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    BMC Election: छाननी में 2,231 पर्चे वैध, 167 नामांकन रद्द

    BMC Election 2025-26 में नामांकन पत्रों की छाननी पूरी हो गई है। कुल 2,516 पर्चों में से 2,231 वैध पाए गए, जबकि 167 नामांकन रद्द कर दिए गए। अब 2 जनवरी को नाम वापसी और 3 जनवरी को चुनाव चिह्न आवंटन होगा।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2025-26 के तहत नामांकन पत्रों की छाननी पूरी हो चुकी है। 31 दिसंबर 2025 को हुई जांच में कुल 2,516 नामांकन में से 2,231 नामांकन वैध पाए गए हैं, जबकि 167 नामांकन पत्र नियमों में कमी के चलते रद्द कर दिए गए। अब 2 जनवरी 2026 को नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया होगी और 3 जनवरी को वैध उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न दिए जाएंगे।

    🗳️ BMC नामांकन छाननी पूरी, तस्वीर हुई साफ

    राज्य चुनाव आयोग, महाराष्ट्र द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार बीएमसी के सभी 23 रिटर्निंग ऑफिसर (RO) कार्यालयों में बुधवार सुबह 11 बजे से नामांकन पत्रों की छाननी की गई।
    इस दौरान उम्मीदवारों के कागजात, शपथपत्र, ना-हरकत प्रमाणपत्र, पार्टी के एबी फॉर्म और आवेदन की पूरी जानकारी की बारीकी से जांच की गई।

    जिन उम्मीदवारों के दस्तावेज पूरे और नियमों के अनुसार पाए गए, उनके नामांकन वैध घोषित किए गए। जिन पर्चों में खामियां मिलीं, उन्हें रद्द कर दिया गया।

    📊 कितने पर्चे वैध, कितने रद्द?

    छाननी के बाद सामने आए आंकड़ों के अनुसार—

    • कुल नामांकन प्राप्त: 2,516
    • वैध नामांकन: 2,231
    • अवैध (रद्द) नामांकन: 167

    छाननी पूरी होते ही वैध उम्मीदवारों की सूची भी तुरंत जारी कर दी गई है।

    🏛️ नामांकन प्रक्रिया की पूरी टाइमलाइन

    बीएमसी के 227 नगरसेवक पदों के लिए—

    • 23 दिसंबर 2025: नामांकन दाखिल करने की शुरुआत
    • 30 दिसंबर 2025: नामांकन का आखिरी दिन
    • कुल नामांकन पत्र वितरित: 11,391
    • कुल नामांकन दाखिल: 2,516
    • 31 दिसंबर 2025: नामांकन पत्रों की छाननी

    इन आंकड़ों से साफ है कि इस बार चुनाव में राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवारों की भी अच्छी खासी भागीदारी रही है।

    🔁 अब आगे क्या? नाम वापसी और चुनाव चिह्न

    चुनाव विभाग के अनुसार—

    • 2 जनवरी 2026 (शुक्रवार):
      सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवार नामांकन वापस ले सकेंगे।
    • 3 जनवरी 2026 (शनिवार):
      सुबह 11 बजे से वैध उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।
      इसी दिन चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अंतिम सूची भी जारी की जाएगी।

    इसके बाद सभी वार्डों में चुनाव प्रचार पूरी रफ्तार पकड़ लेगा।

    🏙️ विभागवार छाननी का हाल

    बीएमसी के अलग-अलग प्रशासनिक विभागों में वैध और अवैध नामांकन की संख्या अलग-अलग रही।
    एम पूर्व, एम पश्चिम, जी उत्तर, के पश्चिम और एस विभाग जैसे इलाकों में ज्यादा पर्चे रद्द हुए, जिससे वहां मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है।
    वहीं एफ उत्तर, एन और कुछ अन्य विभागों में बहुत कम नामांकन रद्द हुए हैं।

    इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि कई वार्डों में सीधी टक्कर देखने को मिलेगी, तो कुछ जगहों पर बहुकोणीय मुकाबला रहेगा।

    🏙️ मुंबई में चुनावी सरगर्मी तेज

    नामांकन छाननी के बाद अब मुंबई की सियासत पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है।
    पार्टी कार्यालयों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है और उम्मीदवारों ने अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क भी तेज कर दिया है।
    नाम वापसी के बाद असली मुकाबला किसके बीच होगा, यह 3 जनवरी को पूरी तरह साफ हो जाएगा।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. बीएमसी चुनाव में कुल कितने नामांकन वैध हुए हैं?
    👉 कुल 2,231 नामांकन वैध घोषित किए गए हैं।

    Q2. कितने नामांकन रद्द किए गए?
    👉 167 नामांकन पत्र अवैध पाए गए।

    Q3. नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख क्या है?
    👉 2 जनवरी 2026, सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक।

    Q4. चुनाव चिह्न कब दिए जाएंगे?
    👉 3 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजे से।

    Q5. अंतिम उम्मीदवार सूची कब जारी होगी?
    👉 3 जनवरी 2026 को।

  • BMC चुनाव में पर्चों पर संकट: ठाकरे गुट के 5 उम्मीदवारों पर खतरा, डिजिटल साइन बना वजह

    BMC चुनाव में पर्चों पर संकट: ठाकरे गुट के 5 उम्मीदवारों पर खतरा, डिजिटल साइन बना वजह

