कल्याण के हाजी मलंग पहाड़ पर फ्युनिक्युलर ट्रेन सेवा की शुरुआत हो गई है। अब श्रद्धालुओं को 1500 सीढ़ियां और घंटों की चढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी। किराया, समय, उरुस और पूरी जानकारी पढ़ें।
महाराष्ट्र: कल्याण स्थित हाजी मलंग पहाड़ पर रविवार, 18 जनवरी 2026 से फ्युनिक्युलर ट्रेन सेवा शुरू हो गई है। इस सेवा के शुरू होने से हाजी मलंग दरगाह जाने वाले हजारों श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें करीब 1500 सीढ़ियां चढ़ने और दो से तीन घंटे की कठिन पहाड़ी चढ़ाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह लंबे समय से लंबित परियोजना सांसद श्रीकांत शिंदे के प्रयासों से पूरी हुई है और राज्य लोक निर्माण विभाग द्वारा इसे अमल में लाया गया है।
🚡 क्या है फ्युनिक्युलर ट्रेन और कैसे देगी राहत?
फ्युनिक्युलर ट्रेन एक खास तरह की पहाड़ी रेल सेवा होती है, जो खड़ी चढ़ाई पर सुरक्षित तरीके से लोगों को ऊपर तक पहुंचाती है।
हाजी मलंग पहाड़ पर शुरू की गई यह ट्रेन लगभग 1 किलोमीटर लंबी और 320 मीटर की खड़ी चढ़ाई को आसान बनाती है।
मलंगगढ़ पहाड़ समुद्र तल से करीब 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां तक पहुंचना अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक हो गया है।

🕰️ पहले कैसी थी हाजी मलंग की यात्रा?
अब तक श्रद्धालुओं को दरगाह तक पहुंचने के लिए:
- 1500 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं
- 2 से 3 घंटे का समय लगता था
- बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए सफर बेहद कठिन था
- बारिश और गर्मी में जोखिम भी बढ़ जाता था
फ्युनिक्युलर ट्रेन के शुरू होने से ये सारी परेशानियां अब बीते दिनों की बात हो गई हैं।
💰 किराया और संचालन का समय
फ्युनिक्युलर ट्रेन सेवा को आम श्रद्धालुओं के लिए किफायती रखा गया है:
- एकतरफा टिकट: ₹75
- रिटर्न टिकट: ₹150
यह ट्रेन सेवा रोजाना करीब 12 घंटे संचालित की जाएगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु इसका लाभ ले सकें।
🕌 उरुस के दौरान बढ़ेगी ट्रेन सेवा
फरवरी 2026 में हाजी मलंग पहाड़ पर सालाना उरुस का आयोजन होना है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
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उरुस का कार्यक्रम:
- 24, 25 और 26 फरवरी: सैयद अब्दुल रहमान शाह का उरुस
- 27 और 28 फरवरी: मीर सकी सुल्तान का उरुस
उरुस के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए ट्रेन सेवा में दोनों दिशाओं में दो-दो कोच चलाए जाएंगे, जबकि सामान्य दिनों में एक-एक कोच संचालित होगा।
🤝 हाजी मलंग दरगाह: भाईचारे की मिसाल
हाजी मलंग दरगाह एक ऐतिहासिक सूफी स्थल है, जो हजरत बाबा अब्दुर रहमान मलंग को समर्पित है।
यह स्थान सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए भी जाना जाता है।
परंपरा के अनुसार यहां:
- हिंदू वहिवटदार (करांडेकर परिवार)
- मुस्लिम मुतवल्ली
मिलकर सभी धार्मिक रस्में निभाते हैं, जो इस स्थल को खास बनाता है।
🏔️ मलंगगढ़ पहाड़ के तीन प्रमुख हिस्से
हाजी मलंग पहाड़ को तीन भागों में बांटा गया है:
- पीर माची: जहां मुख्य दरगाह स्थित है
- सोने माची: ऊपरी चट्टानी क्षेत्र
- बालेकिल्ला: पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी
फ्युनिक्युलर ट्रेन से पीर माची तक पहुंचना अब बेहद आसान हो गया है।
🙏 श्रद्धालुओं ने जताया आभार
ट्रेन सेवा शुरू होते ही श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल देखा गया।
खासतौर पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों के साथ आने वाले परिवारों ने इस सुविधा को “वरदान” बताया।
श्रद्धालुओं ने प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (PWD) और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पुत्र एवं सांसद श्रीकांत शिंदे का आभार व्यक्त किया।
❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. फ्युनिक्युलर ट्रेन किस दिन से शुरू हुई है?
👉 रविवार, 18 जनवरी 2026 से।
Q2. ट्रेन का किराया कितना है?
👉 एकतरफा ₹75 और रिटर्न ₹150।
Q3. क्या उरुस के दौरान ट्रेन सेवा बढ़ाई जाएगी?
👉 हां, उरुस के दिनों में दोनों दिशाओं में दो-दो कोच चलेंगे।
Q4. क्या बुजुर्ग और बच्चे सुरक्षित यात्रा कर सकते हैं?
👉 हां, यह सेवा पूरी तरह सुरक्षित और सुविधाजनक है।
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