डिजिटल डेस्क मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में कामकाजी लोगों को जल्द ही भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेनों के अलावा दूसरा विकल्प मिलने वाला है। शहर में डबल-डेकर मेट्रो लाइन-9, जिसे रेड लाइन भी कहा जाता है, शुरू किया जा रहा है। यह मेट्रो दहिसर पूर्व से मीरा-भायंदर तक दौड़ेगी और उत्तरी उपनगरों को दक्षिणी मुंबई और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) के साथ-साथ अंधेरी जैसे प्रमुख व्यावसायिक इलाकों से जोड़ेगी। लगभग 13.58 किलोमीटर लंबी इस लाइन में 11.38 किलोमीटर एलिवेटेड और 2.19 किलोमीटर अंडरग्राउंड हिस्सा होगा। परियोजना पूरी होने पर यात्रियों को ट्रैफिक की परेशानी से राहत मिलेगी और समय की बचत के साथ यात्रा हो सकेंगी। Double-decker metro will make travelling easier in Mumbai
मेट्रो 9 में क्या होगी खासियत?
मेट्रो-9 पर कुल 10 मेट्रो स्टेशन बन रहे हैं—दहिसर पूर्व, पांडुरंग वाडी, मीरागांव (अमर पैलेस), काशीगांव (झनकार कंपनी), साईं बाबा नगर, मेडिटिया नगर (दीपक हॉस्पिटल), शहीद भगत सिंह गार्डन (मैक्सस मॉल), सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम, एमबीएमसी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और इंद्रलोक। यह लाइन ठाणे जिले के कुछ हिस्सों को भी कवर करेगी, जिससे मीरा-भायंदर और आसपास के सफर करने वाले लोगों को बड़ा फायदा होगा। Double-decker metro will make travelling easier in Mumbai
कहां कहां जुड़ेगा मेट्रो 9
मेट्रो-9 को कई अन्य लाइनों से जोड़े जाने वाला है। दहिसर पूर्व में इसे मेट्रो लाइन-7 (दहिसर पूर्व–अंधेरी पूर्व) और मेट्रो लाइन-2A (दहिसर पश्चिम–डीएन नगर) से कनेक्ट किया जाएगा। इसके अलावा, यह कोलाबा-बांद्रा-सीप्ज़ कॉरिडोर (मेट्रो-3) से भी जुड़ने वाला है, जो पूरी तरह अंडरग्राउंड रहेगा। इस कनेक्टिविटी से यात्री दहिसर से कोलाबा, बीकेसी और अंधेरी तक बिना सड़क ट्रैफिक के जल्दी पहुंच सकेंगे। उदाहरण के तौर पर, दहिसर से कोलाबा तक का सफर मेट्रो-9, मेट्रो-7 और मेट्रो-3 के जरिये आसानी से किया जा सकेगा। Double-decker metro will make travelling easier in Mumbai
मेट्रो-9 में 8-कोच के ट्रेन होंगे, जिनमें 2,352 यात्री बैठ सकेंगे। यह सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक चलेगी। पीक आवर्स में हर 5-7 मिनट और सामान्य समय में हर 8 से 10 मिनट पर ट्रेन उपलब्ध होगी। मेट्रो-9 और -7A की कुल लागत लगभग 6,607 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मई 2025 तक परियोजना का 96-97% सिविल कार्य और 75% सिस्टम इंटीग्रेशन पूरा हो चुका है। दहिसर पूर्व से काशीगांव (4.4 किमी) तक पहले चरण का ट्रायल रन शुरू हो गया है और यह खंड 2025 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है, जबकि पूरी लाइन 2026 के अंत तक परिचालन किया जा सकता है।
मुंबई: शहर की उपनगरीय ट्रेनें अब 2025 के अंत तक कवच से लैस होने जा रही है। इसके तहत यात्रियों की सुरक्षा में सुधार के लिए एक आधुनिक सुरक्षा प्रणाली तैयार होने वाली है। खबर के मुताबिक, पश्चिमी रेलवे के मार्गों पर कवच लगाने का काम शुरू हो चुका है। अगले साल के अंत तक सभी उपनगरीय ट्रेनों और मुख्य लाइन के इंजनों पर इसे लगाने की योजना है। खास बात यह है कि यात्रियों के किराये में कोई इजाफा नही होगा।
प्रमुख रेल मार्गों पर शुरु है कवच
