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  • कुर्ला–CSMT रूट की भीड़ होगी कम, 4 लंबी दूरी की ट्रेनें LTT शिफ्ट करने को मंजूरी

    कुर्ला–CSMT रूट की भीड़ होगी कम, 4 लंबी दूरी की ट्रेनें LTT शिफ्ट करने को मंजूरी

    मुंबई में लोकल ट्रेनों की समयपालन बेहतर करने के लिए रेलवे बोर्ड ने चार लंबी दूरी की ट्रेनों का टर्मिनल CSMT से लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) शिफ्ट करने की मंजूरी दी है।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में सबसे व्यस्त कुर्ला–छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) रेल कॉरिडोर की भीड़ कम करने की दिशा में रेलवे बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। चार लंबी दूरी की मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों का टर्मिनल अब लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) किया जाएगा। इस बदलाव से लोकल ट्रेनों के लिए अतिरिक्त ट्रेन पाथ उपलब्ध होंगे और खासतौर पर पीक आवर्स में लोकल सेवाओं की समयपालन क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है।

    किन ट्रेनों का टर्मिनल बदला जाएगा

    रेलवे बोर्ड ने जिन चार ट्रेनों को LTT शिफ्ट करने की मंजूरी दी है, उनमें शामिल हैं:

    • 22629 दादर–तिरुनेलवेली एक्सप्रेस
    • 16331 CSMT–तिरुवनंतपुरम (TVC) एक्सप्रेस
    • 16351 CSMT–नागरकोइल (ईस्ट) एक्सप्रेस
    • 16339 CSMT–नागरकोइल (वेस्ट) एक्सप्रेस

    इन ट्रेनों के CSMT तक आने-जाने से कुर्ला–CSMT सेक्शन पर दबाव बढ़ता था।

    क्यों जरूरी था यह फैसला

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार कुर्ला–CSMT रूट मुंबई रेल नेटवर्क का सबसे ज्यादा सैचुरेटेड सेक्शन है। इसी रूट पर लंबी दूरी की ट्रेनें और लगातार चलने वाली लोकल ट्रेनें एक ही सीमित लाइन क्षमता साझा करती हैं।
    जब कोई मेल या एक्सप्रेस ट्रेन देरी से आती है, तो उसका सीधा असर लोकल ट्रेनों पर पड़ता है। कई बार लोकल को रोकना या धीमा करना पड़ता है, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है।

    लोकल ट्रेनों को क्या होगा फायदा

    चार ट्रेनों को LTT शिफ्ट करने से CSMT की ओर जाने वाली मेल-एक्सप्रेस मूवमेंट कम होगी। इससे:

    • लोकल ट्रेनों के लिए स्थिर और नियमित टाइम स्लॉट मिलेंगे
    • पीक आवर्स में ट्रेन रेगुलेशन कम करना पड़ेगा
    • देरी का “रिपल इफेक्ट” घटेगा
    • लोकल सेवाओं की पंक्चुअलिटी सुधरेगी

    रेलवे का मानना है कि इससे बिना बड़े निर्माण कार्य के ही लोकल सिस्टम को राहत मिल सकेगी।

    CSMT और LTT के बीच संतुलन बनाने की कोशिश

    रेलवे सूत्रों के मुताबिक मुंबई डिवीजन में लंबे समय से यह अध्ययन चल रहा था कि लंबी दूरी की ट्रेनों का बेहतर बंटवारा कैसे किया जाए।
    CSMT पर ज्यादा दबाव होने के कारण कुछ ट्रेनों को LTT जैसे बड़े टर्मिनल पर शिफ्ट कर ऑपरेशनल बैलेंस बनाया जा रहा है। इससे दोनों टर्मिनलों की इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता का सही इस्तेमाल हो सकेगा।

    कब से लागू होगा बदलाव

    फिलहाल रेलवे ने केवल सैद्धांतिक मंजूरी दी है।
    रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेबलिंग, क्रू लिंक, प्लेटफॉर्म आवंटन और यात्रियों की सूचना व्यवस्था जैसे ऑपरेशनल इंतजाम पूरे होने के बाद ही इसकी तारीख घोषित की जाएगी।
    यात्रियों को समय रहते संशोधित शेड्यूल और प्लेटफॉर्म की जानकारी दी जाएगी।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. कितनी ट्रेनों को LTT शिफ्ट किया जा रहा है?
    👉 कुल 4 लंबी दूरी की मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों को LTT शिफ्ट करने की मंजूरी मिली है।

    Q2. क्या इससे लोकल यात्रियों को फायदा होगा?
    👉 हां, कुर्ला–CSMT रूट पर भीड़ कम होने से लोकल ट्रेनों की समयपालन बेहतर होगी।

