नकली RTO ऐप के नाम पर 65 वर्षीय मालाड निवासी से ₹7.6 लाख की ठगी

मुंबई के मालाड में 65 वर्षीय रिटायर्ड व्यक्ति को फर्जी RTO चालान ऐप के जरिए निशाना बनाया गया। ऐप डाउनलोड करवाकर स्कैमर ने मोबाइल फोन का कंट्रोल हासिल किया और खाते से ₹7.60 लाख उड़ा लिए। केस साइबर क्राइम और IT एक्ट के तहत दर्ज।

मुंबई: मालाड इलाके में एक 65 वर्षीय रिटायर्ड नागरिक कमलेश चौक्षी को ऑनलाइन चालान और RTO वेरिफिकेशन के नाम पर साइबर ठगों ने बड़ा झांसा दिया। फेक ऐप इंस्टॉल करवाकर स्कैमर्स ने पीड़ित के मोबाइल की पूरी एक्सेस ले ली और बैंक अकाउंट से धीरे-धीरे ₹7.6 लाख उड़ा लिए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

🔍 घटना कैसे हुई — पूरी कहानी

➡ फर्जी ऐप डाउनलोड करवाकर जाल बिछाया

सूत्रों के मुताबिक, पीड़ित ने हाल ही में सेकेंड-हैंड कार खरीदी थी।
कार बेचने वाले व्यक्ति ने उनसे कहा कि RTO का ₹2,000 चालान बाकी है, जिसे उन्हें मोबाइल ऐप के जरिए भरना होगा।

कमलेश ने बताए अनुसार ऐप डाउनलोड किया और ₹2,000 जमा कर दिए।

🟢 अगले ही दिन — पूरा पैसा वापस आ गया, ताकि पीड़ित का भरोसा जीत सकें।
पुलिस का मानना है कि यह साइबर ठगों की सोची-समझी तकनीक थी।

➡ मोबाइल कंट्रोल में लेने के बाद फ्रॉड शुरू

26 नवंबर को पीड़ित के फोन पर अचानक HDFC बैंक की लगातार तीन ट्रांजेक्शन अलर्ट आए:

लेनदेन प्रकारराशि
NEFT ट्रांसफर₹4.90 लाख
मोबाइल बैंकिंग₹1 लाख
मोबाइल बैंकिंग₹1.70 लाख

पीड़ित ने जब अलर्ट देखा, तब तक उनका मोबाइल स्क्रीन अनजाने में खुद चल रहा था — यानी हैकर फोन रिमोट कंट्रोल से ऑपरेट कर रहा था।

➡ परिवार ने उठाया कदम, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी

पीड़ित ने तत्काल अपने बेटे को सूचना दी।
बेटा दौड़कर बैंक पहुंचा और अकाउंट को फ्रीज कराया — लेकिन तब तक पूरी रकम खाते से निकल चुकी थी।

👮‍♂️ पुलिस कार्रवाई

मालाड पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। FIR में धोखाधड़ी की धारा और IT एक्ट शामिल किए गए हैं।

जांच में पाया गया कि ‘RTO Challan Payment’ नाम का ऐप फेक था, और इसी के जरिए फोन हैक किया गया।

🧠 साइबर विशेषज्ञों की सलाह

✔ RTO, बैंक या सरकारी ऐप हमेशा सरकारी वेबसाइट और Play Store Verified Source से डाउनलोड करें।
✔ किसी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसका डोमेन जांचें।
✔ फोन स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें।


🔎 FAQ — आम सवाल और जवाब

1️⃣ सवाल: क्या यह ऐप असली RTO से जुड़ा था?
👉 नहीं, पुलिस जांच में यह नकली और फ्रॉड एप्लिकेशन पाया गया।

2️⃣ सवाल: क्या पैसे वापस मिल सकते हैं?
👉 साइबर पुलिस पैसे ट्रेस कर रही है, पर वापसी की गारंटी नहीं होती — लेकिन तुरंत रिपोर्ट से संभावना बढ़ जाती है।

3️⃣ सवाल: ऐसे मामले की शिकायत कहाँ करें?
👉 1930 हेल्पलाइन नंबर या साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।


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