यह प्रणाली वर्तमान में दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर जैसे प्रमुख रेल मार्गों पर लगाई जा रही है और यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल का हिस्सा है। मुंबई-अहमदाबाद लाइन इस वित्तीय वर्ष के अंत तक तैयार होने की उम्मीद है। रिपोर्टों से पता चलता है कि यह ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। Mumbai local trains to have Kavach security system
लगभग 30 लाख लोग प्रतिदिन पश्चिमी रेलवे (Western Railway) की उपनगरीय सेवाओं का उपयोग करते हैं। यह चर्चगेट-विरार-दहानू मार्ग पर 110 इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट्स के बेड़े के साथ 1,400 से अधिक ट्रेन सेवाओं का संचालन करता है। रेलवे की योजना 2025 तक 2,358 किलोमीटर से अधिक ट्रैक पर कवच लगाने की है।
कवच एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। यह सहायक चेतावनी प्रणाली की जगह लेगा, जिसका इस्तेमाल वर्तमान में ट्रेनों में सुरक्षा उपकरण के रूप में किया जाता है। Mumbai local trains to have Kavach security syste
नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने दिल्ली मुंबई हाईवे पर आपको कई जगहों पर ‘अपना घर’ नाम से इमारतों का निर्माण कर रही है। इन इमारतों को हाईवे पर चलने वाली गाड़ियों की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल लंबी दूरी के हाईवे पर नींद आने की वजह से सड़क दुर्घटना बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब ट्रक ड्राइवरों को ढाबे के पीछे या सड़क के किनारे सोने की जरूरत न पड़े, इसलिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ‘अपना घर’ नाम से आधुनिक और सुरक्षित रेस्ट एरिया तैयार किया गया है। यहां उन्हें आराम करने, नहाने, खाना बनाने और नींद पूरी करने के लिए घर जैसा माहौल मिलेगा। हालांकि इसके लिए किमत अदा करनी पडेगी। लेकिन इसका किराया बहोत ही ज्यादा कम होने वाला है। The government has built ‘Apna Ghar’ on the Delhi-Mumbai highway, people will get facilities in it during the journey
नींद की वजह से होती हैं दुर्घटना
भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें से लगभग 1.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। 70% हादसे ड्राइवर की थकान और नींद पूरी न होने की वजह से होते हैं। लंबी दूरी पर चलने वाले ट्रक ड्राइवर अक्सर बिना आराम किए चलते रहते हैं। इसकी वजह से उनकी सेहत पर असर पड़ता है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। NHAI कोटा के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने बताया, कि “ट्रक ड्राइवर लगातार सफर करते हैं और ठीक से सो नहीं पाते। इसके कारण सड़क दुर्घटना होती है। इसी के कारण अपना घर योजना की शुरुआत की गई, ताकि वे सुरक्षित जगह पर आराम कर सकें और हादसे से बच सकें।” The government has built ‘Apna Ghar’ on the Delhi-Mumbai highway, people will get facilities in it during the journey
न्यूज़ डेस्क मुंबई- बम्बई शहर और आस-पास के गरीब तबके के लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं पर इलाज के लिए एक मात्र सरकारी अस्पताल इन दिनों दवाई संकट से जूझ रहा है। जबकि यहां बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) द्वारा संचालित अस्पतालों की दवाइयां हमेशा से ही लोगों के इलाज में सटीक साबित हुई। प्राइवेट अस्पतालों के मुकाबले सरकारी अस्पताल के एक ही डोज से मरीज ठिक हो जाया करता है। लेकिन इन सरकारी अस्पतालों में दवाइयां उपलब्ध नही होने के कारण शहर भर के लोगों पर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा मंडराने लगा है। (BMC News Medicines will no longer be available in government hospitals of Mumbai)
क्या है पूरा मामला?
