Mumbai ATS और Delhi Police ने gaming chatroom के जरिए चल रहे alleged terror plot का खुलासा किया। Kandivali के 15 वर्षीय लड़के समेत कई नाबालिगों की पहचान, online radicalisation पर बड़ा अलर्ट।
मुंबई: एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जहां ऑनलाइन गेमिंग चैट के जरिए किशोरों को कथित तौर पर कट्टरपंथ की ओर धकेला जा रहा था। Maharashtra Anti-Terrorism Squad और Delhi Police Special Cell की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें 15 से 17 साल के नाबालिगों को निशाना बनाया गया। इस पूरे मामले में मुंबई के Kandivali का एक 15 वर्षीय लड़का भी जांच के दायरे में आया है।
कैसे खुला पूरा मामला (Investigation Details)
एजेंसियों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क gaming chatrooms, Telegram और Signal जैसे encrypted platforms के जरिए संचालित हो रहा था। शुरुआत में बच्चों से गेमिंग के दौरान संपर्क किया जाता था और धीरे-धीरे बातचीत को निजी और गुप्त प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट कर दिया जाता था।
जांच में सामने आया है कि देशभर से कम से कम 5 से 6 नाबालिग इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। अधिकारियों को शक है कि यह संख्या और बढ़ सकती है।
Kandivali के नाबालिग की भूमिका
मुंबई के कांदिवली इलाके के 15 वर्षीय लड़के की पहचान इस नेटवर्क में शामिल एक सदस्य के रूप में हुई है। फिलहाल उसे गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन उसके परिवार से संपर्क कर काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है।
गिरफ्तारी और मुख्य आरोपी (Arrests & Key Accused)
इस ऑपरेशन के तहत Kurla से 18 वर्षीय मोहम्मद हमाद सिद्दीकी और Thane से 33 वर्षीय मोसाइब अहमद उर्फ सोनू उर्फ कमाल को गिरफ्तार किया गया है।
इसके अलावा, “बड़ा इमरान” नाम के एक कथित हैंडलर को ओडिशा से हिरासत में लिया गया है, जो ऑनलाइन गतिविधियों को समन्वित कर रहा था।
परिवार का दावा और गेमिंग कनेक्शन
गिरफ्तार हमाद के पिता जलालुद्दीन सिद्दीकी ने दावा किया है कि उनका बेटा निर्दोष है और उसे फंसाया गया है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा पिछले तीन साल से PUBG और Free Fire जैसे ऑनलाइन गेम्स का आदी था और हाल ही में कुछ अनजान लोगों के संपर्क में आया था।
कैसे हुआ Online Radicalisation
अधिकारियों के अनुसार, युवाओं को संवेदनशील मुद्दों के जरिए प्रभावित किया गया। बातचीत में बाबरी मस्जिद, एनआरसी और “गजवा-ए-हिंद” जैसे विषयों का जिक्र कर युवाओं को विचारधारा की ओर झुकाने की कोशिश की गई।
कुछ चैट्स में भारत में शरीयत लागू करने और खिलाफत स्थापित करने जैसे संदर्भ भी सामने आए हैं।
डिजिटल सबूत और जांच (Forensic Evidence)
जांच एजेंसियों ने कई डिजिटल डिवाइस, चैट रिकॉर्ड और संदिग्ध सामग्री जब्त की है। इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क केवल बातचीत तक सीमित नहीं था, बल्कि संभावित हमलों की योजना पर भी चर्चा की जा रही थी।
Gaming Platforms बने खतरे का जरिया
जांच में सामने आया कि गेमिंग ऐप्स एक “safe entry point” के रूप में इस्तेमाल किए गए। पहले दोस्ती, फिर भरोसा और फिर विचारधारा — इसी पैटर्न पर युवाओं को धीरे-धीरे जोड़ा गया।
और संदिग्धों की तलाश (Probe Expands)
इस मामले में एक और 15 वर्षीय लड़का (कांदिवली) और ठाणे का 27 वर्षीय पेशेवर भी जांच के दायरे में आए हैं। उनके घरों पर तलाशी ली गई है और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
एजेंसियों की चेतावनी (Security Alert)
अधिकारियों ने कहा कि यह कोई एकल मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसमें कमजोर और कम उम्र के युवाओं को निशाना बनाकर धीरे-धीरे प्रभावित किया जा रहा है।
Useful Links
- National Investigation Agency: https://nia.gov.in
- Cyber Crime Portal India: https://cybercrime.gov.in
- Mumbai Police: https://mumbaipolice.gov.in
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. यह मामला क्या है?
A: गेमिंग चैट के जरिए युवाओं को कथित तौर पर कट्टरपंथ की ओर ले जाने का मामला।
Q2. कौन-कौन शामिल है?
A: 15-17 साल के नाबालिग, जिनमें कांदिवली का एक लड़का भी शामिल है।
Q3. क्या कोई गिरफ्तारी हुई है?
A: हां, कुर्ला और ठाणे से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
Q4. क्या यह बड़ा नेटवर्क है?
A: एजेंसियों के अनुसार यह एक संगठित नेटवर्क हो सकता है।
Q5. युवाओं को कैसे फंसाया गया?
A: गेमिंग चैट, सोशल मीडिया और encrypted apps के जरिए।
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