    BMC चुनाव 2026 में नामांकन जांच के दौरान बड़ा सियासी विवाद सामने आया है। मालाड के पांच वार्डों में ठाकरे गुट के उम्मीदवारों के पर्चों पर शिंदेसेना ने डिजिटल साइन को लेकर आपत्ति उठाई है, वहीं दो वार्डों में महायुति को झटका लगा है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 के लिए नामांकन पत्रों की छाननी शुरू होते ही सियासी घमासान तेज हो गया है। पश्चिमी उपनगर मालाड में ठाकरे गुट के पांच उम्मीदवारों के पर्चे खतरे में पड़ गए हैं। शिंदेसेना ने आरोप लगाया है कि इन उम्मीदवारों के एबी फॉर्म पर हाथ से साइन की जगह डिजिटल साइन किए गए हैं, जो नियमों के खिलाफ हैं। दूसरी ओर, वार्ड 211 और 212 में शिंदेसेना और भाजपा को भी बड़ा झटका लगा है, जिससे चुनावी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

    🗳️ BMC चुनाव 2026: त्रिकोणीय मुकाबला

    इस बार बीएमसी चुनाव में मुकाबला सीधा नहीं है।

    • एक तरफ शिंदेसेना-भाजपा (महायुति)
    • दूसरी तरफ ठाकरे बंधुओं का गुट
    • और तीसरी तरफ कांग्रेस-वंचित गठबंधन

    मंगलवार को नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख थी। अब पूरे मुंबई में नामांकन पत्रों की जांच चल रही है, और इसी दौरान कई जगहों से विवाद सामने आ रहे हैं।

    ⚠️ मालाड में बढ़ी ठाकरे गुट की परेशानी

    पश्चिमी उपनगर मालाड पूर्व के ईशान्य विभाग स्थित चुनाव कार्यालय में जब नामांकन की जांच शुरू हुई, तब ठाकरे गुट की मुश्किलें बढ़ गईं।
    शिंदेसेना ने वार्ड क्रमांक 38, 39, 40, 41 और 42 में ठाकरे गुट के पांच उम्मीदवारों के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई है।

    अगर यह आपत्ति मान्य मानी गई, तो इन सभी वार्डों में ठाकरे गुट के उम्मीदवारों के पर्चे रद्द हो सकते हैं, जिससे वहां सीधा मुकाबला ही बदल जाएगा।

    ✍️ डिजिटल साइन पर क्यों हुआ विवाद?

    शिंदेसेना के विभाग प्रमुख वैभव भरडकर ने चुनाव अधिकारियों को बताया कि ठाकरे गुट के उम्मीदवारों के एबी फॉर्म पर डिजिटल हस्ताक्षर किए गए हैं।
    जबकि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक,

    • एबी फॉर्म पर हाथ से की गई असली साइन जरूरी होती है
    • डिजिटल साइन को वैध नहीं माना जाता

    इसी आधार पर शिंदेसेना ने लिखित शिकायत दी है। चुनाव अधिकारियों ने शिकायत स्वीकार कर ली है और नियमों के तहत फैसला लेने का भरोसा दिया है।

    🔄 महायुति को भी झटका, दो वार्डों में पर्चे रद्द

    जहां एक ओर ठाकरे गुट के पांच उम्मीदवार संकट में हैं, वहीं दूसरी ओर महायुति को भी नुकसान झेलना पड़ा है।

    • वार्ड क्रमांक 211 में शिंदेसेना के उम्मीदवार का पर्चा जरूरी दस्तावेज पूरे न होने की वजह से रद्द कर दिया गया।
    • वार्ड क्रमांक 212 में भाजपा उम्मीदवार मंदाकिनी खामकर का नामांकन भी खारिज हो गया।

    बताया जा रहा है कि वे एबी फॉर्म मिलने के बाद नामांकन कार्यालय 15 मिनट देरी से पहुंचीं, जिस वजह से उनका पर्चा स्वीकार नहीं किया गया।

    🟠 वार्ड 212 में मनसे की स्थिति मजबूत

    भाजपा उम्मीदवार का पर्चा रद्द होते ही वार्ड 212 में सियासी गणित बदल गया है।
    अब यहां मनसे की उम्मीदवार श्रावणी हलदळकर को मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

    इस वार्ड में

    • अखिल भारतीय सेना की गीता गवळी,
    • कांग्रेस
    • और अन्य दलों के उम्मीदवार भी मैदान में हैं,

    लेकिन ठाकरे बंधुओं की एकजुट ताकत और मौजूदा हालात को देखते हुए मनसे उम्मीदवार की जीत की संभावना ज्यादा बताई जा रही है। अगर ऐसा हुआ, तो बीएमसी में मनसे का खाता खुल सकता है।

    👀 आगे क्या होगा?

    अब सभी राजनीतिक दलों की नजर चुनाव अधिकारियों के फैसले पर टिकी है।

    • अगर डिजिटल साइन को नियमों के खिलाफ माना गया, तो मालाड के पांच वार्डों में ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगेगा।
    • वहीं महायुति पहले ही दो वार्डों में नुकसान झेल चुकी है।

    आने वाले फैसलों से साफ होगा कि किसका पत्ता कटेगा और किसे चुनावी फायदा मिलेगा।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. ठाकरे गुट के कितने उम्मीदवारों के पर्चे खतरे में हैं?
    👉 कुल 5 उम्मीदवारों के।

    Q2. विवाद की मुख्य वजह क्या है?
    👉 एबी फॉर्म पर डिजिटल साइन किया जाना।

    Q3. कौन-कौन से वार्ड प्रभावित हो सकते हैं?
    👉 वार्ड क्रमांक 38, 39, 40, 41 और 42।

    Q4. महायुति को कहां नुकसान हुआ है?
    👉 वार्ड 211 और 212 में।

    Q5. वार्ड 212 में किसे बढ़त मानी जा रही है?
    👉 मनसे उम्मीदवार श्रावणी हलदळकर को।

