Mumbai के मालाड इलाके में अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट सस्ते दामों में दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले फर्जी प्रॉपर्टी रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। जानिए पूरा मामला, आरोपी, modus operandi और कैसे बचें ऐसे फ्रॉड से।
मुंबई: सस्ते घर का सपना दिखाकर लोगों से लाखों-करोड़ों की ठगी करने वाले एक बड़े फर्जी फ्लैट रैकेट का मालाड पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य सरगना फरार है। आरोपी Housing.com, NoBroker जैसे बड़े रियल एस्टेट पोर्टल और सोशल मीडिया के ज़रिए करीब 1 करोड़ के फ्लैट को 60–70 लाख में बेचने का झांसा देकर लोगों से एडवांस रकम ऐंठते थे और फिर गायब हो जाते थे।
🏙️ क्या है पूरा मामला?
मालाड पुलिस के अनुसार, यह एक सुनियोजित प्रॉपर्टी फ्रॉड रैकेट था, जो अंडर-कंस्ट्रक्शन इमारतों को निशाना बनाकर लोगों को फंसाता था। आरोपी असली फ्लैट मालिक के दस्तावेज़ों से छेड़छाड़ कर खुद को मालिक बताकर सौदा करते थे। कागज़ात इतने असली लगते थे कि आम आदमी तो क्या, अनुभवी खरीदार भी धोखा खा जाते थे।
👤 शिकायतकर्ता का दर्दनाक अनुभव
इस केस के शिकायतकर्ता 31 वर्षीय नवलदेव नारायण राजपूत, निवासी मालाड ईस्ट हैं। आरोपियों ने उन्हें मालाड वेस्ट के जकारिया रोड स्थित शुभाश्री ऑर्चर्ड, फ्लैट नंबर 1301 दिखाया और बताया कि यह फ्लैट “पोपटलाल” नामक व्यक्ति का है।
4 नवंबर से 23 दिसंबर 2025 के बीच हुए इस सौदे में नवलदेव से करीब 30 लाख रुपये की ठगी की गई। जब आरोपी संपर्क से बाहर हो गए, तब 29 दिसंबर 2025 को मालाड पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई गई।
⚖️ किन धाराओं में केस दर्ज?
यह मामला मालाड पुलिस स्टेशन (CR No. 943/2025) में दर्ज किया गया है।
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें:
- धोखाधड़ी
- जालसाज़ी
- फर्जी पहचान (Impersonation)
- आपराधिक साजिश
- विश्वासघात और रकम का गबन
जैसी धाराएं शामिल हैं।
🕵️ Modus Operandi: ऐसे चलता था Mumbai में फर्जी फ्लैट रैकेट
पुलिस जांच में सामने आया कि गैंग में हर सदस्य की तय भूमिका थी:
- कासिम रशीद खान उर्फ अमित ठाकुर (फरार) – मास्टरमाइंड
- मोहम्मद रफीक रशीद खान – अंडर-कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग्स की फोटो खींचकर फर्जी विज्ञापन डालता था
- दीपक किरीट शाह (ब्रोकर) – खरीदारों से संपर्क कर भरोसा जीतता था
- निमेष अनिल मावणी – फर्जी आधार और पैन कार्ड से असली मालिक बनकर सौदा करता था
- हितेश केदारी और राजेश बिसुल प्रसाद – बैंक अकाउंट उपलब्ध कराते थे
जैसे ही एडवांस रकम अकाउंट में आती, पैसे निकाल लिए जाते और आरोपी अंडरग्राउंड हो जाते।
💳 बैंक ट्रांजैक्शन से खुला राज
पुलिस ने ASP Infra नामक अकाउंट में हुए संदिग्ध ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया। अकाउंट होल्डर हितेश केदारी को हिरासत में लेने के बाद तकनीकी जांच और पूछताछ से पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। इसके बाद मीरा रोड, बोरीवली और कांदिवली से आरोपियों को पकड़ा गया।
🚨 गिरफ्तार आरोपी कौन-कौन?
पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनके नाम हैं:
- हितेश रविंद्र केदारी (30) – डिलीवरी बॉय
- राजेश बिसुल प्रसाद (37) – डिलीवरी बॉय
- निमेष अनिल मावणी (49)
- मोहम्मद रफीक रशीद खान (38)
- दीपक किरीट शाह (47) – ब्रोकर
- राजन हर्षद कक्कड़ (45)
मुख्य आरोपी कासिम रशीद खान अभी फरार है।
👮 वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच
इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व API दीपक रायवाडे और PSI निलोबा जक्कलवाड़ ने किया।
जांच Additional CP शशि कुमार मीणा, DCP जोन XI संदीप जाधव, ACP प्रकाश बागल के मार्गदर्शन और Senior Inspector दुश्यंत चौहान की निगरानी में हुई।
🔑 कैसे बचें ऐसे प्रॉपर्टी फ्रॉड से?
- बहुत सस्ते दाम पर फ्लैट का ऑफर मिले तो सतर्क रहें
- असली मालिक से सीधे मिलकर दस्तावेज़ सत्यापित करें
- रजिस्ट्रार ऑफिस से डॉक्यूमेंट्स की क्रॉस-चेकिंग करें
- बिना एग्रीमेंट और वकील की सलाह के पैसे न दें
❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या बड़े पोर्टल पर विज्ञापन होने से सौदा सुरक्षित होता है?
👉 नहीं, फ्रॉड लोग बड़े पोर्टल का भी गलत इस्तेमाल करते हैं।
Q2. क्या अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट लेना सुरक्षित है?
👉 हां, लेकिन पूरी कानूनी जांच और RERA रजिस्ट्रेशन जरूरी है।
Q3. धोखाधड़ी होने पर क्या करें?
👉 तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं।
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