Mumbai: बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजे आ चुके हैं, लेकिन शहर को मेयर मिलने में वक्त लगेगा। जानिए मेयर पद का आरक्षण लॉटरी से कैसे तय होता है, कानून क्या कहता है और इसमें एक हफ्ता क्यों लग सकता है।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव खत्म हो चुके हैं और नई जनरल बॉडी भी लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद मुंबई को तुरंत नया मेयर नहीं मिलेगा। इसकी वजह सिर्फ बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान नहीं है, बल्कि मेयर के चुनाव से जुड़ी एक कानूनी प्रक्रिया भी है। कानून के मुताबिक, मेयर पद का आरक्षण लॉटरी सिस्टम से तय होता है और जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक मेयर का चुनाव संभव नहीं है। इसी कारण मुंबई को नया मेयर मिलने में कम से कम एक हफ्ते का वक्त लग सकता है।
🏛️ Mumbai का मेयर तुरंत क्यों नहीं चुना जा सकता?
बीएमसी चुनाव के नतीजे आने के बाद आमतौर पर लोगों को लगता है कि मेयर का नाम भी तुरंत सामने आ जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि मेयर का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता है और उससे पहले कुछ कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी होता है।
सबसे अहम प्रक्रिया है मेयर पद का आरक्षण तय होना, जो सीधे चुनाव से नहीं बल्कि लॉटरी यानी ड्रॉ ऑफ लॉट्स से तय किया जाता है।
🎟️ क्या है मेयर पद का आरक्षण सिस्टम?
देशभर की शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) में मेयर पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू है।
इस व्यवस्था के तहत मेयर का पद अलग-अलग वर्गों के लिए रोटेशन के आधार पर आरक्षित किया जाता है, जैसे:
- अनुसूचित जाति (SC)
- अनुसूचित जनजाति (ST)
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
- महिलाएं
- सामान्य (ओपन) वर्ग
यह आरक्षण पहले से तय नहीं होता, बल्कि हर कार्यकाल में लॉटरी के ज़रिए तय किया जाता है।
📜 आरक्षण रोटेशन क्यों जरूरी है?
मेयर पद पर आरक्षण की व्यवस्था संविधान के 74वें संशोधन से जुड़ी है। इस संशोधन के तहत शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया और यह तय किया गया कि SC, ST और महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलें।
महाराष्ट्र में यह व्यवस्था नगरपालिका अधिनियम (Municipal Corporations Act) के तहत लागू होती है, जिसमें OBC आरक्षण भी शामिल है।
रोटेशन सिस्टम का मकसद यह है कि हर वर्ग को समय-समय पर मेयर बनने का मौका मिले और कोई एक वर्ग लगातार फायदे में न रहे।
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🎲 मेयर पद का फैसला लॉटरी से ही क्यों?
लॉटरी सिस्टम इसलिए अपनाया गया है ताकि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे।
अगर सरकार या राजनीतिक दल तय करें कि किस वर्ग के लिए मेयर पद आरक्षित होगा, तो उस पर पक्षपात और राजनीतिक दखल के आरोप लग सकते हैं।
ड्रॉ ऑफ लॉट्स से यह सुनिश्चित किया जाता है कि आरक्षण पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से तय हो।
🗂️ लॉटरी की प्रक्रिया कैसे होती है?
- शहरी विकास विभाग (Urban Development Department) लॉटरी कराने का नोटिफिकेशन जारी करता है
- पिछले कार्यकालों के आधार पर आरक्षण रोटेशन की सूची तैयार की जाती है
- सार्वजनिक रूप से लॉटरी (ड्रॉ) निकाली जाती है
- जिस वर्ग का नाम निकलता है, वही मेयर पद के लिए आरक्षित माना जाता है
- इसके बाद आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी होता है
जब तक यह पूरी प्रक्रिया खत्म नहीं होती, कोई भी पार्टी अपने मेयर उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर सकती।
🗳️ मेयर का चुनाव कैसे होता है?
आरक्षण तय होने के बाद बीएमसी की विशेष बैठक बुलाई जाती है।
मेयर का चुनाव पार्षदों के बीच से ही किया जाता है।
मुंबई की 227 सदस्यीय जनरल बॉडी में मेयर बनने के लिए कम से कम 114 पार्षदों का समर्थन जरूरी होता है।
पिछले दो कार्यकालों में लॉटरी के ज़रिए मेयर पद ओपन जनरल कैटेगरी में गया था।
👑 मुंबई मेयर के पास कितनी ताकत होती है?
कानून के मुताबिक, मुंबई का मेयर बीएमसी का औपचारिक (Ceremonial) प्रमुख होता है।
मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है और उनकी मुख्य जिम्मेदारियां हैं:
- जनरल बॉडी की बैठकों की अध्यक्षता
- सदन में व्यवस्था बनाए रखना
- बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट देना
- शहर के “First Citizen” के तौर पर आधिकारिक कार्यक्रमों में प्रतिनिधित्व करना
हालांकि, बीएमसी का प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) के पास होता है, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त IAS अधिकारी होते हैं।
❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या चुनाव नतीजों के तुरंत बाद मेयर चुना जा सकता है?
👉 नहीं, पहले मेयर पद का आरक्षण तय होना जरूरी है।
Q2. मेयर पद का आरक्षण कौन तय करता है?
👉 शहरी विकास विभाग लॉटरी के ज़रिए आरक्षण तय करता है।
Q3. मुंबई को नया मेयर मिलने में कितना वक्त लग सकता है?
👉 कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में लगभग एक हफ्ता लग सकता है।
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