  • BMC चुनाव से पहले कांग्रेस-VBA का बड़ा दांव, सीट शेयरिंग फाइनल

    BMC चुनाव से पहले कांग्रेस-VBA का बड़ा दांव, सीट शेयरिंग फाइनल

    मुंबई BMC चुनाव से पहले कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के बीच गठबंधन फाइनल। 227 वार्डों में सीट शेयरिंग, MVA की अंदरूनी राजनीति, MNS फैक्टर और महायुति की चुनौती—पूरी डिटेल मुंबई की आम बोलचाल की हिंदी में।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने आख़िरकार गठबंधन का ऐलान कर दिया है। लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद दोनों दलों ने सीट शेयरिंग का फ़ॉर्मूला तय किया, जिसके तहत कांग्रेस 165 और VBA 62 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 15 जनवरी को वोटिंग और 16 जनवरी को नतीजे आएंगे। यह गठबंधन कांग्रेस और VBA—दोनों के लिए मुंबई में सियासी वजूद बचाने और मज़बूत करने की एक अहम कोशिश माना जा रहा है।

    BMC चुनाव से पहले आख़िरी वक़्त का गठबंधन

    मुंबई की राजनीति में ऐन चुनाव से पहले गठबंधन होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार कांग्रेस-VBA की जुगलबंदी इसलिए अहम है क्योंकि दोनों ही दल दबाव में दिख रहे थे। कांग्रेस को मुंबई में लगातार कमजोर होती पकड़ की चिंता है, वहीं VBA अब तक महानगर में बड़ा राजनीतिक स्पेस नहीं बना पाई है।
    ऐसे में यह गठबंधन दोनों के लिए “करो या मरो” जैसी स्थिति लेकर आया है।

    सीट शेयरिंग का गणित क्या कहता है?

    BMC की कुल 227 सीटों में से:

    • कांग्रेस: 165 सीटें
    • VBA: 62 सीटें

    VBA के लिए यह सीटें सिर्फ संख्या नहीं हैं, बल्कि मुंबई जैसे बड़े शहर में अपनी पहचान बनाने का मौका भी हैं। दूसरी तरफ़ कांग्रेस ने ज़्यादा सीटें लेकर यह साफ़ कर दिया है कि वह अभी भी खुद को इस गठबंधन की बड़ी ताक़त मानती है।

    MVA के अंदर बढ़ी खींचतान

    कांग्रेस पहले से ही महा विकास आघाड़ी (MVA) का हिस्सा है, जिसमें:

    • शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट)
    • शरद पवार की NCP

    लेकिन मामला तब उलझ गया जब शिवसेना-UBT ने राज ठाकरे की MNS के साथ हाथ मिला लिया। कांग्रेस ने इस पर खुलकर आपत्ति जताई और कहा कि MNS के साथ जाना पार्टी की विचारधारा के खिलाफ़ है।
    इसी तनाव के बीच कांग्रेस का VBA से हाथ मिलाना यह दिखाता है कि मुंबई में पार्टी अब “सैद्धांतिक बहस” से ज़्यादा “चुनावी मजबूरी” पर चल रही है।

    वोट बैंक की राजनीति और असली मक़सद

    कांग्रेस-VBA गठबंधन का सीधा फोकस है:

    • दलित वोट
    • OBC वोट
    • अल्पसंख्यक वोट

    ये वो वर्ग हैं, जिन्हें अलग-अलग लड़कर दोनों पार्टियां पूरी तरह साध नहीं पा रही थीं। साथ आकर उम्मीद है कि वोटों का बंटवारा रुके और मुकाबले में मज़बूती आए।

    महायुति की मज़बूती बनी सबसे बड़ी चुनौती

    मुंबई के बाहर, ग्रामीण महाराष्ट्र में महायुति (BJP + शिंदे शिवसेना + अजित पवार NCP) ने हाल ही में जबरदस्त प्रदर्शन किया है:

    • BJP: 117 नगराध्यक्ष
    • शिंदे गुट: 53
    • अजित पवार गुट: 37
    • कांग्रेस: सिर्फ़ 28

    ये आंकड़े कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी हैं। अगर मुंबई जैसे किले में भी पार्टी कमजोर पड़ी, तो आगे की राजनीति और मुश्किल हो सकती है।

    एशिया की सबसे अमीर नगरपालिका की जंग

    BMC सिर्फ़ एक चुनाव नहीं है। यह:

    • बजट
    • कॉन्ट्रैक्ट
    • शहरी विकास
    • राजनीतिक कंट्रोल

    सबका केंद्र है। इसी वजह से हर पार्टी यहां पूरी ताक़त झोंक रही है। कांग्रेस-VBA का गठबंधन इसी लड़ाई में खुद को ज़िंदा रखने की कोशिश है।

    15 जनवरी की वोटिंग, 16 को फैसला

    अब सबकी नज़रें:

    • 15 जनवरी: मतदान
    • 16 जनवरी: नतीजे

    इन 24 घंटों में तय होगा कि यह गठबंधन भविष्य की राजनीति का मॉडल बनेगा या फिर सिर्फ़ एक चुनावी प्रयोग बनकर रह जाएगा।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. कांग्रेस-VBA गठबंधन क्यों हुआ?
    मुंबई में कमजोर होती पकड़ और वोटों के बंटवारे को रोकने के लिए दोनों दल साथ आए हैं।

    Q2. सीट शेयरिंग का फ़ॉर्मूला क्या है?
    कांग्रेस 165 और VBA 62 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

    Q3. क्या यह गठबंधन MVA को प्रभावित करेगा?
    हां, खासकर MNS के साथ शिवसेना-UBT की नज़दीकी को लेकर कांग्रेस में नाराज़गी है।

    Q4. मतदान और नतीजे कब हैं?
    15 जनवरी को वोटिंग और 16 जनवरी को नतीजे आएंगे।

  • BMC Election: सीट बंटवारे पर ठाकरे बंधुओं की बातचीत तेज, UBT को 125 और MNS को 90 सीटें संभव