    Q3. बदलाव कब से लागू होगा?
    👉 अभी तारीख घोषित नहीं हुई है, ऑपरेशनल तैयारी के बाद रेलवे इसकी घोषणा करेगा।

  • मुंबई CSMT के नीचे मिला 200 साल पुराना ब्रिटिश काल का सीक्रेट कैश वॉल्ट

    मुंबई CSMT के नीचे मिला 200 साल पुराना ब्रिटिश काल का सीक्रेट कैश वॉल्ट

    CSMT स्टेशन के नीचे ब्रिटिश काल का गुप्त कैश वॉल्ट मिला। यह वॉल्ट 2002 तक रेलवे की नकदी रखने के लिए इस्तेमाल होता था।

    मुंबई: एशिया के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के नीचे एक ऐसा रहस्य छिपा था, जिसे अब जाकर उजागर किया गया है। स्टेशन की भूमिगत सुरंग से जुड़ा यह गुप्त कैश वॉल्ट करीब 25 से 30 फीट गहराई पर बना है।

    यह वॉल्ट ब्रिटिश दौर में बना था और इसे रेलवे की नकदी रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। खास बात यह है कि इस कमरे का इस्तेमाल साल 2002 तक किया जाता रहा

    2002 तक यहां रखा जाता था रेलवे का पैसा

    यह गुप्त वॉल्ट ब्रिटिश आर्किटेक्ट फ्रेडरिक विलियम स्टीवंस की मूल डिज़ाइन का हिस्सा था, जिन्होंने 1888 में विक्टोरिया टर्मिनस (आज का CSMT) बनाया।

    करीब एक सदी तक यह कमरा रेलवे का सबसे बड़ा फाइनेंशियल स्ट्रॉन्ग रूम रहा। यहां रोज़ाना रेलवे से जुड़ी नकदी सुरक्षित रखी जाती थी और बाद में उसे रिज़र्व बैंक में जमा कराया जाता था। इस वॉल्ट में दो बड़े सेफ रखे गए थे, जिनमें करोड़ों की रकम सुरक्षित रहती थी।

    इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग और डिजिटल फाइनेंशियल सिस्टम आने के बाद इस वॉल्ट का इस्तेमाल धीरे-धीरे बंद हो गया और 2002 के बाद यह पूरी तरह से भुला दिया गया।

    मुंबई की भूमिगत कहानियां: रहस्यमयी खोजों की लिस्ट

    यह पहली बार नहीं है जब मुंबई की ज़मीन के नीचे ऐसे रहस्य सामने आए हैं। इससे पहले भी कई बार ब्रिटिश काल की छिपी हुई संरचनाएं सामने आ चुकी हैं:

    • 2010 : मुंबई के जनरल पोस्ट ऑफिस (GPO) के नीचे 200 साल पुरानी पत्थर की सुरंग मिली थी। माना जाता है कि इसे फ्रेंच आक्रमण की आशंका से बचने के लिए बनाया गया था।
    • 2016 : महाराष्ट्र राजभवन में प्री-World War I का 15,000 स्क्वायर फीट का विशाल बंकर मिला। इसमें 13 कमरे थे, जिनमें हथियार और जरूरी सामान रखा जाता था। 2019 में इसे म्यूज़ियम में बदल दिया गया।
    • 2018 : JJ हॉस्पिटल में 132 साल पुराना भूमिगत कक्ष मिला, जिसने शोधकर्ताओं को चौंका दिया।

    क्या मुंबई है ‘चैंबर ऑफ सीक्रेट्स’?

    इतिहासकार मानते हैं कि ब्रिटिश राज के दौरान मुंबई को सुरक्षा, व्यापार और सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भूमिगत नेटवर्क से जोड़ा गया था।

    आज जब बार-बार ऐसी खोजें हो रही हैं—CSMT का वॉल्ट, राजभवन का बंकर, JJ हॉस्पिटल का चैंबर—तो सवाल उठता है कि शायद मुंबई आज भी रहस्यों का शहर है, जिसकी असली तस्वीर अभी सामने आना बाकी है।

    विरासत और पर्यटन की संभावनाएं

    इतिहासकारों का कहना है कि अगर इन जगहों को सही तरीके से संरक्षित कर हेरिटेज टूरिज्म का हिस्सा बनाया जाए, तो मुंबई न सिर्फ इतिहास प्रेमियों के लिए, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी और ज्यादा आकर्षक बन सकती है।

    CSMT, जो पहले से ही यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है, अगर इस वॉल्ट को म्यूज़ियम के तौर पर जनता के लिए खोला जाए तो यह स्टेशन की शान को और बढ़ा सकता है।