Bombay High Court ने बड़ा फैसला देते हुए कहा कि अधूरी Redevelopment Project पर Builder Refund नहीं मांग सकता। Transit Rent भी वापस नहीं मिलेगा। जानिए पूरा केस।
मुंबई: शहर में चल रहे Redevelopment Projects के लिए एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। Bombay High Court ने साफ कर दिया है कि अगर कोई Builder अधूरी बिल्डिंग बनाकर प्रोजेक्ट छोड़ देता है या Agreement रद्द हो जाता है, तो वह अपने खर्च का Refund नहीं मांग सकता। यह फैसला शहर की कई हाउसिंग सोसायटी और डेवलपर्स के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है।
⚖️ क्या है पूरा मामला?
यह मामला गोरेगांव की Goregaon Pearl Cooperative Housing Society से जुड़ा है।
- सोसायटी ने 2007 में SSD Escatics Pvt Ltd को Redevelopment का काम दिया
- प्रोजेक्ट में 3 विंग का पुनर्विकास होना था
- देरी के चलते दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया
बाद में समझौते के तहत Builder को 30 अक्टूबर 2018 तक प्रोजेक्ट पूरा करना था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया।
❌ Agreement क्यों हुआ Terminate?
सोसायटी ने 3 जून 2018 को:
- Development Agreement रद्द कर दिया
- Builder पर Terms & Conditions तोड़ने का आरोप लगाया
मामला Arbitration में गया, जहां Arbitrator ने:
- सोसायटी के पक्ष में फैसला दिया
- Builder को ₹7.17 करोड़ देने का आदेश दिया
इसके बाद Builder हाई कोर्ट पहुंचा।
🧑⚖️ High Court ने क्या कहा?
जस्टिस Sandeep Marne ने साफ कहा:
- Builder ने Timeline और Agreement का उल्लंघन किया
- Project समय पर पूरा नहीं किया
- इसलिए Agreement Termination सही है
कोर्ट ने Arbitrator के फैसले को बरकरार रखा।
💸 ₹18.09 करोड़ Refund की मांग खारिज
Builder ने दावा किया था कि:
- उसने ₹18.09 करोड़ खर्च किए
- एक बिल्डिंग 21 फ्लोर तक और दूसरी 7 फ्लोर तक बनाई
लेकिन कोर्ट ने कहा:
- अधूरी Structure सोसायटी के किसी काम की नहीं
- इसे “Benefit” नहीं माना जा सकता
इसलिए Refund का दावा पूरी तरह खारिज कर दिया गया।
📜 Contract Act की Section 64 पर कोर्ट की टिप्पणी
Builder ने Indian Contract Act का हवाला दिया था
कोर्ट ने कहा:
- Benefit तभी माना जाएगा जब वह पूरी तरह usable हो
- अधूरी बिल्डिंग को Benefit नहीं माना जा सकता
🏠 Transit Rent भी वापस नहीं मिलेगा
Builder ने ₹20.43 करोड़ का भी Refund मांगा, जिसमें शामिल था:
- Transit Rent
- Corpus Fund
- Brokerage
लेकिन कोर्ट ने कहा:
- Transit Rent सोसायटी के लोगों के अस्थायी रहने के लिए दिया जाता है
- इसे “Unjust Enrichment” नहीं माना जा सकता
👉 इसलिए यह पैसा भी वापस नहीं मिलेगा।
⚠️ Court की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने साफ कहा:
👉 “अगर Builder की गलती से Agreement खत्म हुआ और फिर उसे Refund दे दिया जाए, तो यह उसकी गलती का इनाम होगा।”
👉 इससे पहले से परेशान सोसायटी के लोगों पर और बोझ पड़ेगा।
🏙️ Mumbai Redevelopment Projects पर असर
इस फैसले के बाद:
- Builders पर समय पर काम पूरा करने का दबाव बढ़ेगा
- Housing Societies को ज्यादा अधिकार मिलेंगे
- Redevelopment Disputes में यह Judgment मिसाल बनेगा
🔗 Related Government / Official Website Links:
- Bombay High Court Official Website
👉 https://bombayhighcourt.nic.in - Maharashtra Housing Department
👉 https://housing.maharashtra.gov.in - MahaRERA (Real Estate Regulatory Authority)
👉 https://maharera.mahaonline.gov.in - Ministry of Housing & Urban Affairs
👉 https://mohua.gov.in
❓ FAQ Section
Q1. कोर्ट ने Builder को Refund क्यों नहीं दिया?
👉 क्योंकि बिल्डिंग अधूरी थी और सोसायटी के उपयोग में नहीं आ सकती थी।
Q2. क्या Transit Rent वापस मिल सकता है?
👉 नहीं, कोर्ट ने साफ कहा कि यह Refundable नहीं है।
Q3. यह मामला किस सोसायटी से जुड़ा है?
👉 Goregaon Pearl CHS, मुंबई।
Q4. Builder ने कितना Refund मांगा था?
👉 ₹18.09 करोड़ + ₹20.43 करोड़।
Q5. इस फैसले का असर क्या होगा?
👉 Builders पर दबाव बढ़ेगा और Societies को मजबूत अधिकार मिलेंगे।
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