Guest (1983)
    • चर्चित सीरियल: राजनी, एयर होस्टेस, अदालत
    • फिल्म डेब्यू: मैं चुप नहीं रहूंगी (1986)
    • सबसे बड़ी पहचान: बी.आर. चोपड़ा की महाभारत में युधिष्ठिर

    ⚠️ साइबर सेफ्टी पर पुलिस की सलाह

    • सोशल मीडिया विज्ञापनों पर आंख बंद कर भरोसा न करें
    • अनजान लिंक पर क्लिक न करें
    • OTP किसी से साझा न करें
    • ठगी होते ही 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें

    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. गजेंद्र चौहान के साथ कितनी रकम की ठगी हुई?
    👉 ₹98,000

    Q2. ठगी किस माध्यम से हुई?
    👉 फेसबुक पर फर्जी विज्ञापन के जरिए

    Q3. पैसा वापस कैसे मिला?
    👉 ओशिवारा पुलिस की साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई से

    Q4. शिकायत कहां की गई थी?
    👉 1930 साइबर हेल्पलाइन और ओशिवारा पुलिस स्टेशन

  • नकली RTO ऐप के नाम पर 65 वर्षीय मालाड निवासी से ₹7.6 लाख की ठगी

    नकली RTO ऐप के नाम पर 65 वर्षीय मालाड निवासी से ₹7.6 लाख की ठगी

    मुंबई के मालाड में 65 वर्षीय रिटायर्ड व्यक्ति को फर्जी RTO चालान ऐप के जरिए निशाना बनाया गया। ऐप डाउनलोड करवाकर स्कैमर ने मोबाइल फोन का कंट्रोल हासिल किया और खाते से ₹7.60 लाख उड़ा लिए। केस साइबर क्राइम और IT एक्ट के तहत दर्ज।

    मुंबई: मालाड इलाके में एक 65 वर्षीय रिटायर्ड नागरिक कमलेश चौक्षी को ऑनलाइन चालान और RTO वेरिफिकेशन के नाम पर साइबर ठगों ने बड़ा झांसा दिया। फेक ऐप इंस्टॉल करवाकर स्कैमर्स ने पीड़ित के मोबाइल की पूरी एक्सेस ले ली और बैंक अकाउंट से धीरे-धीरे ₹7.6 लाख उड़ा लिए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    🔍 घटना कैसे हुई — पूरी कहानी

    ➡ फर्जी ऐप डाउनलोड करवाकर जाल बिछाया

    सूत्रों के मुताबिक, पीड़ित ने हाल ही में सेकेंड-हैंड कार खरीदी थी।
    कार बेचने वाले व्यक्ति ने उनसे कहा कि RTO का ₹2,000 चालान बाकी है, जिसे उन्हें मोबाइल ऐप के जरिए भरना होगा।

    कमलेश ने बताए अनुसार ऐप डाउनलोड किया और ₹2,000 जमा कर दिए।

    🟢 अगले ही दिन — पूरा पैसा वापस आ गया, ताकि पीड़ित का भरोसा जीत सकें।
    पुलिस का मानना है कि यह साइबर ठगों की सोची-समझी तकनीक थी।

    ➡ मोबाइल कंट्रोल में लेने के बाद फ्रॉड शुरू

    26 नवंबर को पीड़ित के फोन पर अचानक HDFC बैंक की लगातार तीन ट्रांजेक्शन अलर्ट आए:

    लेनदेन प्रकारराशि
    NEFT ट्रांसफर₹4.90 लाख
    मोबाइल बैंकिंग₹1 लाख
    मोबाइल बैंकिंग₹1.70 लाख

    पीड़ित ने जब अलर्ट देखा, तब तक उनका मोबाइल स्क्रीन अनजाने में खुद चल रहा था — यानी हैकर फोन रिमोट कंट्रोल से ऑपरेट कर रहा था।

    ➡ परिवार ने उठाया कदम, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी

    पीड़ित ने तत्काल अपने बेटे को सूचना दी।
    बेटा दौड़कर बैंक पहुंचा और अकाउंट को फ्रीज कराया — लेकिन तब तक पूरी रकम खाते से निकल चुकी थी।

    👮‍♂️ पुलिस कार्रवाई

    मालाड पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। FIR में धोखाधड़ी की धारा और IT एक्ट शामिल किए गए हैं।

    जांच में पाया गया कि ‘RTO Challan Payment’ नाम का ऐप फेक था, और इसी के जरिए फोन हैक किया गया।

    🧠 साइबर विशेषज्ञों की सलाह

    ✔ RTO, बैंक या सरकारी ऐप हमेशा सरकारी वेबसाइट और Play Store Verified Source से डाउनलोड करें।
    ✔ किसी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसका डोमेन जांचें।
    ✔ फोन स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें।


    🔎 FAQ — आम सवाल और जवाब

    1️⃣ सवाल: क्या यह ऐप असली RTO से जुड़ा था?
    👉 नहीं, पुलिस जांच में यह नकली और फ्रॉड एप्लिकेशन पाया गया।

    2️⃣ सवाल: क्या पैसे वापस मिल सकते हैं?
    👉 साइबर पुलिस पैसे ट्रेस कर रही है, पर वापसी की गारंटी नहीं होती — लेकिन तुरंत रिपोर्ट से संभावना बढ़ जाती है।

    3️⃣ सवाल: ऐसे मामले की शिकायत कहाँ करें?
    👉 1930 हेल्पलाइन नंबर या साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।