    BMC Election: सीट बंटवारे पर ठाकरे बंधुओं की बातचीत तेज, UBT को 125 और MNS को 90 सीटें संभव

    BMC Election 2026 से पहले ठाकरे बंधुओं में सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम दौर की बातचीत। शिवसेना (UBT) 120–125 और मनसे 80–90 सीटों पर लड़ सकती है।

    मुंबई: आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। प्रस्तावित फॉर्मूले के तहत शिवसेना (UBT) करीब 120 से 125 सीटों पर और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) लगभग 80 से 90 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है।

    ठाकरे बंधुओं की संभावित युति पर सबकी नजर

    करीब एक दशक बाद होने जा रहे बीएमसी चुनाव को लेकर ठाकरे परिवार की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग का मकसद साफ है—मराठी वोटों का बंटवारा रोकना और मुंबई महानगरपालिका में मज़बूत दावेदारी पेश करना।

    सूत्र बताते हैं कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच कई दौर की अनौपचारिक बैठकें हो चुकी हैं और जल्द ही इस पर औपचारिक ऐलान हो सकता है।

    BMC Election 2017 के नतीजों से सीख, लेकिन सीटों पर मतभेद

    2017 के BMC Election में शिवसेना (तत्कालीन अविभाजित) ने 84 सीटें जीती थीं। उद्धव ठाकरे चाहते हैं कि ये सभी 84 सीटें शिवसेना (UBT) के पास ही रहें।
    हालांकि, मनसे इस मांग से सहमत नहीं है

    मनसे का तर्क है कि वर्ली, दादर, कालाचौकी, मुलुंड और भांडुप जैसे मराठी बहुल इलाकों में उसका मजबूत जनाधार है। इसी आधार पर मनसे कुछ ऐसी सीटों की मांग कर रही है, जिन पर पहले शिवसेना का दबदबा रहा है।

    NCP (शरद पवार) और वाम दलों की भी हो सकती है एंट्री

    वोटों के बंटवारे से बचने के लिए ठाकरे बंधु इस संभावित गठबंधन में एनसीपी (शरद पवार गुट) और वाम दलों को शामिल करने पर भी विचार कर रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार, यदि शरद पवार गुट गठबंधन में शामिल होता है तो उसे 15 से 20 सीटें दी जा सकती हैं। इससे गठबंधन को शहरी और अल्पसंख्यक वोटों में मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    महा युति में भी सीट बंटवारे को लेकर खींचतान

    दूसरी ओर, सत्तारूढ़ महा युति (भाजपा–शिंदे गुट शिवसेना) में भी सीट शेयरिंग को लेकर गहमागहमी है।
    एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 90 से 100 सीटों की मांग की है, यह दावा करते हुए कि उसका संगठन और जनाधार कई वार्डों में मजबूत है।

    वहीं, भाजपा मुंबई में 135 से 140 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

    2017 में किसका पलड़ा भारी था?

    2017 के बीएमसी चुनाव में कुल 227 सीटों में से:

    • शिवसेना: 84 सीटें
    • भाजपा: 82 सीटें

    उस वक्त दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़े थे। इस बार तस्वीर बदली हुई है और गठबंधनों का गणित ज्यादा अहम हो गया है।


    FAQ | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1: बीएमसी चुनाव कब होने हैं?
    👉 जनवरी 2026 में।

    Q2: शिवसेना (UBT) कितनी सीटों पर लड़ सकती है?
    👉 लगभग 120 से 125 सीटों पर।

    Q3: मनसे को कितनी सीटें मिलने की संभावना है?
    👉 करीब 80 से 90 सीटें।

    Q4: क्या एनसीपी (शरद पवार) भी गठबंधन में शामिल होगी?
    👉 बातचीत चल रही है, 15–20 सीटें दिए जाने की संभावना है।

  • मुंबई BMC चुनाव तैयारी तेज, अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश

    मुंबई BMC चुनाव तैयारी तेज, अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश

    BMC चुनाव 2025 की तैयारियों में तेजी। अतिरिक्त आयुक्त डॉ. अश्विनी जोशी ने अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने और शिकायतों की现场 जांच के निर्देश दिए।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2025 की तैयारियों को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह एक्टिव हो चुका है। सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) डॉ. अश्विनी जोशी ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे आपस में लगातार संवाद रखें और चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही ना हो।

    बैठक के दौरान उन्होंने सभी अधिकारियों से कहा कि मतदाता सूची से संबंधित आपत्तियों और सुझावों की जांच (Field Verification) करके ही निर्णय लिया जाए ताकि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी, सटीक और सुनियोजित रहे।

    📍 प्रारंभिक मतदाता सूची पर हो रही कार्रवाई

    बैठक में BMC के सह आयुक्त, उपायुक्त, सहायक आयुक्त, उपचुनाव अधिकारी और प्रशासनिक विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
    इस दौरान चुनाव संबंधी प्रगति, मतदाता सूची अपडेट और दर्ज शिकायतों की स्थिति की समीक्षा की गई।

    डॉ. जोशी ने कहा:

    “यह चुनाव करीब आठ साल बाद हो रहा है, इसलिए हर चरण बेहद गंभीरता और नियमों के तहत पूरा होना चाहिए।”

    ⚠️ फील्ड विजिट बिना नहीं हटेगा नाम

    चुनाव विभाग को नागरिकों से मृत मतदाताओं के नाम हटाने की मांग और गलत पते पर दर्ज मतदाताओं को लेकर कई शिकायतें मिल रही हैं।

    इस पर निर्देश दिया गया कि:

    • मृत मतदाताओं के नाम हटाने से पहले मृत्यु प्रमाणपत्र और BMC रिकॉर्ड से मिलान किया जाए।
    • पता गलत या विवादित होने पर सर्वे के बाद ही सुधार किया जाए।

