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  • मुंबई स्लम रीडेवलपमेंट: सुप्रीम कोर्ट ने जमीन मालिक के अधिकार को माना, सरकारी अधिग्रहण नोटिस रद्द

    मुंबई स्लम रीडेवलपमेंट: सुप्रीम कोर्ट ने जमीन मालिक के अधिकार को माना, सरकारी अधिग्रहण नोटिस रद्द

    सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के कुर्ला इलाके की जमीन पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि स्लम रीडेवलपमेंट में जमीन मालिक का पहला अधिकार है। कोर्ट ने 2018 के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और महाराष्ट्र सरकार का भूमि अधिग्रहण रद्द कर दिया। Mumbai slum redevelopment: Supreme Court upholds land owner’s rights, quashes government acquisition notice

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के कुर्ला इलाके में स्लम रीडेवलपमेंट से जुड़ा अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी स्लम रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में जमीन मालिक का पहला अधिकार होता है, न कि सिर्फ झोपड़पट्टीवासियों या स्लम अथॉरिटी (SRA) का।
    22 अगस्त को दिए गए इस फैसले में कोर्ट ने 2018 में बॉम्बे हाई कोर्ट के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें महाराष्ट्र सरकार के अधिग्रहण आदेश को रद्द किया गया था। Mumbai slum redevelopment: Supreme Court upholds land owner’s rights, quashes government acquisition notice

    पृष्ठभूमि – 1979 से शुरू हुआ विवाद

    विवादित जमीन पर साल 1979 में झोपड़पट्टीवासियों ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद लगभग 3,045 वर्ग मीटर जमीन को स्लम एरिया घोषित किया गया। समय के साथ बस्ती बढ़ती गई और 2002 में वहां के निवासियों ने तराबाई नगर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (Tarabai Society) का गठन किया।
    2006 से 2008 के बीच सोसाइटी ने बार-बार स्लम सर्वे और अधिग्रहण की मांग की। अंततः 2011 में पूरी जमीन को SRA एरिया घोषित कर दिया गया। Mumbai slum redevelopment: Supreme Court upholds land owner’s rights, quashes government acquisition notice

    जमीन मालिक का हक बनाम झोपड़पट्टीवासियों का अधिकार

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमीन मालिक को महाराष्ट्र स्लम एरिया (इम्प्रूवमेंट, क्लियरेंस और रीडेवलपमेंट) एक्ट, 1971 के तहत अधिकार तो हैं ही, लेकिन उससे भी बढ़कर संवैधानिक और संपत्ति से जुड़े मौलिक अधिकार हैं।
    जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन के सिंह की बेंच ने कहा –
    “Ordinarily, a landowner is entitled to all the incidental benefits derived from the ownership of such immovable property. Ownership rights are also constitutionally protected and can only be interfered with as a result of the operation of law.”

    “Unholy Nexus” की चेतावनी

    कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर SRA और प्राइवेट डेवलपर्स को मनमानी छूट मिल गई तो यह “Unholy Nexus” (गठजोड़) को जन्म देगा, जिससे सबसे ज्यादा नुकसान स्लमवासियों को होगा।
    सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि –

    • जमीन मालिक को पहले मौका देना जरूरी है।
    • अगर जमीन मालिक रीडेवलपमेंट का प्रस्ताव समय पर नहीं लाता, तो स्लमवासी डेवलपर के साथ खुद प्रस्ताव ला सकते हैं।
    • बिना जमीन मालिक को सूचना दिए उसे अधिग्रहण का जिम्मेदार ठहराना अनुचित है।

    सरकार का नोटिफिकेशन रद्द

    2016 में महाराष्ट्र सरकार ने जमीन अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से गलत थी।
    कोर्ट ने दो टूक कहा कि –
    “सिर्फ एरिया को SR एरिया घोषित करने से यह नहीं माना जा सकता कि मालिक को स्वचालित रूप से रीडेवलपमेंट स्कीम लाना ही होगा।” Mumbai slum redevelopment: Supreme Court upholds land owner’s rights, quashes government acquisition notice

    नतीजा

    यह फैसला न सिर्फ जमीन मालिकों के लिए बल्कि मुंबई के स्लम रीडेवलपमेंट मॉडल के लिए भी ऐतिहासिक है। सुप्रीम कोर्ट ने जमीन मालिकों को प्राथमिक अधिकार देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि स्लमवासियों का पुनर्विकास न्यायसंगत और पारदर्शी प्रक्रिया से ही होना चाहिए। Mumbai slum redevelopment: Supreme Court upholds land owner’s rights, quashes government acquisition notice

