मालेगांव में बड़ा उलटफेर: AIMIM को रोकने के लिए कांग्रेस-बीजेपी ने मिलाया हाथ

मालेगांव नगर निगम में AIMIM को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस और बीजेपी ने अप्रत्याशित गठबंधन कर ‘भारत विकास आघाड़ी’ बनाई है. जानिए पूरा समीकरण, संख्या बल, मेयर रेस और राजनीतिक मायने.

मालेगांव: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर ऐसा मोड़ आया है जिसने सबको चौंका दिया है. मालेगांव नगर निगम में AIMIM को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस और बीजेपी ने आपसी विरोध भुलाकर हाथ मिला लिया है. दोनों दलों के पार्षदों ने मिलकर ‘भारत विकास आघाड़ी’ नाम से नया मोर्चा बनाया है, जिससे मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. इस पूरे घटनाक्रम ने मालेगांव की स्थानीय राजनीति में बड़ा उलटफेर पैदा कर दिया है.

मालेगांव में कैसे बना कांग्रेस-बीजेपी गठबंधन?

आमतौर पर राष्ट्रीय और राज्य राजनीति में एक-दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाने वाले कांग्रेस और बीजेपी का साथ आना अपने-आप में बड़ी राजनीतिक घटना है. मालेगांव नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद जब AIMIM की भूमिका मजबूत होती दिखी, तब कांग्रेस और बीजेपी ने रणनीतिक तौर पर गठबंधन का रास्ता चुना.

Advertisements
Major-upset-in-Malegaon-Congress-BJP-join-hands-to-stop-AIMIM-news

कांग्रेस के 3 और बीजेपी के 2 पार्षदों ने मिलकर कुल 5 सदस्यों का एक औपचारिक गुट बनाया, जिसे ‘भारत विकास आघाड़ी’ नाम दिया गया. इस आघाड़ी का नेतृत्व कांग्रेस पार्षद एजाज बेग को सौंपा गया है.

AIMIM को सत्ता से दूर रखने की रणनीति

इस गठबंधन का सीधा उद्देश्य AIMIM की बढ़ती राजनीतिक पकड़ को सीमित करना बताया जा रहा है. गौरतलब है कि हाल ही में अकोट में बीजेपी और AIMIM के बीच हुए अल्पकालिक गठबंधन को लेकर काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद बीजेपी को वहां से समर्थन वापस लेना पड़ा.

अब मालेगांव में बीजेपी का कांग्रेस के साथ जाना यह साफ संकेत देता है कि स्थानीय निकायों में सत्ता संतुलन के लिए वैचारिक मतभेदों को फिलहाल पीछे रखा जा रहा है.

बारामती विमान हादसे के बाद महाराष्ट्र में तीन दिन का अवकाश, मुंबई हुई सूनसान

मालेगांव नगर निगम: पूरा संख्या बल समीकरण

पार्टीपार्षदों की संख्या
इस्लाम पार्टी35
AIMIM21
शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट)18
समाजवादी पार्टी05
कांग्रेस03
बीजेपी02
कुल पार्षद84

संख्या बल के हिसाब से इस्लामिक पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन गठबंधन राजनीति ने समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है.

मेयर की कुर्सी पर कौन?

इस बार मालेगांव नगर निगम में महापौर पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित है. ऐसे में सबसे बड़ी पार्टी इस्लामिक पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक आसिफ शेख की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है.

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आसिफ शेख अपने परिवार से ही उम्मीदवार उतार सकते हैं और उनकी भाभी नसरीन शेख को मेयर बनाए जाने की पूरी संभावना है.

डिप्टी मेयर को लेकर बढ़ी सियासी हलचल

जहां मेयर पद को लेकर इस्लामिक पार्टी मजबूत स्थिति में है, वहीं उपमहापौर पद के लिए जोड़-तोड़ तेज हो गई है. भारत विकास आघाड़ी की कोशिश है कि डिप्टी मेयर पद पर अपनी पकड़ बनाई जाए, जिससे निगम की सत्ता में संतुलन बना रहे.

मेयर-डिप्टी मेयर चुनाव की प्रक्रिया क्या है?

नियमों के मुताबिक:

  • मेयर आरक्षण घोषित होने के 8 से 12 दिन के भीतर चुनाव जरूरी
  • नगर निगम की विशेष बैठक बुलाई जाएगी
  • बैठक का एजेंडा 3 दिन पहले सभी पार्षदों को भेजा जाएगा

इसी बैठक में मेयर और उपमहापौर का औपचारिक चुनाव होगा.

राजनीतिक मायने और आगे की तस्वीर

मालेगांव का यह घटनाक्रम साफ दिखाता है कि स्थानीय राजनीति में विचारधारा से ज्यादा सत्ता गणित हावी हो गया है. कांग्रेस-बीजेपी का यह गठबंधन भले ही संख्या में छोटा हो, लेकिन इसका प्रतीकात्मक असर बड़ा है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य दल भी इसी तरह नए समीकरण गढ़ते हैं.


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. क्या कांग्रेस और बीजेपी ने आधिकारिक गठबंधन किया है?
👉 नगर निगम स्तर पर दोनों दलों के पार्षदों ने मिलकर ‘भारत विकास आघाड़ी’ बनाई है.

Q2. इस गठबंधन का मुख्य मकसद क्या है?
👉 AIMIM को सत्ता से दूर रखना और निगम की सत्ता में संतुलन बनाना.

Q3. मालेगांव में सबसे बड़ी पार्टी कौन-सी है?
👉 इस्लाम पार्टी, जिसके पास 35 पार्षद हैं.

Q4. मेयर पद किसके लिए आरक्षित है?
👉 सामान्य महिला वर्ग के लिए.

Q5. मेयर चुनाव कब होगा?
👉 आरक्षण घोषित होने के 8–12 दिनों के भीतर विशेष बैठक में.


Discover more from  

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisements
Scroll to Top

Discover more from  

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading