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  • सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। 15 अगस्त मांस प्रतिबंध पर देशभर में हंगामा

    सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। 15 अगस्त मांस प्रतिबंध पर देशभर में हंगामा

    महाराष्ट्र के साथ-साथ तेलंगाना के नगरपालिकाओं ने 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मांस की दुकानें और बूचड़खानों को बंद करने का निर्देश जारी किया है। इसको लेकर देशभर में विपक्षी नेता हंगामा कर रहे हैं। तेलंगाना हाईकोर्ट ने तो नगर पालिका प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    15 अगस्त को सरकार द्वारा मांस की दुकानों को बंद करने को लेकर जारी फैसले के खिलाफ देशभर में हंगामा हो रहा है। महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, मालेगांव, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) और कल्याण-डोंबिवली के साथ-साथ तेलंगाना के नगर पालिका अपने अधिकार क्षेत्र के बूचड़खानों और मांस की दुकानों को 15 अगस्त के दिन बंद रखने का निर्देश जारी किया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं के हंगामे के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार खुद आश्चर्य जता रहे हैं। राज ठाकरे ने तो यहां तक कह दिया, कि सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। हम देश की स्वतंत्रता का पर्व मना रहे हैं। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    मनसे का विरोध

    गुरुवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने स्वतंत्रता दिवस पर राज्य में कुछ नगर पालिका द्वारा मांस की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों का खान-पान नहीं निर्धारित करना चाहिए। राज ने मुंबई में संवाददाताओं से कहा कि नगर पालिकाओं को इस तरह का प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    स्वतंत्रता दिवस पर लगा प्रतिबंध

    उन्होंने कहा, “सरकार और महानगर पालिका को यह तय नहीं करना चाहिए कि किसको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिये। एक तरफ हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं और हमें क्या खाना चाहिए, यह चुनने की कोई आजादी नहीं है। स्वतंत्रता दिवस पर किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाना सरकार का आम जनता के खिलाफ एक विरोधाभास है।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    तेलंगाना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

    इसके साथ ही महाराष्ट्र से सटे तेलंगाना राज्य के ओल्ड हैदराबाद सिटी की नगरपालिका ने भी 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस पर मीट की दुकानें और बूचड़खाने बंद रखने के आदेश जारी किया है। शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने इसपर नाराजगी जताते हुए कहा, कि “यह धर्म का मामला नहीं है और न ही यह राष्ट्रीय हित का मामला है।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादूल मुस्लिमिन (AIMIM) चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को ओल्ड हैदराबाद सिटी के आदेश को असंवैधानिक बताया। कहा कि गोश्त खाने से 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस का क्या लेना-देना है। इस फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र में हंगामे के बीच शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे और राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने फैसले को गलत बताया है। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    ओवैसी ने क्या कहा?

    सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘गोश्त खाने और स्वतंत्रता दिवस में क्या रिश्ता है। तेलंगाना में 99 प्रतिशत लोग गोश्त खाते हैं। ओवैसी ने इस फैसले को लोगों की स्वतंत्रता, निजता, आजीविका, संस्कृति, पोषण और धर्म के अधिकारों का उल्लंघन करने वाला फैसला बताया है।’ The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    तेलंगाना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

    तेलंगाना में यह मामला हाईकोर्ट तक जा पहुंचा है। तेलंगाना हाई कोर्ट ने ग्रेटर हैदराबाद महानगर पालिका (जीएचएमसी) से स्वतंत्रता दिवस पर मांस की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने के उसके आदेश के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। तेलंगाना सरकार के इस आदेश के खिलाफ लगाई गई याचिका में कहा गया है कि यह आदेश मनमाना है। अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(जी) (किसी भी पेशे को अपनाने का अधिकार) का उल्लंघन करता है। हाईकोर्ट के जस्टिस विजयसेन रेड्डी इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

    महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा, “मैंने टीवी पर खबर देखी, श्रद्धा का प्रश्न होता है तो इस तरह बंदी लगाई जाती है। आषाढ़ी एकादशी, महावीर जयंती जैसे अवसरों पर यह निर्णय लिया जा सकता है। अगर हम कोकण में जाएं तो वहां हर सब्जी में सूखी मछली डालकर पकाया जाता है। ऐसी बिना कारण के खाने पीने की चीजों पर रोक लगाना ठीक नहीं है। अगर भावनात्मक मुद्दा हो तो उस समय के लिए बंदी लगाई जाए तो लोग समझ सकते हैं। लेकिन, 15 अगस्त को महाराष्ट्र में बंदी लगाना उचित नहीं है। मैं इस बारे में जानकारी लूंगा।

    खस्ताहाल सड़कों पर ध्यान दें।

    आदित्य ठाकरे ने मांस बिक्री बंदी के फैसले पर कहा, “ये हमारी च्वाइस है कि स्वतंत्रता दिवस पर हम क्या खाएं और क्या नहीं खाएं।कल्याण-डोंबिवली महापालिका कमिश्नर को इस मामले में दखल देने का अधिकार नहीं है। नागरिकों पर शाकाहार का फैसला थोपने के बजाय, खस्ताहाल सड़कों और बदहाल नागरिक सेवाओं को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August