  • मुंबई की स्टार्टअप कंपनी में अनोखी नौकरी – ‘Doom-Scroller’

    मुंबई की स्टार्टअप कंपनी में अनोखी नौकरी – ‘Doom-Scroller’

    Monk Entertainment के CEO विराज शेट ने अनोखी नौकरी निकाली है। कंपनी को चाहिए Doom-Scoller, जो दिनभर सोशल मीडिया पर ट्रेंड्स और क्रिएटर कल्चर पर नजर रखे। जानें क्या है योग्यता और सैलरी। Mumbai company will give jobs to ‘Doom-Scrollers’, their only work will be Insta-scrolling all day long.

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    क्या आपने कभी सोचा है कि सोशल मीडिया पर घंटों तक इंस्टाग्राम और रील्स स्क्रॉल करना भी नौकरी बन सकता है? जी हां, मुंबई की मशहूर क्रिएटर मैनेजमेंट कंपनी Monk Entertainment (Monk-E) के को-फाउंडर और CEO विराज शेट ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर बताया कि कंपनी को चाहिए फुल-टाइम Doom-ScrollerMumbai company will give jobs to ‘Doom-Scrollers’, their only work will be Insta-scrolling all day long.

    कौन है Doom-Scroller?

    ‘Doom-Scroller’ दरअसल वह होता है जो लगातार घंटों तक सोशल मीडिया पर ट्रेंड्स, वायरल कंटेंट और क्रिएटर्स से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट्स पर नजर रखता है।
    Monk-E ने इस जॉब के लिए साफ शर्त रखी है कि उम्मीदवार को कम से कम 6 घंटे रोज़ Instagram पर स्क्रॉलिंग करनी होगी। Mumbai company will give jobs to ‘Doom-Scrollers’, their only work will be Insta-scrolling all day long.

    नौकरी के लिए योग्यता और स्किल्स

    कंपनी ने इस रोल के लिए कुछ जरूरी स्किल्स भी बताए हैं –

    • हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में फ्लुएंसी होना जरूरी।
    • सोशल मीडिया का डीप नॉलेज और क्रिएटर कल्चर के प्रति जुनून।
    • Reddit के InstaCelebsGossip जैसे ऑनलाइन कम्युनिटी में रुचि।
    • ह्यूमर और पर्सनैलिटी के साथ मेल भेजने की क्षमता (सीधा कॉपी-पेस्ट नहीं, खुद की क्रिएटिविटी दिखानी होगी)।

    विराज शेट ने अपने पोस्ट में लिखा –
    “Hiring Doom-Scollers at Monk-E. Write to careers@monk-e.in with ‘doomscroller’ as the title. Please show some personality/humour in the email body. Do not use ChatGPT for it.”

    सैलरी और जॉब लोकेशन

    यह नौकरी मुंबई में फुल-टाइम होगी और कंपनी ने इसे प्रतिस्पर्धी सैलरी पैकेज के साथ ऑफर किया है। हालांकि, कितनी सैलरी मिलेगी यह अभी तक डिस्क्लोज़ नहीं किया गया है।

    सोशल मीडिया पर यूजर्स की मजेदार प्रतिक्रिया

    इस पोस्ट ने इंटरनेट पर धूम मचा दी। कई यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में कहा –

    • “अब मम्मी को बोलूंगा कि मेरा Doom-Scrolling टाइम बर्बादी नहीं बल्कि नौकरी है।”
    • “19 घंटे स्क्रॉल करता हूं, क्या मैं ओवरक्वालिफाइड हूं?”
    • “बुरा एडिक्शन नहीं, अब ये पैसों वाली स्किल है।”

    कई यूजर्स ने इसे मजाक समझा, जबकि बहुतों ने सच में “I am interested” लिखकर कॉमेंट कर दिया।

  • मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जरांगे पाटिल का मुंबई कूच, 29 अगस्त से आज़ाद मैदान में आखिरी लड़ाई

    मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जरांगे पाटिल का मुंबई कूच, 29 अगस्त से आज़ाद मैदान में आखिरी लड़ाई

