BMC ने साफ किया: मुंबई की किसी भी स्कूल का निजीकरण नहीं हुआ

BMC ने स्पष्ट किया है कि मुंबई में मराठी या किसी भी माध्यम की महानगरपालिका स्कूलों का निजीकरण नहीं किया गया है। छात्रों की संख्या और शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई योजनाएं जारी हैं।

मुंबई: मराठी माध्यम की स्कूलों को लेकर चल रही चर्चाओं और आशंकाओं पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। महानगरपालिका प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी माध्यम की स्कूलों का निजीकरण नहीं किया गया है। उल्टे, BMC छात्रों की संख्या बढ़ाने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे—इस उद्देश्य से लगातार योजनाएं और उपक्रम चला रही है।

🏫 मराठी स्कूलों को लेकर BMC का स्पष्ट रुख

BMC प्रशासन का कहना है कि:

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  • मुंबई की मराठी माध्यम की स्कूलों के मुद्दे पर वह पूरी तरह संवेदनशील है
  • मराठी के साथ-साथ अन्य माध्यमों की स्कूलों को भी मजबूत किया जा रहा है
  • छात्रों की घटती संख्या को रोकने और बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं

📈 छात्र संख्या बढ़ाने के लिए लगातार पहल

महानगरपालिका का साफ लक्ष्य है कि:

  • एक भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे
  • इसके लिए पालकों की काउंसलिंग की जाती है
  • स्कूलों में एडमिशन के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं

पिछले 10–15 वर्षों से BMC इस दिशा में निरंतर काम कर रही है।

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🏆 शानदार रिजल्ट: मराठी स्कूलों का 95% पास प्रतिशत

शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयासों का नतीजा भी सामने आया है:

  • मार्च 2025 की 10वीं परीक्षा
  • BMC मराठी स्कूलों का 95% रिजल्ट
  • कई छात्रों ने 97% तक अंक हासिल किए

इसके लिए:

  • नियमित सराव परीक्षाएं
  • गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम
  • शिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण
    जैसे कदम उठाए गए।

🎒 बिना फीस, 27 तरह की मुफ्त शैक्षणिक सामग्री

BMC स्कूलों की बड़ी खासियत:

  • किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाती
  • छात्रों को 27 प्रकार की शैक्षणिक सामग्री मुफ्त
  • किताबें, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी जैसी सुविधाएं

साथ ही:

  • उपलब्ध जगहों में खेल प्रशिक्षण
  • खेलों में प्रावीण्य हासिल करने के अवसर

📚 Khan Academy और डिजिटल लर्निंग का सहारा

छात्रों को और मजबूत बनाने के लिए:

  • Khan Academy के जरिए गणित और विज्ञान का मुफ्त अभ्यास
  • डिजिटल कंटेंट से पढ़ाई आसान
  • छात्रों की प्रगति में बेहतर परिणाम सामने आए

BMC का उद्देश्य है कि:

“महानगरपालिका का छात्र निजी स्कूल से भी ज्यादा सक्षम बने।”

🧠 FLN निपुण भारत से मजबूत बुनियाद

Foundational Literacy & Numeracy (FLN) – निपुण भारत अभियान के तहत:

  • तीसरी कक्षा तक हर माध्यम का छात्र
  • सही से पढ़ने में सक्षम
  • गणित की बुनियादी समझ में निपुण

इसके लिए विशेष शैक्षणिक रणनीतियां अपनाई गईं, जिनके अच्छे नतीजे अब दिख रहे हैं।

निजीकरण का दावा पूरी तरह गलत

BMC ने स्पष्ट किया है कि:

  • मराठी या किसी भी माध्यम की स्कूलों का
    निजीकरण नहीं किया गया
  • सोशल मीडिया या कुछ हलकों में जो
    “गलत तस्वीर” पेश की जा रही है
    वह पूरी तरह भ्रामक है

🤝 मराठी अभ्यास केंद्र के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा

हाल ही में:

  • मराठी अभ्यास केंद्र के शिष्टमंडल के साथ
  • BMC प्रशासन की विस्तृत बैठक हुई
  • हर मुद्दे पर बिंदुवार चर्चा की गई

बैठक के बाद:

  • समिति के सदस्यों ने
    👉 संतोष व्यक्त किया

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. क्या BMC ने मराठी स्कूलों का निजीकरण किया है?
➡️ नहीं, BMC ने साफ किया है कि किसी भी माध्यम की स्कूलों का निजीकरण नहीं हुआ है।

Q2. BMC स्कूलों में फीस लगती है क्या?
➡️ नहीं, छात्रों से किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाती।

Q3. छात्रों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
➡️ 27 प्रकार की मुफ्त शैक्षणिक सामग्री, खेल प्रशिक्षण और डिजिटल लर्निंग।

Q4. 10वीं का रिजल्ट कैसा रहा?
➡️ मार्च 2025 में मराठी स्कूलों का 95% रिजल्ट रहा।

Q5. FLN निपुण भारत का क्या फायदा हुआ?
➡️ तीसरी कक्षा तक के छात्र पढ़ने और गणित में ज्यादा सक्षम बने हैं।


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