    🗳️ मतदान केंद्र सूची 12 दिसंबर तक अनिवार्य

    डॉ. जोशी ने अधिकारियों से कहा कि:

    • 12 दिसंबर 2025 तक सभी मतदान केंद्रों की अंतिम सूची चुनाव शाखा में जमा होनी चाहिए।
    • जहां पुरानी इमारतें गिर चुकी हैं, वहां वैकल्पिक मतदान केंद्र तुरंत प्रस्तावित किए जाएं।
    • हाउसिंग सोसायटियों में बनाए गए मतदान केंद्रों के लिए No Objection Certificate (NOC) अनिवार्य होगा।

    ⚖️ गैर-सहयोग करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई

    उन्होंने चेतावनी दी कि:

    “जो कर्मचारी चुनावी कार्य में सहयोग नहीं करेंगे या कार्य से बचने की कोशिश करेंगे, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।”


    ❓ FAQ Section

    प्रश्नउत्तर
    BMC चुनाव कब होने वाले हैं?आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं है, लेकिन तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।
    मतदाता सूची में बदलाव कैसे किया जाएगा?现场 सत्यापन और दस्तावेज़ों के आधार पर संशोधन किए जाएंगे।
    पुरानी इमारत गिर चुकी होने पर मतदान केंद्र कहाँ होगा?उसके स्थान पर वैकल्पिक मतदान केंद्र तय किए जाएंगे।
    कर्मचारी चयन से इनकार कर सकते हैं?नहीं, ऐसा करने वालों को नोटिस भेजा जाएगा।

  • मुंबई कांग्रेस ने BMC चुनाव के लिए संसदीय जांच समिति बनाई

    मुंबई कांग्रेस ने BMC चुनाव के लिए संसदीय जांच समिति बनाई

    मुंबई कांग्रेस ने BMC चुनाव के लिए जिलानुसार संसदीय जांच समिति गठित की है, जो उम्मीदवारों की छानबीन, मार्गदर्शन और पैनल तैयार करने का काम करेगी।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव की तैयारियों को गति देते हुए मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी ने संसदीय जांच समिति का गठन कर दिया है। इस समिति का उद्देश्य सभी जिलों में संभावित उम्मीदवारों के आवेदन की पड़ताल करना, उनका मार्गदर्शन करना और अंतिम पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजना है। यह समिति मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा एकनाथ गायकवाड़ के आदेश से गठित की गई है। जानकारी कांग्रेस प्रवक्ता व मीडिया समन्वयक सुरेशचंद्र राजहंस ने दी।

    समिति का मुख्य कार्य

    नई गठित समिति जिलानुसार बैठकों के माध्यम से निम्न कार्य करेगी—

    • उम्मीदवारों के आवेदन की विस्तृत छानबीन
    • जिला अध्यक्षों व जात वैधता समितियों के साथ समन्वय
    • योग्य उम्मीदवारों की सूची और पैनल तैयार करना
    • आवेदन भरने में उम्मीदवारों को मार्गदर्शन
    • उम्मीदवारों की मुलाकात कर अंतिम पैनल वरिष्ठ नेतृत्व को सौंपना

    जिलावार प्रभारी और सहप्रभारी शामिल

    मुंबई कांग्रेस ने विभिन्न जिलों के अनुसार प्रभारी और सहप्रभारी नियुक्त किए हैं। सूची इस प्रकार है—

    दक्षिण मुंबई जिला

    • प्रभारी: विधायक ज्योति गायकवाड़
    • सहप्रभारी: मोहसिन हैदर, आसिफ जकेरिया

    दक्षिण मध्य मुंबई जिला

    • प्रभारी: सचिन सावंत
    • सहप्रभारी: सुरेशचंद्र राजहंस, डॉ. किशोर सिंह

    उत्तर मध्य मुंबई जिला

    • प्रभारी: MLA अस्लम शेख
    • सहप्रभारी: विरेंद्र चौधरी, डॉ. अंजता यादव

    ईशान्य मुंबई जिला

    • प्रभारी: डॉ. अर्जित सिंह मनहास
    • सहप्रभारी: धनंजय तिवारी, एड. राजेश टेके

    उत्तर पश्चिम मुंबई जिला

    • प्रभारी: विधायक अमीन पटेल
    • सहप्रभारी: हाजी बब्बू खान, विष्णु सरोदे

    उत्तर मुंबई जिला

    • प्रभारी: मधु चव्हाण
    • सहप्रभारी: अर्शद आज़मी, क्लाइव डॉयस

    BMC चुनाव के संदर्भ में इसका महत्व

    BMC चुनाव में टिकट चयन हमेशा से कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण मुद्दा रहा है। इस बार पार्टी संगठन उम्मीदवार चयन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी उद्देश्य से संसदीय जांच समिति गठित की गई है, ताकि सभी जिलों में योग्य, मजबूत और सक्रिय कार्यकर्ताओं को बेहतर प्रतिनिधित्व मिले।


    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    1. संसदीय पडताळणी समिति क्यों बनाई गई है?

    उम्मीदवारों की छानबीन, मार्गदर्शन और अंतिम पैनल तैयार करने के लिए यह समिति गठित की गई है।

    2. समिति में कौन-कौन शामिल हैं?

    मुंबई के विभिन्न जिलों के प्रभारी और सहप्रभारी इसमें शामिल हैं, जैसे MLA अस्लम शेख, अमीन पटेल, ज्योति गायकवाड़ सहित कई वरिष्ठ नेता।

    3. यह समिति क्या काम करेगी?

    उम्मीदवारों के आवेदन की जांच, उनकी मुलाखत, पैनल तैयार करना और वरिष्ठ नेतृत्व को अनुशंसा भेजना।

    4. समिति का गठन किसने किया?