    मराठा आरक्षण के लिए मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई कूच का ऐलान किया है। 27 अगस्त से जालना से यात्रा शुरू होगी और 29 अगस्त से मुंबई के आज़ाद मैदान में शांतिपूर्ण आंदोलन होगा। जानिए पूरी खबर। Maratha reservation movement: Manoj Jarange Patil marches to Mumbai, final battle at Azad Maidan from August 29

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    महाराष्ट्र में एक बार फिर से मराठा आरक्षण का मुद्दा गरमाने लगा है। मराठा समाज के प्रमुख कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने साफ कर दिया है कि अब आरक्षण की लड़ाई सीधी मुंबई की सड़कों पर लड़ी जाएगी।
    उन्होंने रविवार 24 अगस्त को मराठा समाज से अपील करते हुए कहा कि 27 अगस्त को ‘चलो मुंबई’ मार्च में शामिल हों और 29 अगस्त से देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के आज़ाद मैदान में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। Maratha reservation movement: Manoj Jarange Patil marches to Mumbai, final battle at Azad Maidan from August 29

    “अब मुकाबला मुंबई में होगा” – जरांगे

    बीड जिले के मंजरसुम्बा गांव में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए जरांगे ने कहा कि अगर गांव-गांव में जुटी भीड़ से सरकार को फर्क नहीं पड़ा तो असली दबाव मुंबई पहुंचने के बाद ही महसूस होगा।
    जरांगे ने कहा, “अब मुकाबला मुंबई में होगा। यह हमारी आखिरी लड़ाई है और हम मराठा आरक्षण लिए बिना पीछे नहीं हटेंगे।” Maratha reservation movement: Manoj Jarange Patil marches to Mumbai, final battle at Azad Maidan from August 29

    मराठा आरक्षण: ओबीसी कोटे में शामिल करने की मांग

    जरांगे और उनके समर्थकों की मुख्य मांग है कि मराठा समाज को ओबीसी आरक्षण में शामिल किया जाए, ताकि समाज के युवाओं को सरकारी नौकरी और शिक्षा में समान अवसर मिल सके।
    जरांगे 27 अगस्त को अपने पैतृक स्थान अंतरवाली सरती (जालना जिला) से मुंबई कूच करेंगे और हजारों समर्थकों के साथ आज़ाद मैदान तक पहुंचेंगे। Maratha reservation movement: Manoj Jarange Patil marches to Mumbai, final battle at Azad Maidan from August 29

    सीएम फडणवीस पर गंभीर आरोप

    जरांगे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर आरोप लगाया कि वे छोटी-छोटी अड़चनें खड़ी करके मराठा समाज को उकसाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा –
    “सीएम फडणवीस हमें पुलिस के जरिए परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हम शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करेंगे। पुलिस को हमें परेशान करने की बजाय बीड के महादेव मुंडे के हत्यारों को पकड़ना चाहिए।” Maratha reservation movement: Manoj Jarange Patil marches to Mumbai, final battle at Azad Maidan from August 29

    आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की अपील

    जरांगे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने मराठा समाज से अपील की कि अगर कोई आंदोलन को भटकाने की कोशिश करे तो उसे पुलिस के हवाले कर दिया जाए।
    उन्होंने यह भी कहा कि “अगर कोई पत्थर फेंकेगा तो वह हमारा आदमी नहीं होगा, बल्कि यह सरकार की साज़िश भी हो सकती है।” Maratha reservation movement: Manoj Jarange Patil marches to Mumbai, final battle at Azad Maidan from August 29

    सरकार के लिए बड़ी चुनौती

    जरांगे का यह आंदोलन महाराष्ट्र सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। मराठा आरक्षण की मांग लंबे समय से चल रही है और हर बार यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गरमा जाता है। जरांगे का यह ऐलान साफ संकेत देता है कि मुंबई में मराठा आरक्षण की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ी जाएगी। Maratha reservation movement: Manoj Jarange Patil marches to Mumbai, final battle at Azad Maidan from August 29

  • अपनी मंगेतर और तीन दोस्तों के साथ किला देखने गया शख्स, रहस्ययी तरीके से गायब, CCTV फुटेज ने चौंकाया

    अपनी मंगेतर और तीन दोस्तों के साथ किला देखने गया शख्स, रहस्ययी तरीके से गायब, CCTV फुटेज ने चौंकाया

    तनाजी कड़ा के पास से युवक वापस नहीं लौटा। उसके साथी उसकी तलाश करने लगे और कडा के पास युवक की एक ही सैंडल मिली। पुलिस ने जब सीसीटीवी खंगाला तो चौक गये। A man who went to see the fort with his fiancée and three friends mysteriously disappeared, CCTV footage shocked everyone

    डिजिटल डेस्क
    महाराष्ट्र/पुणे:
    हैदराबाद का एक 24 वर्षीय युवक बुधवार शाम को पुणे के सिंहगढ़ किले पर संदिग्ध परिस्थितियों से लापता हो गया। हवेली पुलिस और स्थानीय बचाव दलों ने शुक्रवार को भी उसकी तलाश जारी रखी, लेकिन देर शाम तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। हवेली पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर सचिन वांगड़े ने बताया कि युवक अपनी मंगेतर और तीन दोस्तों के साथ बुधवार को किला घूमने आया था। पांचों लोग तनाजी कड़ा (चट्टान) के पास थे, जब युवक ने अपने दोस्तों से कहा कि उसे टॉयलेट जाना है। A man who went to see the fort with his fiancée and three friends mysteriously disappeared, CCTV footage shocked everyone

    सीसीटीवी में क्या दिखा?

    इसके बाद वह वहां से चला गया और वापस नहीं लौटा। उसके दोस्तों ने उसकी तलाश शुरू की और चट्टान के पास उसका एक जूता मिला। वांगड़े ने कहा, “दोस्तों ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचित किया।” पुलिस को तब संदेह हुआ जब वन विभाग द्वारा किले के तलहटी में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में एक व्यक्ति दिखा, जिसका कद-काठी लापता युवक से मिलता-जुलता था। A man who went to see the fort with his fiancée and three friends mysteriously disappeared, CCTV footage shocked everyone

    भागता हुआ दिखा युवक

    खबर के मुताबिक, वांगड़े ने बताया, “फुटेज अस्पष्ट है, लेकिन युवक के माता-पिता को संदेह है कि फुटेज में दिख रहा व्यक्ति उनका ही बेटा है।” फुटेज में दिखाने वाला व्यक्ति शर्ट पहने हुए था और कोंढणपुर फाटा की ओर भाग रहा था, जैसे कि वह सीसीटीवी कैमरों से बचने की कोशिश कर रहा हो। पुलिस और स्थानीय बचाव दलों ने बारिश और कोहरे के बावजूद देर रात तक तलाशी अभियान चलाया। A man who went to see the fort with his fiancée and three friends mysteriously disappeared, CCTV footage shocked everyone

    सातारा का रहने वाला है युवक

    वांगड़े ने कहा, “शुक्रवार सुबह हमने फिर से तलाश शुरू की, लेकिन देर शाम तक युवक का कोई पता नहीं चल सका।” पुणे ग्रामीण पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि युवक के माता-पिता ने पुलिस को सूचित किया कि उनका परिवार मूल रूप से सतारा जिले का है और अब हैदराबाद में बसा है। उनका बेटा हैदराबाद में एक कैफे चलाता है। A man who went to see the fort with his fiancée and three friends mysteriously disappeared, CCTV footage shocked everyone

    पुलिस की तलाशी अभियान

    अधिकारी ने बताया, “युवक किले पर शॉर्ट्स पहने हुए था। हम इस मामले की हर पहलू से जांच कर रहे हैं।” पुलिस और बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक युवक का कोई सुराग नहीं मिला है। जांच जारी है, और पुलिस सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। A man who went to see the fort with his fiancée and three friends mysteriously disappeared, CCTV footage shocked everyon

  • हिजाब हटाने को लेकर परीक्षा केन्द्र की सख्ती, छात्राओं ने परीक्षा ही छोड़ दिया

    हिजाब हटाने को लेकर परीक्षा केन्द्र की सख्ती, छात्राओं ने परीक्षा ही छोड़ दिया

    उत्तर प्रदेश के जौनपुर में और एक बार हिजाब को लेकर विवाद गरमा गया है। यहां परीक्षा केन्द्र ने हिजाब हटाने को लेकर सख्ती दिखाते हुए छात्राओं को परीक्षा देने से रोक दिया। जबकि छात्राएँ महिला टीचर के सामने हिजाब उतारने को तैयार थी। लेकिन परीक्षा केन्द्र के ज़िद के आगे छात्राओं को परीक्षा देने से रोक दिया। (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    उत्तर प्रदेश: जौनपुर के खुदौली में यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान हिजाब (नकाब) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। सर्वोदय इंटर कॉलेज में दसवीं की चार छात्राओं को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से रोक दिया गया क्योंकि उन्होंने हिजाब उतारने से इनकार किया था। नतीजतन, छात्राओं को घर वापस लौटना पड़ा। इसके बाद से मामला सोशल मीडिया पर खूब गरमाया हुआ है। (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    क्या है पूरा मामला?

