Mumbai: Notice ना देने पर MNS कार्यकर्ता रिहा, कोर्ट ने बताया Arrest अवैध

Mumbai में MNS activist Ravindra Shinde की गिरफ्तारी को कोर्ट ने अवैध माना। BNSS Section 35(3) के तहत notice न देने पर magistrate court ने दी रिहाई। Extortion case में पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल।

मुंबई: मुंबई में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। South Mumbai में रोड वर्क ठेकेदार से कथित तौर पर धमकी देकर वसूली (extortion) करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए MNS कार्यकर्ता Ravindra Shinde को अदालत ने रिहा कर दिया है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में BNSS के तहत जरूरी notice नहीं दिया गया, जिससे arrest अवैध हो गया।

⚖️ Court का बड़ा फैसला: Arrest को बताया Illegal

मामले की सुनवाई के दौरान magistrate court ने कहा कि चूंकि आरोपी को Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) Section 35(3) के तहत अनिवार्य notice for appearance नहीं दिया गया, इसलिए गिरफ्तारी वैध नहीं मानी जा सकती।

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यह मामला उन अपराधों से जुड़ा है जिनमें अधिकतम सजा सात साल तक की है। ऐसे मामलों में Supreme Court के आदेश के मुताबिक पहले notice जारी करना जरूरी है।

👤 कौन हैं आरोपी?

इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम Ravindra Shinde है, जो MNS (Maharashtra Navnirman Sena) से जुड़े कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। उन्हें शनिवार को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

उन पर आरोप है कि उन्होंने South Mumbai में एक road work contractor को धमकाकर पैसे की मांग की थी।

📜 Defence ने Supreme Court Order का दिया हवाला

Shinde की ओर से वकील Rajendra Shirodkar, साथ में Archit Sakhalkar ने कोर्ट में दलील दी। उन्होंने Supreme Court के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि जिन अपराधों में सात साल तक की सजा है, उनमें Section 35(3) BNSS के तहत पहले notice देना अनिवार्य है।

डिफेंस का तर्क था कि पुलिस ने यह जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की।

🏛️ Police ने कहा – Process Follow किया

Public Prosecutor R A Patil ने अदालत में कहा कि पुलिस ने सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया है।

हालांकि कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी यह साबित नहीं कर सके कि आरोपी को Section 35(3) के तहत notice जारी किया गया था।

📌 BNSS की किन धाराओं का पालन हुआ?

डिफेंस वकील Shirodkar ने बताया कि मजिस्ट्रेट ने माना कि पुलिस ने:

  • Section 47(1) BNSS के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दी
  • Section 48(2) और 48(3) BNSS के तहत आरोपी के रिश्तेदारों को सूचना दी

लेकिन सबसे अहम Section 35(3) notice for appearance जारी करने का कोई प्रमाण पेश नहीं किया जा सका।

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🔎 Legal Procedure पर फिर उठे सवाल

इस फैसले के बाद Mumbai Police की arrest procedure और BNSS compliance को लेकर फिर से चर्चा तेज हो गई है। Legal experts का मानना है कि Supreme Court guidelines का पालन न करना जांच पर असर डाल सकता है।


❓ FAQ Section

Q1. किसे रिहा किया गया है?
MNS कार्यकर्ता Ravindra Shinde को कोर्ट ने रिहा किया।

Q2. कोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध क्यों माना?
क्योंकि BNSS Section 35(3) के तहत अनिवार्य notice for appearance जारी नहीं किया गया था।

Q3. आरोपी पर क्या आरोप हैं?
South Mumbai में एक road work contractor को धमकाकर extortion करने का आरोप है।

Q4. पुलिस ने कौन सी कानूनी प्रक्रिया पूरी की थी?
Section 47(1) के तहत गिरफ्तारी के कारण बताए और Section 48(2)(3) के तहत रिश्तेदारों को सूचना दी।

Q5. Supreme Court का क्या आदेश है?
जिन मामलों में सजा सात साल तक है, उनमें पहले notice जारी करना जरूरी है।


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