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  • ट्रेन फायरिंग केस: पूर्व RPF कॉन्स्टेबल की जमानत याचिका पर पुलिस ने जताई आपत्ति

    ट्रेन फायरिंग केस: पूर्व RPF कॉन्स्टेबल की जमानत याचिका पर पुलिस ने जताई आपत्ति

    मुंबई ट्रेन फायरिंग केस में आरोपी पूर्व RPF कॉन्स्टेबल चेतन सिंह चौधरी की बेल याचिका का पुलिस ने विरोध किया। पुलिस का कहना है कि केस गंभीर है और इसमें मौत की सजा भी संभव है। कोर्ट में गवाहों के बयान और सबूत पेश।

    मुंबई: 8 दिसंबर। मुंबई की अदालत में चल रहे ट्रेन फायरिंग मामले में पूर्व रेलवे सुरक्षा बल (RPF) कॉन्स्टेबल चेतन सिंह चौधरी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस ने बेल का कड़ा विरोध किया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें आरोपी को मृत्युदंड (Death Penalty) भी मिल सकता है, इसलिए जमानत देना अभी न्याय के हित में नहीं होगा।

    चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने 31 जुलाई 2023 को जयपुर-मुंबई सेंट्रल सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन में अपने वरिष्ठ अधिकारी ASI टीका राम मीणा और तीन यात्रियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

    📍 पुलिस का तर्क: “जमानत से प्रभावित हो सकता है केस”

    अतिरिक्त लोक अभियोजक सुदीर सापकले की मौजूदगी में दाखिल लिखित जवाब में कहा गया कि:

    • मामले में कई महत्वपूर्ण गवाह मौजूद हैं।
    • पर्याप्त सबूत इकट्ठा किए जा चुके हैं।
    • इस स्टेज पर जमानत मिलने से जांच और ट्रायल प्रभावित हो सकता है।

    पुलिस ने ये भी दावा किया कि सबूत आरोपी के खिलाफ मजबूत हैं।

    🧠 आरोपी की दलील: “मानसिक बीमारी थी, अपराध की याद नहीं”

    चेतन सिंह चौधरी ने अपने वकील अमित मिश्रा और पंकज घिल्डियाल के जरिए कहा कि वह मानसिक बीमारी “White Matter Disease” से पीड़ित हैं और उन्हें भ्रम (Delusional Disorder) होता है।

    अर्जी में कहा गया:

    “अपराध के समय आरोपी अपनी मानसिक स्थिति में नहीं था और उसे घटना की याद भी नहीं है।”

    लेकिन अभियोजन पक्ष ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा:

    “यह आधार भरोसेमंद नहीं है और इस समय विचार करने योग्य नहीं।”

    ⚖️ पीड़ित परिवार की अपील भी कोर्ट में

    हत्या में मारे गए एक यात्री की पत्नी ने भी कोर्ट में इंटरवेशन एप्लीकेशन दाखिल कर कहा कि:

    • आरोपी के खिलाफ प्रत्यक्षदर्शी गवाह हैं
    • हथियार और कारतूस बरामद हुए हैं
    • बेल मिलने पर आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है

    🚔 गवाह का खुलासा: “चेतन सिंह ने धमकी दी – रास्ते में आए तो गोली मार दूंगा”

    एक RPF कांस्टेबल, जो आरोपी को पकड़ने वाली टीम में शामिल था, ने सोमवार को कोर्ट में बयान दिया। उन्होंने बताया:

    • मीरा रोड और दहिसर स्टेशन के बीच पटरी पर आरोपी चला रहा था
    • पूछताछ पर उसने जवाब नहीं दिया
    • आरोपी ने कहा:

    “मेरे सामने मत आओ, वरना गोली मार दूंगा।”

    आखिरकार आरोपी को मीरा रोड स्टेशन के फुटओवर ब्रिज पर गिरफ्तार किया गया।


    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1: चेतन सिंह पर क्या आरोप है?
    उन पर ट्रेन में एक ASI और तीन यात्रियों की गोली मारकर हत्या का आरोप है।

    Q2: क्या आरोपी मानसिक बीमारी का दावा कर रहा है?
    हाँ, उसने ‘व्हाइट मैटर डिज़ीज़’ और भ्रम की बीमारी होने का दावा किया है।