    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा एकनाथ गायकवाड़ के आदेश पर समिति बनाई गई है।

    5. क्या यह समिति उम्मीदवारों को आवेदन भरने में मदद करेगी?

    हाँ, जिल्हा समिति के साथ मिलकर यह समिति उम्मीदवारों को पूरा मार्गदर्शन देगी।

  • BMC ELECTION में कांग्रेस अकेले उतरने पर कायम; महाविकास अघाडी की एकता पर संकट

    BMC ELECTION में कांग्रेस अकेले उतरने पर कायम; महाविकास अघाडी की एकता पर संकट

    BMC ELECTION में कांग्रेस की अकेले लड़ने की घोषणा से महाविकास आघाड़ी (MVA) में असहजता बढ़ गई है। शिवसेना (UBT) की मनसे से नज़दीकी को लेकर कांग्रेस की असहमति सामने आई, जबकि एनसीपी (SP) गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने के पक्ष में है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव को लेकर कांग्रेस के अकेले लड़ने के फैसले ने महाविकास आघाड़ी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस का कहना है कि शिवसेना (UBT) की मनसे के साथ बढ़ती राजनीतिक नज़दीकियां उनके उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकती हैं। हालांकि शिवसेना (UBT) कांग्रेस से पुनर्विचार की अपील कर रही है, जबकि एनसीपी (शरद पवार) मनसे को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की पक्षधर है। इस राजनीतिक खींचतान ने आगामी मनपा चुनावों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।

    कांग्रेस के फैसले से MVA में हलचल

    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने साफ कहा है कि कांग्रेस बीएमसी चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी। इससे MVA में असहजता बढ़ी है, क्योंकि गठबंधन का मकसद भाजपा को रोकना था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के अकेले लड़ने से वोटों का बंटवारा होगा, जिससे भाजपा को सीधी बढ़त मिल सकती है।

    मनसे को लेकर कांग्रेस की बड़ी चिंता

    कांग्रेस की असहमति की सबसे बड़ी वजह है—
    🔹 शिवसेना (UBT) और मनसे की बढ़ती समीपता
    🔹 उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक का संभावित नुकसान

    कांग्रेस का मानना है कि मनसे के साथ जुड़ाव उसकी विचारधारा के विपरीत है, क्योंकि मनसे पहले उत्तर भारतीयों के खिलाफ आक्रामक रुख के लिए जानी जाती रही है।

    कांग्रेस में भी दो धड़े, राय में मतभेद

    कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति भी खुलकर सामने आई है।
    एक धड़ा — स्थानीय समीकरण के आधार पर मनसे के साथ गठबंधन का समर्थक
    दूसरा धड़ा — मनसे के साथ किसी भी सूरत में गठबंधन के खिलाफ

    मुंबई के राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस को जल्द स्पष्ट रुख लेना होगा, वरना गैर-मराठी और गैर-हिंदू वोटों का विभाजन भाजपा के लिए रास्ता आसान बना देगा।

    एनसीपी (SP) एकता के पक्ष में

    एनसीपी (शरद पवार) गठबंधन की मजबूती के लिए MNS को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की वकालत कर रही है। इसी संदर्भ में वर्षा गायकवाड़ की टीम ने शरद पवार से मुलाकात भी की है, लेकिन कांग्रेस अपने निर्णय पर कायम है।

    शिवसेना (UBT) ने किया पुनर्विचार का आग्रह

    उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना कांग्रेस को साथ रखने की कोशिश जारी रखे हुए है। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा—
    🔹 “मनसे के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस की नाराज़गी व्यक्तिगत मामला हो सकता है।”
    🔹 “जनता चाहती है कि शिवसेना और मनसे साथ आएं।”

    दूसरी ओर, मनसे ने MVA में शामिल होने से इनकार करते हुए कांग्रेस को “अमीबा” कहा, जिस पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए “गिरगिट” जैसी टिप्पणी की।

    बीएमसी चुनाव — बड़ा राजनीतिक समीकरण

    • राज्य की 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायतों के चुनाव 2 दिसंबर को
    • बीएमसी के चुनाव जनवरी 2026 में होने की संभावना
    • वर्तमान हालात में भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में दिख रही है
    • कांग्रेस के अकेले उतरने से विपक्ष का वोट बैंक टूट सकता है

    FAQ

    प्रश्नउत्तर
    क्या कांग्रेस MVA से अलग हो रही है?नहीं, गठबंधन बरकरार है, लेकिन बीएमसी चुनाव कांग्रेस स्वतंत्र रूप से लड़ना चाहती है।
    कांग्रेस मनसे के साथ क्यों नहीं है?कांग्रेस का कहना है कि मनसे के पुराने रुख से उसके परंपरागत वोटरों को नुकसान हो सकता है।
    क्या विपक्षी वोट बंटेंगे?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फैसले से भाजपा को सीधा लाभ मिल सकता है।
    क्या अंतिम निर्णय बदल सकता है?शिवसेना (UBT) लगातार आग्रह कर रही है, लेकिन इस समय कांग्रेस अपने फैसले पर अडिग है।
  • BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    महाराष्ट्र में महायुती सरकार ने BMC चुनाव से पहले शिव भोजन थाली योजना को फिर शुरू किया है। गरीबों को ₹10 में ₹50 की थाली मिलेगी। जानिए कैसे मिला ₹70 करोड़ का बजट, किन जिलों में खुले रहेंगे केंद्र, और क्या हैं सरकार के नए नियम।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र और मुंबई के गरीब नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। महा यूती सरकार ने फिर से ‘शिव भोजन थाली योजना’ को शुरू करने का ऐलान किया है, जो पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (MVA) सरकार ने शुरू की थी।
    यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली मुहैया कराती है। चुनावी मौसम में इस फैसले को गरीब वर्ग तक पहुंचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    🔹 योजना का बजट और फंड रिलीज़

    • सरकार ने इस योजना के लिए ₹70 करोड़ का बजट तय किया है।
    • इसमें से ₹28 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है, जबकि सितंबर में ₹21 करोड़ पहले ही वितरित किए गए थे।
    • वित्त विभाग की अनुमति के बाद 10 दिनों के भीतर फंड खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं, नहीं तो राशि वापस ली जाएगी।
    • योजना को लागू करने की ज़िम्मेदारी अन्न व नागरी पुरवठा विभाग को दी गई है।

    🔹 क्या है ‘शिव भोजन थाली’ योजना?