मुंबई के बीएमसी द्वारा संचालित अस्पतालों को दवा आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने 120 करोड़ रुपये के बकाया नही मिलने के कारण डिलीवरी को निलंबित (Suspended) करने की धमकी दी है। यह कृष्णा डायग्नोस्टिक्स द्वारा आपली चिकित्सा योजना के तहत अपनी पैथोलॉजी सेवाओं को बंद करने के कुछ समय बाद हुआ है, जिसमें बकाया भुगतान नही किए जाने का का हवाला दिया गया था। (BMC News Medicines will no longer be available in government hospitals of Mumbai)
सोमवार से नही होगी दवाई की सप्लाई
बीएमसी अस्पतालों में दवाई सप्लाई करने वाली 150 से अधिक कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली ऑल फूड एंड ड्रग्स लाइसेंस होल्डर फाउंडेशन (AFDLH Fondation) ने सोमवार 13 जनवरी यानी कल से दवाइयों की सप्लाई रोकने की घोषणा की है। कहा, कि यदि उनके चार महीने से लंबित 120 करोड़ रूपये का भुगतान नहीं किया जाता है। तो कोई भी कंपनी सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की सप्लाई नही करेगा। इस निर्णय के कारण बम्बई के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह से बाधित कर सकता है। इसमें बम्बई ही नही बम्बई और आस-पास को लोग भी स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करवा रहे हैं। (BMC News Medicines will no longer be available in government hospitals of Mumbai)
AFDLH Fondation के अध्यक्ष अभय पांडे ने आपूर्तिकर्ताओं के सामने मौजूद गंभीर वित्तीय स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमारे सदस्य वित्तीय बर्बादी के कगार पर हैं।” पश्चिमी उपनगरों के एक विक्रेता ने स्थिति पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “भुगतान में देरी असहनीय हो गई है। बीएमसी अस्पतालों को आपूर्ति करना एक निरंतर संघर्ष बन गया है, बार-बार याद दिलाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।” (BMC News Medicines will no longer be available in government hospitals of Mumbai)
BMC ने क्या कहा?
बृहन्मुंबई महानगर पालिका के आयुक्त भूषण गगरानी को लिखे एक औपचारिक पत्र में संस्था ने वित्तीय तनाव की रूपरेखा प्रस्तुत की। पत्र में कहा गया है, कि “बकाया राशि के कारण हमारे सदस्य भारी दबाव में हैं। बार-बार संपर्क करने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ है। भुगतान पूरा होने तक आपूर्ति स्थगित करने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।” इस बीच, बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग के उपायुक्त संजय कुर्हाड़े ने आश्वासन दिया, कि “इस मुद्दे को सुलझाने और संकट को हल करने के लिए प्रयास जारी हैं।” (BMC News Medicines will no longer be available in government hospitals of Mumbai)
राज्य की महिलाओं ने महायुति को चुनाव तो जिता दिया, लेकिन अब तक उनके खाते में 2100 रुपये की रकम नहीं आई। और तो और 1500 देने मे भी सरकार आना-कानी कर रही है। राज्य के कृषि मंत्री ने यहां तक कह दिया कि लाडकी बहिन योजना की वजह से किसानों की कर्जमाफी योजना प्रभावित हो रही है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना’ अब विवादों में आ गई है। विधानसभा चुनाव में वादा किया गया था कि चुनाव जीतने के बाद इस योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी। लेकिन चुनाव जीतते ही इस योजना के लाभार्थियों की जांच शुरू कर दी गई। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)
कहां हुई गडबडी ?
आरोप है कि बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस योजना के तहत दो बार पंजीकरण कराया और दो बार पैसे भी ले लिए। एक ही घर की 4 से 5 महिलाओं ने इस योजना का लाभ उठाया। जिनके पास 4 पहिया वाहन हैं वे भी लाभार्थी बन गईं और जो शादी करके दूसरे राज्य में चले गए है उन लोगों ने भी इस योजना का फायदा उठा लिया। इतना ही नहीं, जिनकी सालाना आय 2.5 लाख से अधिक है वो भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। अब सरकारी यंत्रणा ऐसे लाभार्थियों की सूची बनाकर उन्हें इस योजना से हटा रही है। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)
अब तक 1.5 करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना से जुड़ चुकी हैं, जबकि सूची छांटने के बाद यह संख्या करीब 25 लाख कम हो जाएगी. वहीं, राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे का कहना है कि पात्र लाभार्थियों को क्रॉस वेरिफिकेशन प्रक्रिया से परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले 2 महीनों में हमारे पास लाडकी बहिन योजना लाभार्थियों के बारे में कुछ शिकायतें मिली हैं, जिनके आधार पर क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा। आईटी विभाग की मदद ली जा रही है। आधार कार्ड का क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)
महाराष्ट्र सरकार की ‘माझी लाडकी बहिन योजना’ को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी फायदे के लिए बिना उचित जांच के इस योजना को शुरू कर दिया गया, जिसके कारण अपात्र लाभार्थियों को भी इसका फायदा मिला। शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि सरकार ने वोट पाने के लिए मानदंडों को सख्ती से लागू किए बिना लाभार्थियों को पैसे बांटे। राउत ने यह भी कहा, कि ‘वह सिर्फ चुनावी नारा था, चुनाव से पहले पैसे देकर वोट लिए गए, उसके बाद मामला खत्म हो गया।’ (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)
उन्होंने कहा, ‘इस बात को सभी लोग जानते हैं कि हमारे घर में भी महिलाएं हैं। महिलाओं को दिया जाने वाला पैसा अब सिर्फ प्रपंच पर खर्च होता है। लड़की बहन योजना का पैसा भी इधर-उधर किया गया। बच्चों के लिए ये लो, उनके लिए वो लो। बेकार का खर्च, और कुछ नहीं.’ उनका कहना है कि जो महिलाएं मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना में सरकारी पैसा ले रही हैं, उन्हें किसान सम्मान योजना में पैसा नहीं लेना चाहिए। मुझे बताइए कि एक महिला दो सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे ले सकती है? सरकार को इस पर जीआर लाना चाहिए। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)
क्या बंद हो जाएगा मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना ?
मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना को लेकर विवादों के बीच लोगों में इस योजना को बंद किए जाने को लेकर चर्चाऐ आम होने लगी है। लोगों को अब लगने लगा है कि शायद महायुति की सरकार ने लोगों को ‘चुनावी जुमले’ जैसे वादों मे फंसा कर धोखा दिया है और अब चुनाव मे जीत हासिल करने के बाद पैसा देना बंद कर दिया है। वहीं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया है कि इस योजना को बंद नहीं किया जाएगा और पात्र लाभार्थियों को सहायता मिलती रहेगी। उन्होंने कहा, कि सरकार ने लाडकी बहिन योजना शुरू की थी, लेकिन विपक्ष ने इसमें बाधा डालने की कोशिश की। फिलहाल ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना’ को बंद नहीं किया गया है। हालांकि, सरकार ने संकेत दिया है कि पात्रता मानदंडों की सख्ती से जांच की जाएगी ताकि केवल पात्र लाभार्थियों को ही इसका लाभ मिल सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजना का उद्देश्य सही लाभार्थियों तक पहुंचे और किसी भी तरह की अनियमितता से बचा जा सके। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)