    Q3: क्या आरोपी को जमानत मिली?
    अभी जमानत मंजूर नहीं हुई है, पुलिस ने विरोध किया है।

    Q4: क्या इस केस में मौत की सजा संभव है?
    हाँ, पुलिस के अनुसार केस की गंभीरता देखते हुए यह ‘रेयर ऑफ रेयरेस्ट’ कैटेगरी में आता है।

  • मुंबई DRT-III लोक अदालत में 122 केस सुलझे, ₹34.69 करोड़ की रिकवरी

    मुंबई DRT-III लोक अदालत में 122 केस सुलझे, ₹34.69 करोड़ की रिकवरी

    मुंबई DRT-III में नेशनल लोक अदालत के दौरान 122 मामले निपटाए गए और ₹34.69 करोड़ की रिकवरी हुई। इस प्रक्रिया में बैंक अफसरों, वकीलों और स्टाफ ने अहम भूमिका निभाई।

    मुंबई: डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल-III (DRT-III) में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन हुआ। इस लोक अदालत में कुल 122 मामलों का निपटारा किया गया और बैंकों को करीब ₹34.69 करोड़ की रिकवरी हासिल हुई।

    ये लोक अदालत स्रीकला सुरेश, इंचार्ज प्रेसीडिंग ऑफिसर के मार्गदर्शन में हुई। कार्यक्रम का संचालन पूरी तरह से सौहार्दपूर्ण माहौल में किया गया।

    पैनल और मेंबर्स की अहम भूमिका

    कार्यवाही की अध्यक्षता पूर्व प्रेसीडिंग ऑफिसर वी.एन. लोथे पाटिल ने की। उनके साथ पैनल में सुधांशु एस. साहू (डिप्टी जनरल मैनेजर, केनरा बैंक) और एडवोकेट सुनील हम्ब्रे मौजूद थे।

    इनके सहयोग से कई जटिल मामले आसानी से सुलझे, जिससे बैंक और उधारकर्ताओं दोनों को राहत मिली।

    122 मामले निपटाए गए, ₹34.69 करोड़ की रिकवरी

    इस लोक अदालत में बैंकों के लंबे समय से पेंडिंग पड़े केसों का समाधान हुआ। इसमें अधिकतर मामले लोन रिकवरी और सेटलमेंट से जुड़े थे।

    122 मामलों के समाधान के बाद ₹34.69 करोड़ की राशि रिकवर हुई। इसे बैंकिंग सेक्टर के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    रजिस्ट्रार का आभार व्यक्त

    DRT-III मुंबई के रजिस्ट्रार संजय जायसवाल ने सभी अफसरों, स्टाफ और लिटिगेंट्स का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन को सफल बनाने में पूरी टीम ने कड़ी मेहनत की।

    उन्होंने खासतौर से स्टाफ मेंबर्स का नाम लेकर आभार जताया –

    • स्नेहल तलाशीळकर (असिस्टेंट रजिस्ट्रार)
    • परवेश शर्मा, मिलिंद खाटू, सतीश बोराडे, राजन कांबले, नरेंद्र महामुंकर, पवन मीणा, प्रवीन लबडे, किशोर इंदुलकर, अमरेन्द्र और प्रियांका गुरव

    लोक अदालत का महत्व

    लोक अदालत को लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये एक ऐसा मंच है, जहां लंबे समय से पेंडिंग केस जल्दी और आपसी सहमति से सुलझाए जाते हैं। इससे अदालतों पर केसों का बोझ कम होता है और आम लोगों व बैंकों दोनों को राहत मिलती है।

    मुंबई जैसे बड़े शहर में जहां बैंकिंग ट्रांजैक्शन और लोन से जुड़े विवाद बहुत आम हैं, वहां इस तरह की पहल बेहद कारगर साबित होती है।

    मुंबई DRT-III की इस लोक अदालत ने दिखा दिया कि अगर सही माहौल और सहयोग मिले तो जटिल से जटिल केस भी आसानी से सुलझ सकते हैं। इस बार का नतीजा ₹34.69 करोड़ की रिकवरी के साथ काफी सकारात्मक रहा। उम्मीद है कि आगे भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे और बैंकिंग सेक्टर में पेंडिंग केसों का बोझ कम होगा।