    • शुरुआत: 26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने की थी।
    • उद्देश्य: गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराना।
    • लागत: शुरू में थाली ₹5 में मिलती थी, बाद में ₹10 कर दी गई।
    • कोविड-19 के दौरान: थाली फ्री में दी जाती थी।
    • वर्तमान स्थिति: ₹50 की थाली अब ₹10 में दी जाएगी, बाकी ₹40 का भुगतान सरकार करेगी।
    • राज्यभर में पहले 1,904 केंद्रों से रोज़ाना 2 लाख थालियाँ वितरित होती थीं।

    🔹 ऑपरेटर्स की दिक्कतें और सरकार का नया कदम

    पिछले कई महीनों से योजना ठप होने के कारण शिव भोजन केंद्र चालकों के भुगतान रुके हुए थे, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ा।
    इस मुद्दे को NCP नेता और मंत्री छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष उठाया।
    इसके बाद सरकार ने योजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया और ₹21 करोड़ का तत्काल अनुदान जारी किया।

    साथ ही, भ्रष्टाचार रोकने के लिए सभी शिव भोजन केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि भोजन वितरण में गड़बड़ी न हो।

    🔹 राजनीतिक पृष्ठभूमि: BMC चुनाव से पहले बड़ा दांव

    राज्य सरकार का यह फैसला BMC और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों से पहले लिया गया है।
    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
    MVA के दौरान शुरू की गई इस योजना को महा यूती सरकार द्वारा बंद करने पर पहले काफी आलोचना हुई थी।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. शिव भोजन थाली योजना क्या है?
    यह महाराष्ट्र सरकार की सामाजिक योजना है, जिसके तहत गरीबों को मात्र ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली दी जाती है।
    Q2. इस योजना को कब शुरू किया गया था?
    26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने इसे लॉन्च किया था।
    Q3. क्या यह योजना बंद कर दी गई थी?
    हाँ, मार्च 2025 में महायुती सरकार ने वित्तीय कारणों से इसे बंद कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है।
    Q4. वर्तमान में थाली की लागत और सब्सिडी क्या है?
    थाली की कुल लागत ₹50 है। लाभार्थी ₹10 देते हैं, जबकि ₹40 सरकार वहन करती है।
    Q5. कितने केंद्रों पर यह योजना चल रही है?
    राज्यभर में लगभग 1,904 शिव भोजन केंद्र सक्रिय हैं, जहाँ रोज़ाना लाखों गरीब भोजन करते हैं।

  • ‘अखंड शिवसेना’: बालासाहेब के करीबी सहयोगी ने उद्धव, राज, एकनाथ से हाथ मिलाने और गठबंधन बनाने का आग्रह किया।

    ‘अखंड शिवसेना’: बालासाहेब के करीबी सहयोगी ने उद्धव, राज, एकनाथ से हाथ मिलाने और गठबंधन बनाने का आग्रह किया।

    महाराष्ट्र की राजनीति में क्या बड़ा बदलाव होने जा रहा है? ऐसी राजनैतिक गलियारों में गरमागरम खुसफुसाहट होने लगी है। हालही में पुरानी शिवसेना को अखंड शिवसेना के निर्माण के लिए सभी प्रमुख नेताओं को हाथ मिलाने का आग्रह पूर्व गृहमंत्री और बालासाहेब ठाकरे के खासमखास नेता ने पेशकश की है। ‘Akhand Shiv Sena’: Balasaheb’s close aide urges Uddhav, Raj, Eknath to join hands and form alliance.

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र की सबसे बड़ी राजनैतिक दल शिवसेना को एकबार फिर समेटते हुए अखंड शिवसेना बनाने की खुसफुसाहट राजनैतिक हलचल बना हुआ है। यहां राज्य के पूर्व गृहमंत्री जिन्होंने उद्धव बालासाहेब ठाकरे, एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे को एक होकर हाथ मिलाने और गठबंधन करने का आग्रह किया है। यह वही नेता हैं, जो कभी स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के खासमखास हुआ करते थे। इन्होंने शिवसेना के एक प्रमुख मोर्चे की स्थापना की जो आज भी राज्य के भुमिपुत्रों के लिए काम करता है।

    क्या है उनकी पहचान?

