मुंबई के मालवणी अंबूजवाड़ी इलाके में झोपड़पट्टियों को तोड़ने का महाराष्ट्र शासन का नोटिस जारी। रहिवासियों में हड़कंप, पुनर्वसन और बेघर होने की चिंता तेज। पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।
मुंबई: मुंबई शहर के पश्चिमी उपनगर में स्थित मालवणी के अंबूजवाड़ी इलाके में इन दिनों माहौल काफी तनावपूर्ण है। महाराष्ट्र शासन की ओर से कथित तौर पर झोपड़पट्टियों को लेकर तोड़फोड़ (डेमोलिशन) का नोटिस जारी होने के बाद हजारों रहिवासियों की नींद उड़ गई है। नोटिस की खबर फैलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। कई परिवारों को डर है कि कहीं अचानक बुलडोजर न पहुंच जाए और सालों की मेहनत से बसाया आशियाना पलभर में मलबा न बन जाए।
क्या है पूरा मामला?
अंबूजवाड़ी, जो लंबे समय से घनी आबादी वाला झोपड़पट्टी क्षेत्र माना जाता है, वहां के रहिवासियों को हाल ही में प्रशासन की ओर से नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पिछले 15-20 साल से यहां रह रहे हैं। कई के पास बिजली-पानी के कनेक्शन, राशन कार्ड और वोटर आईडी भी हैं।
रहिवासियों का दावा है कि बिना ठोस पुनर्वसन योजना बताए तोड़फोड़ की कार्रवाई की बात की जा रही है। इसी वजह से लोगों में असमंजस और गुस्सा दोनों है।
बेघर होने का डर, बच्चों की पढ़ाई पर संकट
इलाके की महिलाओं और बुजुर्गों से बात करने पर साफ झलकता है कि सबसे ज्यादा चिंता “अब जाएंगे तो जाएंगे कहां?” की है।
- कई बच्चे पास के स्कूलों में पढ़ते हैं
- ज्यादातर पुरुष दिहाड़ी मजदूरी, ऑटो ड्राइविंग या छोटे कामधंधों से जुड़े हैं
- महिलाएं घरों में काम करती हैं
अगर अचानक झोपड़ियां तोड़ी जाती हैं, तो इन परिवारों की रोज़ी-रोटी, बच्चों की पढ़ाई और इलाज सब पर असर पड़ेगा। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी “मालवणी झोपड़पट्टी डेमोलिशन” और “अंबूजवाड़ी पुनर्वसन” जैसे कीवर्ड तेजी से सर्च किए जा रहे हैं।
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क्या मिलेगा पुनर्वसन? रहिवासियों का बड़ा सवाल
महाराष्ट्र में झोपड़पट्टी पुनर्वसन के लिए Slum Rehabilitation Authority (SRA) जैसी व्यवस्था मौजूद है। नियमों के तहत पात्र झोपड़पट्टीवासियों को वैकल्पिक घर देने का प्रावधान होता है, लेकिन हर केस में पात्रता, कट-ऑफ तारीख और दस्तावेज अहम भूमिका निभाते हैं।
अंबूजवाड़ी के कई लोगों का कहना है कि उन्हें अभी तक यह साफ नहीं बताया गया कि:
- कौन पात्र माना जाएगा?
- पुनर्वसन कहां होगा?
- अस्थायी शिफ्टिंग की व्यवस्था क्या है?
इसी अनिश्चितता ने पूरे इलाके में बेचैनी बढ़ा दी है।
प्रशासन की संभावित कार्रवाई को लेकर सस्पेंस
सूत्रों के अनुसार, यह जमीन सरकारी या आरक्षित श्रेणी में आ सकती है, जिसके चलते अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित हो सकती है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर कार्रवाई करनी है तो पहले सर्वे, सुनवाई और पुनर्वसन की स्पष्ट योजना घोषित की जानी चाहिए। “मानवीय दृष्टिकोण” अपनाने की मांग लगातार उठ रही है।
राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज
मुंबई में जब भी झोपड़पट्टी हटाने का मुद्दा उठता है, तो वह केवल प्रशासनिक मामला नहीं रह जाता, बल्कि राजनीतिक रूप भी ले लेता है। मालवणी जैसे संवेदनशील और घनी आबादी वाले क्षेत्र में तोड़फोड़ की आशंका ने स्थानीय नेताओं की सक्रियता भी बढ़ा दी है।
कुछ सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:
- बिना वैकल्पिक व्यवस्था के कोई बुलडोजर न चले
- सभी रहिवासियों की सूची सार्वजनिक की जाए
- महिलाओं और बुजुर्गों के लिए विशेष व्यवस्था की जाए
सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा मुद्दा
“Malvani demolition notice”, “Ambujwadi slum Mumbai”, “Malvani slum rehabilitation” जैसे सर्च टर्म गूगल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं। स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स में नोटिस की कॉपियां और वीडियो शेयर हो रहे हैं। लोगों में भ्रम भी है और डर भी।
आगे क्या?
फिलहाल रहिवासी प्रशासन से औपचारिक बैठक और लिखित आश्वासन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर पुनर्वसन योजना स्पष्ट और पारदर्शी हो, तो वे सहयोग करने को तैयार हैं। लेकिन अचानक की गई कार्रवाई उन्हें मंजूर नहीं।
मुंबई जैसे महानगर में झोपड़पट्टी का मुद्दा केवल अवैध कब्जे का सवाल नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन और आजीविका से जुड़ा विषय है। अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या मालवणी अंबूजवाड़ी में झोपड़पट्टियां तोड़ी जाएंगी?
अभी नोटिस जारी होने की खबर है, लेकिन अंतिम कार्रवाई को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान आना बाकी है।
Q2. क्या रहिवासियों को पुनर्वसन मिलेगा?
यदि वे पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं, तो SRA या अन्य सरकारी योजना के तहत पुनर्वसन मिल सकता है।
Q3. कितने परिवार प्रभावित हो सकते हैं?
स्थानीय अनुमान के मुताबिक बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हो सकते हैं, हालांकि सटीक आंकड़ा स्पष्ट नहीं है।
Q4. क्या कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?
हाँ, यदि रहिवासी चाहें तो कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकते हैं।
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