    सोमवार को यूपी बोर्ड की दसवीं कक्षा की हिंदी परीक्षा थी। छात्राएं खेतासराय स्थित मॉडर्न कॉन्वेंट स्कूल की थीं। जब वे परीक्षा केंद्र पर पहुंचीं, तो वहां की प्रशासनिक टीम ने हिजाब हटाने के लिए कहा। छात्राओं ने इसे मानने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उन्हें परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं दिया गया। हालांकि छात्राओं ने महिला टीचर के सामने हिजाब उतारने को प्रशासन से अनुरोध किया। लेकिन परीक्षा केन्द्र के ज़िद के आगे छात्राओं को परीक्षा देने से रोक दिया और उन्हें घर वापस लौटना पड़ा। (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    मामले पर विरोध और समर्थन

    इस घटना की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई और हिजाब को लेकर नियमों की सख्ती पर सवाल उठने लगे। छात्राओं में से एक के पिता अहमदुल्लाह ने अपनी बेटी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि,
    “अगर हिजाब में परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिली, तो हमारी बेटी परीक्षा नहीं देगी।” (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    उन्होंने दावा किया कि चार नहीं बल्कि दस छात्राओं को परीक्षा देने से रोका गया। उन्होंने स्कूल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा, कि “उन्होंने अनुरोध किया था कि लेडी टीचर से चेकिंग कराकर हिजाब में परीक्षा देने की अनुमति जाए, लेकिन बच्चियों की मांग को नहीं मानी गई।” उन्होंने कहा, कि “ये परीक्षा केन्द्र की हटगर्जी है जो धर्म के आधार पर बच्चों के साथ पक्षपात किया जा रहा है। जो सरारस गलत है।” (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    नियमों का गलत इस्तेमाल

    परीक्षा केंद्र के व्यवस्थापक दिनेश चंद्र गुप्ता ने कहा किया कि, “परीक्षा के दौरान बोर्ड के नियमों का पालन कराना अनिवार्य है। छात्राओं ने नियमों का पालन करने से इनकार किया, इसलिए उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।” यहां स्कूल प्रशासन को हिजाब को लेकर नियमों का आकलन करना चाहिए था। जबकि नियम के मुताबिक सिर्फ पहचान पत्र की पृष्ठी करने के बाद उन्हें परीक्षा केंद्र में प्रवेश दे देना चाहिए था। लेकिन स्कूल प्रशासन ने ऐसा नही करके उन बच्चों का साल ही बरबाद कर दिया। यहां नियमों का गलत इस्तेमाल किए जाने के आरोप लग रहे हैं। (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    सोशल मीडिया पर गरमाया मुद्दा

    यह मामला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग छात्राओं के फैसले को सराहनीय बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे शिक्षा से समझौता मान रहे हैं। जबकि यूपी बोर्ड के नियमों के अनुसार, परीक्षा केंद्र में पहचान सुनिश्चित करने के लिए चेहरा स्पष्ट दिखना चाहिए। हालांकि, हिजाब को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है। इसमें यह नहीं कहा गया है कि परीक्षा देते समय भी विद्यार्थी का चेहरा स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। तो सवाल है कि परीक्षा केन्द्र ने ऐसा क्यों किया? (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)

    प्रशासन से मांग

    अब देखना यह है कि क्या शिक्षा विभाग इस मुद्दे को लेकर कोई संज्ञान भी लेता है या नही? या इस तरह के मामलों से निपटने के लिए कोई कदम उठाता भी है या नही? क्या इन छात्राओं को परीक्षा देने का कोई दूसरा मौका मिलेगा? या यह मामला सिर्फ एक विवाद बनकर रह जाएगा? ऐसा हुआ तो प्रदेश के अल्पसंख्यकों के साथ पक्षपात का आरोप लगता रहेगा और हो सकता है, मुस्लिम समाज की लाखों बच्चियां उच्च शिक्षा से महरूम रह जाएँ। ऐसे में प्रदेश का ही नुकसान होगा। प्रशासन को इस पर विचार करने की जरूरत है। (Strictness of the examination center regarding removal of hijab, girl students left the examination)