    यह वही नेता हैं जो स्वर्गीय बालासाहेब से प्रेरित होकर वे शिवसेना में शामिल हुए थे। बाद में स्थानीय लोकाधिकार समिति की स्थापना की, जो शिवसेना का एक मोर्चा है जो भूमिपुत्रों के लिए काम करता है। राज्य के मराठी माणूस का इस समिति को इतना प्रतिसाद मिला कि देखते ही देखते लाखों की संख्या में इससे लोग जुड़ने लगे। इसी स्थानीय लोकाधिकार के कारण मराठी माणूस को बँक मे नौकरी मिलना आसान हो गया। इसी समिति के माध्यम से शिवसेना को बढावा मिला और अच्छे कार्यकर्ता भी प्राप्त हुए, इनमे अरविंद सावंत और भाई पोतनीड जैसे कई नेता उभरकर सामने आये।

    अखंड शिवसेना का निर्माण

    इसी कारण स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे ने 1996-97 में पहली बार युती की सरकार बनाई और उन्हें गृहराज्यमंत्री के पद से नवाजा। आज उन्होंने एकबार फिर पुरानी शिवसेना के दिग्गज नेताओं को साथ लाने और हाथ मिलाकर ‘अखंड शिवसेना’ के निर्माण के लिए तीनों नेताओं को गठबंधन में आने का आग्रह किया है।

    चुनाव की तैयारी

    राज्य में नगर निगम चुनाव होने जा रहे हैं। राज्य में सत्ता पक्ष भाजपा के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना गठबंधन में होने के बावजूद कहीं साथ तो कहीं अलग होकर चुनाव लड़ने की अटकलें लग रहे हैं। वहीं बृहन्मुंबई महानगर पालिका की सत्ता पर हमेशा से काबिज़ रहनेवाली उद्धव की शिवसेना गुटबाजी के कारण कमजोर दिखाई पड़ने लगी है। राज ठाकरे भी कभी शिवसेना का बड़ा चेहरा हुआ करते थे। लेकिन पारिवारिक विवाद के चलते उन्होंने ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना‘ का निर्माण किया और शिवसेना के कई दिग्गज नेताओं को अपने ले गये। बाद में उन्होंने एक मजबूत नेतृत्व कायम किया। लेकिन समय के चलते आज महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी कमजोर साबित हो रही है। ऐसे में स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के करीबी नेता का इन तीनों दिग्गज नेताओं को गठबंधन के लिए एकत्रित करना, ‘अखंड शिवसेना’ के उदय की संभावना प्रबल कर रहा है ऐसा राजनैतिक विशेषज्ञों द्वारा विश्वास जताया जा रहा है।

  • BMC चुनाव से पहले शिवसेना ने BJP को शर्तों में उलझाया

    BMC चुनाव से पहले शिवसेना ने BJP को शर्तों में उलझाया

    BMC चुनाव से पहले शिवसेना और बीजेपी में गठबंधन को लेकर नई खींचतान शुरू हो गई है। शिवसेना मुंबई में बीजेपी को समर्थन देने के लिए तैयार है, लेकिन बदले में ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में भी बीजेपी का समर्थन चाहती है। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    आगामी कुछ ही दिनों में चुनाव आयोग महाराष्ट्र में पार्षदों के चुनाव की अधिसूचना जारी करने वाला है। 6 मई को सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर चुनाव की तारीख जारी करने के आदेश दिए थे। चुनाव की तैयारियों के बीच महायुति गठबंधन में तोलमोल शुरू हो गए हैं। शिंदे की शिवसेना ने चुनाव से पहले बीजेपी के सामने अपनी शर्तों को रख दिया है। शिवसेना का कहना है कि अगर बीजेपी बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव में गठबंधन चाहती है, तो उसे ठाणे और कल्याण-डोंबिवली (KDMC) में भी ऐसा ही करना होगा। शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर दबाव बनाने के लिए उद्धव ठाकरे गुट के पार्षदों को शामिल करा रही है, ताकि गठबंधन नहीं होने की स्थिति में उन्हें चुनाव में उतारा जा सके। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions

    शिवसेना की शर्त क्या है?

    महाराष्ट्र निकाय चुनाव में गठबंधन को लेकर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि बीजेपी पूरे प्रदेश में गठबंधन नहीं करेगी। इसके जवाब में शिवसेना ने भी अपनी चाल चल दी है और बीएमसी चुनाव के साथ अन्य नगर निगमों के चुनाव में भी गठबंधन का दबाव बना दिया है। शिवसेना के नेताओं ने कहा, कि बीजेपी मुंबई में गठबंधन करना चाहती है तो उसे ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में भी शिवसेना का साथ देना होगा। अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी बीएमसी की सत्ता में आ सकती है और शिवसेना ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में अपना दबदबा बनाए रख सकती है। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions

    भाजपा को मुंबई में होगा नुकसान

    शिवसेना नेता ने कहा कि अगर बीजेपी अकेले बीएमसी चुनाव में उतरेगी तो उसे नुकसान होना तय है। मुंबई में बीजेपी उद्धव ठाकरे की सेना यूबीटी के खिलाफ चुनाव लड़ेगी मगर उसे एकनाथ शिंदे की शिवसेना और मनसे के साथ भी दो-दो हाथ करना पड़ेगा। ऐसे में वोट बंट सकते हैं और बीजेपी को बीएमसी की सत्ता हासिल नही हो सकेगी। ऐसे में उसे शिवसेना का समर्थन लेना होगा। शिवसेना नेता ने साफ किया कि बीजेपी मुंबई में दबदबा बनाना चाहती है। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में मजबूत होना चाहती है। इन इलाकों में हमारी पार्टी वहां मजबूत है और हम चाहते हैं कि यह ऐसा ही बना रहे। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions

    उद्धव गुट के 45 पार्षद शिंदे गुट में शामिल

    जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई, तो मुंबई के ज्यादा पार्षद उनके साथ नहीं गए। अब बृहन्मुंबई महानगर पालिका का कार्यकाल खत्म हो गया है। एकनाथ शिंदे ने उद्धव गुट के लगभग 45 पार्षदों को अपनी तरफ कर लिया है। शिवसेना की इस रणनीति से बीजेपी पर दबाव बढ़ रहा है। शिंदे बीजेपी को यह जताना चाहते हैं कि अगर वह ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में गठबंधन नहीं करती है, तो शिवसेना पुराने पार्षदों को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव में उतार सकती है। इस वजह से बीजेपी को नुकसान हो सकता है। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions